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मैलानी और शाहगढ़ के बीच मार्च में हो सकता है सीआरएस निरीक्षण
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पीलीभीत। लखनऊ रूट पर आमान परिवर्तन का काम मैलानी और शाहगढ़ के बीच तेजी से चल रहा है। ब्रॉडगेज की पटरियां डालने का काम भी पूरा होने को है। कार्यदायी संस्था सिग्नल और प्वाइंट के काम को अंतिम रूप देने में जुटी है। संस्था के अधिकारियों ने रेल संरक्षा आयुक्त (सीआरएस) निरीक्षण के लिए प्रस्ताव भी भेज दिया है। ऐसे में मार्च में सीआरएस निरीक्षण होने संभावना जताई जा रही है।
30 मई 2018 को मीटरगेज ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया था। एक जून 2018 से आमान परिवर्तन का काम शुरू किया गया। कार्य का जिम्मा रेल विकास निगम लिमिटेड को दिया गया। इसके बाद मैलानी की ओर से ब्रॉडगेज का काम शुरू हुआ था। शाहगढ़ और पीलीभीत स्टेशन के मध्य करीब आठ किलोमीटर का जंगल क्षेत्र है। इसे लेकर कार्यदायी संस्था ने टाइगर रिजर्व से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए 2018 में ही आवेदन कर दिया था। टाइगर रिजर्व की हीलाहवाली के चलते एनओसी नहीं मिल सकी है। इससे कार्यदायी संस्था ने मैलानी और शाहगढ़ के बीच ब्रॉडगेज काम तेजी से शुरू कर दिया था, जोकि 80 फीसदी हो चुका है। इसके बाद कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने मैलानी और शाहगढ़ के बीच रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण की भी तैयार शुरू कर दी है। संस्था ने नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्ताव बनाकर भी भेज दिया। उम्मीद है कि मार्च में सीआरएस निरीक्षण हो सकता है।
तो मैलानी और शाहगढ़ के बीच दौड़ेगी ट्रेन
पीलीभीत और मैलानी की दूरी करीब 61 किलोमीटर है। ऐसे में करीब 42 किलोमीटर में सीआरएस निरीक्षण होगा। अगर सीआरएस ने ब्रॉडगेज के कार्य को हरी झंडी दे दी, तो मैलानी और शाहगढ़ के बीच ही ट्रेनों को संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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मैलानी और शाहगढ़ के बीच तेजी के साथ काम चल रहा है। जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने का प्रयास है। सीआरएस निरीक्षण के लिए नवंबर में प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया था। उम्मीद है कि मार्च तक निरीक्षण हो सकता है। - संजय सिंह, सहायक प्रबंधक, आरवीएनएल
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30 मई 2018 को मीटरगेज ट्रेनों का संचालन बंद कर दिया था। एक जून 2018 से आमान परिवर्तन का काम शुरू किया गया। कार्य का जिम्मा रेल विकास निगम लिमिटेड को दिया गया। इसके बाद मैलानी की ओर से ब्रॉडगेज का काम शुरू हुआ था। शाहगढ़ और पीलीभीत स्टेशन के मध्य करीब आठ किलोमीटर का जंगल क्षेत्र है। इसे लेकर कार्यदायी संस्था ने टाइगर रिजर्व से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के लिए 2018 में ही आवेदन कर दिया था। टाइगर रिजर्व की हीलाहवाली के चलते एनओसी नहीं मिल सकी है। इससे कार्यदायी संस्था ने मैलानी और शाहगढ़ के बीच ब्रॉडगेज काम तेजी से शुरू कर दिया था, जोकि 80 फीसदी हो चुका है। इसके बाद कार्यदायी संस्था के अधिकारियों ने मैलानी और शाहगढ़ के बीच रेल संरक्षा आयुक्त के निरीक्षण की भी तैयार शुरू कर दी है। संस्था ने नवंबर के अंतिम सप्ताह में प्रस्ताव बनाकर भी भेज दिया। उम्मीद है कि मार्च में सीआरएस निरीक्षण हो सकता है।
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तो मैलानी और शाहगढ़ के बीच दौड़ेगी ट्रेन
पीलीभीत और मैलानी की दूरी करीब 61 किलोमीटर है। ऐसे में करीब 42 किलोमीटर में सीआरएस निरीक्षण होगा। अगर सीआरएस ने ब्रॉडगेज के कार्य को हरी झंडी दे दी, तो मैलानी और शाहगढ़ के बीच ही ट्रेनों को संचालन शुरू कर दिया जाएगा।
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मैलानी और शाहगढ़ के बीच तेजी के साथ काम चल रहा है। जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने का प्रयास है। सीआरएस निरीक्षण के लिए नवंबर में प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया था। उम्मीद है कि मार्च तक निरीक्षण हो सकता है। - संजय सिंह, सहायक प्रबंधक, आरवीएनएल