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वन भूमि पर साल दर साल बढ़ रहे अवैध कब्जे
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Tue, 20 Jun 2017 07:07 PM IST
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वन विभाग की लचर प्रणाली के चलते सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जे हैं। कहीं लोग लचर व्यवस्था के चलते कोर्ट का सहारा लेकर खेती कर रहे हैं तो कहीं वन विभाग ने अपनी गर्दन बचाने को न तो अतिक्रमण हटवाया और न ही अवैध कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया हैं। वन विभाग बरुआ कुठारा में हाईकोर्ट से जीते हुए मुकदमे में लंबे समय से कब्जा नहीं ले सका। नतीजा यह निकला कि अवैध कब्जेदार दुबारा हाईकोर्ट पहुंचकर स्टे ले आए। कमोवेश यही स्थिति अन्य जगहों पर है। जहां विभाग अपनी लचर व्यवस्था के चलते सैकड़ों एकड़ वन भूमि पर आज तक कब्जा नहीं ले सका और कब्जेदार अदालत की शरण में चले गए। नौजल्हा में भी करीब डेढ़ वर्ष पूर्व ऐसे ही हुआ था। जब शारदा नदी के कटान से बेघर 39 परिवारों ने वन भूमि पर कब्जा कर लिया। वन विभाग ने रोकने की कोशिश तो की, लेकिन राजस्व प्रशासन से सामंजस्य की कमी के चलते कब्जा नहीं ले सका। यहां भी अवैध कब्जेदार कोर्ट की शरण में चले गए और बंजर भूमि को तोड़कर खेती करने के साथ पूरी बस्ती बसा ली गई। वन विभाग मूक दर्शक बना रहा। इसी तरह बूदीभूड़ व बंदरबोझ के सौ लोगों के खिलाफ एसडीएम कोर्ट में मुकदमे चल रहे हैं। नौजल्हा रमनगरा सहित कई इलाकों की सैकड़ों एकड़ भूमि वर्ष 1999 में वन भूमि दर्ज कर दी गई, लेकिन इस भूमि पर अब भी पक्के मकान बन रहे है और खेती भी हो रही है। इसके अलावा ढकिया तालुके महाराजपुर, रमनगरा, गुन्हान, भूड़ा गोरखडिब्बी, वीरखेड़ा व राजपुर ताल्लुके सिमरा क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि पर अवैध कब्जेदार खेती कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग उनके खिलाफ कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा पा रहा है। यही वजह है कि वन विभाग ने ऐसे लोगों के खिलाफ विभागीय केस भी नहीं काटा। मात्र कुछ लोगों के खिलाफ रमनगरा क्षेत्र में विभागीय केस वर्षों पूर्व काटकर खानापूर्ति कर दी थी।
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