{"_id":"5d601d0f8ebc3e015e1b4697","slug":"cultural-pilibhit-news-bly3733330186","type":"story","status":"publish","title_hn":"‘दृढ़तापूर्वक सत्य का आचरण करें’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
‘दृढ़तापूर्वक सत्य का आचरण करें’
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। आर्य समाज के तत्वावधान में चल रहे वेद प्रचार उत्सव के चौथे दिन शुक्रवार को डॉ. जयेंद्र कुमार शास्त्री के निर्देेशन में यज्ञ हुआ।
स्टेशन रोड स्थित आर्यसमाज मंदिर में चल रहे उत्सव में शुक्रवार को भजनोपदेशक ने भजनों के माध्यम से ईश्वर की महिमा का बखान किया। इसके बाद डॉ. जयेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति स्वर्ग में जाने की इच्छा रखता है। नरक में कोई नहीं जाना चाहता। स्वर्ग की कल्पना संसार के सभी धर्मों में अपने अपने ढंग से की गई है। उन्होंने स्वर्ग की व्याख्या करते हुए कहा कि स्वर्ग का अर्थ है सुख विशेष। धर्म की सीढ़ी पर चढ़कर जीवन में निष्पक्षता, अहंकार, शून्यता, सरलता, करुणा आदि प्रवृत्तियों से अपना ही सुख प्राप्त किया जा सकता है। जो व्यक्ति भीतर बाहर एक सा रहता है वह व्यक्ति अधर्मी नहीं हो सकता। इसीलिए दृढ़तापूर्वक सत्य का आचरण करना चाहिए। इन गुणों को धारण करने वाला मनुष्य अपना जीवन रहते हुए स्वर्ग का सुख प्राप्त कर लेता है। कार्यक्रम में मनमोहन सक्सेना, श्याममुरारी, कृष्णऔतार कंसल, प्रकाशवीर, तेज नारायण गंगवार, झम्मन लाल, दिव्या शुक्ला, स्वर्णलता, मधुबाला, सुशीला आर्या आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
स्टेशन रोड स्थित आर्यसमाज मंदिर में चल रहे उत्सव में शुक्रवार को भजनोपदेशक ने भजनों के माध्यम से ईश्वर की महिमा का बखान किया। इसके बाद डॉ. जयेंद्र कुमार शास्त्री ने कहा कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति स्वर्ग में जाने की इच्छा रखता है। नरक में कोई नहीं जाना चाहता। स्वर्ग की कल्पना संसार के सभी धर्मों में अपने अपने ढंग से की गई है। उन्होंने स्वर्ग की व्याख्या करते हुए कहा कि स्वर्ग का अर्थ है सुख विशेष। धर्म की सीढ़ी पर चढ़कर जीवन में निष्पक्षता, अहंकार, शून्यता, सरलता, करुणा आदि प्रवृत्तियों से अपना ही सुख प्राप्त किया जा सकता है। जो व्यक्ति भीतर बाहर एक सा रहता है वह व्यक्ति अधर्मी नहीं हो सकता। इसीलिए दृढ़तापूर्वक सत्य का आचरण करना चाहिए। इन गुणों को धारण करने वाला मनुष्य अपना जीवन रहते हुए स्वर्ग का सुख प्राप्त कर लेता है। कार्यक्रम में मनमोहन सक्सेना, श्याममुरारी, कृष्णऔतार कंसल, प्रकाशवीर, तेज नारायण गंगवार, झम्मन लाल, दिव्या शुक्ला, स्वर्णलता, मधुबाला, सुशीला आर्या आदि मौजूद रहे।