फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   Pilibhit tigers to roar all over UP

यूपी में सुनाई देगी पीलीभीत के बाघों की दहाड़

Wed, 07 Mar 2018 06:56 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,पीलीभीत Updated Wed, 07 Mar 2018 06:56 PM IST
विज्ञापन
Pilibhit tigers to roar all over UP
टाइगर

बाघों के संरक्षण के लिए जिले को करीब तीन वर्ष पहले टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था, लेकिन बढ़ती संख्या और जंगल से बाहर आने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अब विभाग अपनी बला टालने लगा है। अब तक चार बाघों को जिले से बाहर भेजा जा चुका है। इसमें दो बाघ कानपुर व लखनऊ चिड़ियाघर में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं जबकि एक करतनिया घाट पहुंच चुका है। अब ‘चंदू’ को भी पीलीभीत से हटाकर दुधवा भेजा गया है।

विज्ञापन

प्रकृति संरक्षण और जीवन चक्र को बनाए रखने के लिए बाघ सबसे अहम कड़ी है। इसको देखते हुए ही सरकार बाघों के संरक्षण के लिए कड़े कानून बनाने के साथ ही करोड़ों रुपये खर्च करती हैं। नौ जून 2014 को पीलीभीत के जंगलों को भी टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। इसके बाद से यहां बाघों की संख्या 35 से बढ़कर 55 से अधिक तक पहुंच गई हैं। वनविभाग बाघों की बढ़ती संख्या को ही इनके बाहर आने का प्रमुख कारण तो मान रही है लेकिन इन्हें जंगल से बाहर आने से रोकने के उपाय करने में रूचि नहीं दिखा रहा है और न ही जंगल के बाहर घूम रहे बाघों को जंगल में खदेड़ने के कोई प्रयास कर रहा है। विभाग ने अब किसी घटना के बाद बाघ को पकड़कर जिले से बाहर भेजना सबसे आसान और गलत परंपरा को अपनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत टाइगर रिजर्व बनने के तीन बाघों को जिले से बाहर भेज दिया है जबकि एक बाघ इससे पहले भेजा जा चुका है। बाघ को जिले से बाहर भेजने का पहला मामला टाइगर रिजर्व बनने से पहले आया था जबकि पीलीभीत से निकलकर शाहजहांपुर होते हुए कानपुर की ओर बढ़ रहेे बाघ को पकड़ने के बाद कानपुर के चिड़ियाघर में छोड़ा गया था। इसके बाद करीब डेढ़ वर्ष पूर्व माधोटांडा क्षेत्र में आतंक का पर्याय बने मल्लू उर्फ मुस्तफा को लखनऊ चिड़ियाघर भेजा गया था। अब दो ताजा मामले सामने आए हैं। पांच फरवरी को गजरौला थाना क्षेत्र से पकड़ी बाघिन ‘विधि’ को बहराइच के करतनिया घाट छोड़ा गया और अब चांदूपुर से पकड़े बाघ चंदू को दुधवा भेजा गया है। यदि वनविभाग चाहता तो चंदू एवं विधि दोनों को बराही अथवा हरीपुर रेंज में छोड़ा जा सकता था लेकिन कहीं यह बाघ पुन: मुसीबत न बन जाए इसलिए उच्चाकारियों को तमाम समस्याएं समझाकर जिले से हटा दिया। यदि जिले से बाघों का यू ही जाना जारी रहा तो टाइगर रिजर्व के मायने ही खत्म हो जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed