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सारी कवायद बेकार, जिला अस्पताल में नहीं बड़ी डॉक्टरों की संख्या
सार
तमाम दावों और वादों के बीच जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ सकी।इसके विपरीत कई कमी के कारण डॉक्टरों की कुर्सियां खाली रहती है।सख्ती के बाद सभी को रिलीव कर दिया गया, मगर उनके स्थान पर आने वाले डॉक्टरों ने कार्यभार नहीं संभाला।
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बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में डॉक्टर के इंतजार में बैठे मरीज। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
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विस्तार
पीलीभीत। तमाम दावों और वादों के बीच जिला अस्पताल में डॉक्टरों की संख्या नहीं बढ़ सकी। डॉक्टरों की कमी पूरी करने के लिए विभागीय स्तर से शासन को पत्राचार भी किया गया पर नतीजा शून्य ही रहा। खास बात यह रही कि पूर्व में निरीक्षण के दौरान डिप्टी सीएम ब्रजेश कुमार पाठक ने भी डॉक्टरों की कमी को पूरा करने की बात कही थी, पर कोई नतीजा नहीं निकला। ऐसे में सीमित डॉक्टरों होने के कारण कई मरीज बिना दिखाए ही लौट जाने को मजबूर हैं।
शासन स्तर से हुए तबादलों के बाद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं। यहां 26 की जगह मात्र 13 चिकित्सक ही तैनात हैं। इसमें जनरल सर्जन, चेस्ट फिजिशियन, डेंटल सर्जन समेत अन्य 13 पद खाली हैं। एक भी इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर न होने से डॉक्टरों पर ओपीडी के अलावा इमरजेंसी ड्यूटी की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में रात में ड्यूटी के बाद डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठ रहे।
यहां बता दें कि अगस्त और सितंबर माह में प्रभारी सीएमएस रहे डॉ. बीएस यादव ने डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया था, मगर कोई नतीजा नहीं निकल सका। पिछले माह जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे डिप्टी सीएम ब्रजेश कुमार पाठक ने भी समस्या के समाधान की बात कही पर स्थिति जस की तस रही।
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इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भरमार है। इसके विपरीत कई कमी के कारण डॉक्टरों की कुर्सियां खाली रहती है। मरीज इंतजार करने बाद बिना विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाए ही लौट जाते हैं।
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तीन डॉक्टर छुट्टी पर, शेष डॉक्टरों पर ओपीडी के साथ इमरजेंसी की भी जिम्मेदारी
डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी, इमरजेंसी ड्यूटी को नियमित रखना चुनौती बना हुआ है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर छुट्टी पर भी जाते हैं। इन दिनों बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएस यादव छुट्टी पर चल रहे हैं। बृहस्पतिवार को त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह और ईएनटी के डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा भी छुट्टी पर रहे। इस सबके चलते अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को काफी परेशानी हुई।
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रोजाना बढ़ रहे अस्पताल में मरीज
वायरल बुखार के प्रकोप के बीच जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो एक अक्तूबर को 1110 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, तीन अक्तूबर को 1149 तो चार अक्तूबर को 526। जबकि पांच अक्तूबर को यह संख्या 473 रही। इसके विपरीत बृहस्पतिवार को यह संख्या फिर 12 सौ पहुंच गई।
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कई डॉक्टरों ने अब तक नहीं किया ज्वाइन
दो माह पहले शासन स्तर से डॉक्टरों के तबादले किए गए। जिला अस्पताल में तैनात पांच डॉक्टरों का भी तबादला किया गया। सख्ती के बाद सभी को रिलीव कर दिया गया, मगर उनके स्थान पर आने वाले डॉक्टरों ने कार्यभार नहीं संभाला। एक माह बाद सितंबर माह में रेडियोलाजिस्ट ने जरूर ज्वाइन कर कार्य शुरू कर दिया पर इससे समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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तबादलों के बाद कई डॉक्टरों ने अब तक ज्वाइन नहीं किया है। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए तीन आयूष चिकित्सकों की जिला अस्पताल में ड्यूटी लगाई गई है।
- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ
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शासन स्तर से हुए तबादलों के बाद जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाएं लड़खड़ा गईं। यहां 26 की जगह मात्र 13 चिकित्सक ही तैनात हैं। इसमें जनरल सर्जन, चेस्ट फिजिशियन, डेंटल सर्जन समेत अन्य 13 पद खाली हैं। एक भी इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर न होने से डॉक्टरों पर ओपीडी के अलावा इमरजेंसी ड्यूटी की भी जिम्मेदारी है। ऐसे में रात में ड्यूटी के बाद डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठ रहे।
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यहां बता दें कि अगस्त और सितंबर माह में प्रभारी सीएमएस रहे डॉ. बीएस यादव ने डॉक्टरों की कमी को पूरा करने के लिए शासन स्तर पर पत्राचार किया था, मगर कोई नतीजा नहीं निकल सका। पिछले माह जिला अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचे डिप्टी सीएम ब्रजेश कुमार पाठक ने भी समस्या के समाधान की बात कही पर स्थिति जस की तस रही।
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इन दिनों जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भरमार है। इसके विपरीत कई कमी के कारण डॉक्टरों की कुर्सियां खाली रहती है। मरीज इंतजार करने बाद बिना विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाए ही लौट जाते हैं।
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तीन डॉक्टर छुट्टी पर, शेष डॉक्टरों पर ओपीडी के साथ इमरजेंसी की भी जिम्मेदारी
डॉक्टरों की कमी के चलते ओपीडी, इमरजेंसी ड्यूटी को नियमित रखना चुनौती बना हुआ है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर छुट्टी पर भी जाते हैं। इन दिनों बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीएस यादव छुट्टी पर चल रहे हैं। बृहस्पतिवार को त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. एसपी सिंह और ईएनटी के डॉ. प्रवीण कुमार शर्मा भी छुट्टी पर रहे। इस सबके चलते अस्पताल की ओपीडी में मरीजों को काफी परेशानी हुई।
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रोजाना बढ़ रहे अस्पताल में मरीज
वायरल बुखार के प्रकोप के बीच जिला अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो एक अक्तूबर को 1110 मरीज जिला अस्पताल पहुंचे, तीन अक्तूबर को 1149 तो चार अक्तूबर को 526। जबकि पांच अक्तूबर को यह संख्या 473 रही। इसके विपरीत बृहस्पतिवार को यह संख्या फिर 12 सौ पहुंच गई।
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कई डॉक्टरों ने अब तक नहीं किया ज्वाइन
दो माह पहले शासन स्तर से डॉक्टरों के तबादले किए गए। जिला अस्पताल में तैनात पांच डॉक्टरों का भी तबादला किया गया। सख्ती के बाद सभी को रिलीव कर दिया गया, मगर उनके स्थान पर आने वाले डॉक्टरों ने कार्यभार नहीं संभाला। एक माह बाद सितंबर माह में रेडियोलाजिस्ट ने जरूर ज्वाइन कर कार्य शुरू कर दिया पर इससे समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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तबादलों के बाद कई डॉक्टरों ने अब तक ज्वाइन नहीं किया है। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए तीन आयूष चिकित्सकों की जिला अस्पताल में ड्यूटी लगाई गई है।
- डॉ. आलोक कुमार, सीएमओ