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साहब! स्कूलों में टाइल्स लगाने को रात ही बची है
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माधोटांडा/पीलीभीत। एक तरफ शासन-प्रशासन विकास के दावे करते हुए तमाम कार्य कराने का दावा कर पीठ थपथपाने में जुुटा है, वहीं दूसरी ओर किस तरह से अफसरों की नजरंदाजी के चलते मातहतों की लापरवाही विकास कार्यों का पलीता लगा रही है, इसकी तस्वीर बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट योजना के तहत सीमावर्ती ग्रामों की दशा को सुधारने के लिए कराए जा रहे काम को देख कर उजागर हो रही है। बॉर्डर क्षेत्र के स्कूलों में कराए जा रहे काम दिन में न होकर रात के वक्त कराए जा रहे हैं। मानकों को पूरा करने पर कोई ध्यान नहीं है। सिर्फ काम को जल्द निपटाने पर जोर है। कई स्थानों पर पुरानी सामग्री का भी प्रयोग हो रहा है। खास बात है कि इसको जानकर भी अफसर अंजान बने हुए हैं।
इंडो नेपाल बॉर्डर से सटी ग्राम पंचायतों में बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट समेत अन्य योजनाओं के तहत विकास कार्य कराए जा रहे हैं। चाहे वे गांव की जर्जर सड़कें हो या स्कूलों का सुधार। इन पर शासन की सख्ती के बाद काम तो शुरू करा दिया गया है लेकिन गंभीरता नहीं बरती जा रही है। आलम यह है कि अधिकांश कार्य क्षेत्र के कुछ चुनिंदा रोजगार सेवकों को दे दिए गए हैं। अब वे मनमाफिक तरीके से इसको जल्द पूरा कराने में जुटे हैं। मानकों पर कोई ध्यान नहीं है। अफसर नजर अंदाज कर रहे हैं और विकास कार्यों को पलीता लगाया जा रहा है। नौजल्हा नकटहा, सेल्हा, मटईया लालपुर, पुरैना ताल्लुके महाराजपुर समेत कई ग्राम पंचायतों में तो खड़ंजा निर्माण में घपलेबाजी भी हुई है। नई के बजाय पुरार्नी इंटों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों को स्वच्छ बनाने के लिए फर्श, टाइल्स और इंटरलॉकिंग कराई जा रही है। इसकी गुणवत्ता को भी दरकिनार कर दिया गया है। यह काम दिन में सही ढंग से कराने के बजाय रात के अंधेरे में जल्दबाजी में पूरा कराया जा रहा है। चर्चा तो यह भी है कि रात के समय काम इसलिए कराया जा रहा है ताकि कोई कमी पकड़ में न आए।
..कहीं अफसरों की भी मिलीभगत तो नहीं
विकास कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। स्थानीय लोग खुलकर भले ही इस बात को न कह रहे हों, लेकिन उनके बीच भी खामियों की चर्चा लगातार है। अधिकारी भी इससे अंजान नहीं है। बावजूद इसके अब तक कोई सख्ती नहीं की गई है। ऐसे में अफसरों की गंभीरता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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अब तक इस तरह की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। सरकारी योजनाओं के तहत कराए जा रहे कार्यों में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण कार्य की गहनता से जांच कराई जाएगी। अगर कोई गड़बड़ी पाई गई तो एक्शन लिया जाएगा।
- रमेश चंद्र पांडे, सीडीओ
स्कूलों में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जाती है। कर्मचारियों को इसको लेकर निगाह रखने के निर्देश पहले से दिए गए हैं। कोई खामी निकलकर आती है, तो आला अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
- देवेंद्र स्वरूप, बीएसए
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इंडो नेपाल बॉर्डर से सटी ग्राम पंचायतों में बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट समेत अन्य योजनाओं के तहत विकास कार्य कराए जा रहे हैं। चाहे वे गांव की जर्जर सड़कें हो या स्कूलों का सुधार। इन पर शासन की सख्ती के बाद काम तो शुरू करा दिया गया है लेकिन गंभीरता नहीं बरती जा रही है। आलम यह है कि अधिकांश कार्य क्षेत्र के कुछ चुनिंदा रोजगार सेवकों को दे दिए गए हैं। अब वे मनमाफिक तरीके से इसको जल्द पूरा कराने में जुटे हैं। मानकों पर कोई ध्यान नहीं है। अफसर नजर अंदाज कर रहे हैं और विकास कार्यों को पलीता लगाया जा रहा है। नौजल्हा नकटहा, सेल्हा, मटईया लालपुर, पुरैना ताल्लुके महाराजपुर समेत कई ग्राम पंचायतों में तो खड़ंजा निर्माण में घपलेबाजी भी हुई है। नई के बजाय पुरार्नी इंटों का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा सरकारी स्कूलों को स्वच्छ बनाने के लिए फर्श, टाइल्स और इंटरलॉकिंग कराई जा रही है। इसकी गुणवत्ता को भी दरकिनार कर दिया गया है। यह काम दिन में सही ढंग से कराने के बजाय रात के अंधेरे में जल्दबाजी में पूरा कराया जा रहा है। चर्चा तो यह भी है कि रात के समय काम इसलिए कराया जा रहा है ताकि कोई कमी पकड़ में न आए।
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..कहीं अफसरों की भी मिलीभगत तो नहीं
विकास कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। स्थानीय लोग खुलकर भले ही इस बात को न कह रहे हों, लेकिन उनके बीच भी खामियों की चर्चा लगातार है। अधिकारी भी इससे अंजान नहीं है। बावजूद इसके अब तक कोई सख्ती नहीं की गई है। ऐसे में अफसरों की गंभीरता पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
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अब तक इस तरह की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। सरकारी योजनाओं के तहत कराए जा रहे कार्यों में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्माण कार्य की गहनता से जांच कराई जाएगी। अगर कोई गड़बड़ी पाई गई तो एक्शन लिया जाएगा।
- रमेश चंद्र पांडे, सीडीओ
स्कूलों में कराए जाने वाले कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखी जाती है। कर्मचारियों को इसको लेकर निगाह रखने के निर्देश पहले से दिए गए हैं। कोई खामी निकलकर आती है, तो आला अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
- देवेंद्र स्वरूप, बीएसए