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बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र- सपा, बसपा और कांग्रेस के लिए भाजपा का किला भेदने की चुनौती

Mon, 17 Jan 2022 02:21 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 17 Jan 2022 02:21 AM IST
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Barkhera vidhansabha seat
बरखेड़ा कस्बा। - फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। बरखेड़ा विधानसभा सीट शुरू से ही भाजपा और जनसंघ का गढ़ रही है। भाजपा और जनसंघ ने विजय पताका आठ बार फहराई है। पांच बार भाजपा, तीन बार भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार विधायक बने। जनता पार्टी का एक बार कब्जा रहा। मौजूदा समय में सीट भाजपा के पास है। हालांकि दो बार सपा और एक बार कांग्रेस के खाते में भी सीट गई है। फिर भी भाजपा का किला भेदने के लिए सपा, बसपा और कांग्रेस को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस ने हरप्रीत सिंह चब्बा को उम्मीदवार बनाया है। अन्य प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार का इंतजार है।
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अतीत पर नजर डालें तो बरखेड़ा विधानसभा क्षेत्र के लिए वर्ष 1967 में पहला चुनाव हुआ। भारतीय जनसंघ से किशनलाल ने चुनाव जीता। इसके बाद 1969, 1974 में फिर किशनलाल जनसंघ से चुनाव लगातार जीते थे। वर्ष 1977 में किशनलाल जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े और फिर जीत दर्ज की। 1980 में कांग्रेस से बाबूराम विधायक बने तो 1985 में फिर भाजपा से किशनलाल विधानसभा पहुंचे। 1989 में यह सीट किसी पार्टी के खाते में नहीं गई और सन्नुलाल निर्दलीय विधायक बने थे। मगर भाजपा ने पीछा नहीं छोड़ा 1991 में फिर भाजपा ने किशनलाल पर भरोसा कर मैदान में उतारा और सीट अपने कब्जे में ले ली। 1993 में फिर किशनलाल भाजपा से विधायक बने थे। 1996 में समाजवादी जनता पार्टी राष्ट्रीय से पीतमराम विधायक बने थे। 2002 में फिर सपा से पीतमराम विधायक चुने गए थे। 2007 में फिर भाजपा ने सीट पर कब्जे करते हुए सुखलाल को विधायक बनवाया था। 2012 में सपा से हेमराज वर्मा विधायक बने, तो 2017 में फिर भाजपा से किशनलाल राजपूत विधायक चुने गए। भाजपा ने उतार चढ़ाव साथ पांच बार जीत हासिल की। ऐसे हालात में इस बार बरखेड़ा विधानसभा में भाजपा का किला भेदना आसान नहीं होगा। विपक्ष के लिए कब्जा करना जबरदस्त चुनौती बना हुआ है।
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जीत का खाता खोलने की चुनौती से जूझ रही है बसपा
बहुजन समाज पार्टी के लिए यह सीट चुनौती भरी रही। कभी जीत का खाता नहीं खुला। वर्ष 2012 में सुरक्षित सीट का दर्जा हटने के बाद सपा ने लोध राजपूत उम्मीदवार के रूप में हेमराज वर्मा को चुनाव मैदान में उतारा और जीत हासिल की। पहली बार विधायक बने हेमराज को राज्यमंत्री का पद मिल गया। इसके बाद 2017 के चुनाव में फिर से हेमराज वर्मा को टिकट सपा से मिला, तो भाजपा ने टक्कर देने के लिए उन्हीं की बिरादरी के उम्मीदवार किशनलाल राजपूत को मैदान में उतार दिया। दोनों में जबरदस्त टक्कर हुई। भाजपा से किशनलाल राजपूत विधायक बन गए।
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16 पीबीटीपी 2
हमेशा अच्छी सरकार बनाने के लिए सोचकर वोट करते हैं। विकास के साथ गरीबों का भी उत्थान हो सके। इस बार भी जो धरातल पर विकास की बात करेगा। उसी को वोट करेंगे। किसी जाति धर्म से मतलब नहीं। - भारतवीर, बरखेड़ा
16 पीबीटीपी 3
वोट करने से पहले उच्च शिक्षा, विकास, परिवहन के बारे में सोचकर कर वोट करते आए हैं। सरकार ऐसी बने जो सबका भला करे। परिवहन व्यवस्था और बेहतर होनी चाहिए। इसी सोच के साथ वोट करेंगे। - कालीचरन, भैसहा ग्वालपुर
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जो भी सरकार आती है। लंबे वादे कर वोट तो ले लेती है। इसके बाद सरकार के प्रतिधिनि विकास कराने की बात भूल जाते हैं। इस बार सोच समझ कर वोट करेंगे। ताकि अच्छी सरकार बन सके। - प्रीतम सिंह कुशवाहा, बरखेड़ा
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विकास के साथ बच्चों के भविष्य के बारे में सोचे। महंगाई कम करे, सड़कों की हालत बदल सके। अच्छी सरकार बनेगी। तभी बदलाव आएगा। यही सोंचकर वोट करेंगे। - ओमप्रकाश, सिमरिया ताराचंद
युवा बोले-
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रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं ताकि कोई हाथ न रहे खाली
पीलीभीत। उच्च शिक्षा के लिेए बेहतर व्यवस्था दे और कम फीस में पढ़ाई के अवसर देने वाली सरकार चाहिए। युवाओं की यही राय बातचीत में सामने आई। युवाओं ने कहा- गांव के आसपास इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद डिग्री कालेज में पढ़ने का मौका मिलना चाहिए क्योंकि सभी युवा बाहर जाकर पढ़ाई के लिए खर्च करने की स्थिति में नहीं हैं। युवाओं ने खेल के मैदान विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही यह भी कहा कि युवाओं की बढ़ती संख्या के हिसाब से रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं ताकि कोई हाथ खाली न रहे।
विधानसभा चुनाव में पहले बार वोट करने का मौका मिला रहा है। इससे पहले ग्राम पंचायत के चुनाव में वोट किया था। मुखिया चुनने का मौका चाहे गांव का हो या फिर प्रदेश का सोच समझकर ही मतदान करें। इससे अच्छी सरकार बने और युवाओं के बारे में सोंचे। - बृजपाल, नवादा महेश
वोट डालते समय अच्छी सरकार बनाने का संकल्प के साथ मतदान करें। ऐसी सरकार का चुनाव करेंगे। जो युवाओं के रोजगार के बारे में सोचे। भविष्य में सुधार हो सके। परिवार को भी अच्छी सरकार बनाने के संकल्प के साथ वोट करने के लिए प्रेरित करें। - शिवकिशोर, नवादा महेश
महंगाई पर लगाए लगाम, ऐसी सरकार का करेंगे चुनाव
पीलीभीत। महंगाई महिलाओं को आहत करती है। एक बार फिर कोरोना काल से रोजगार प्रभावित है और उपलब्ध साधन संसाधन में रसोई चलाने की चुनौती उनके सामने है। विधानसभा चुनाव को लेकर जब चर्चा की गई तो अधिकतर महिलाओं ने कहा कि बेशक वे महंगाई से पीड़ित हैं लेकिन मतदान करते वक्त कई और बातें भी सोचनी पड़ती है। महिलाओं ने कहा कि उन्हें ऐसी सरकार चाहिए तो सुरक्षा और सम्मान के साथ महंगाई को लगाम लगाए।
ऐसा विधायक चुनेंगे जो विकास के साथ उच्च शिक्षा का ध्यान दे। प्रदेश को उन्नति की ओर ले जाए। ऐसी ही सरकार बनाएंगे। -वैष्नवी, बरखेड़ा
विधानसभा चुनाव में पहली बार मतदान करेंगे। हमारा विधायक ऐसा होना चाहिए। जो शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम कर सके। कस्बे में कोई इंटर कॉलेज नहीं है। दूर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। -नाजमी खान, न्यूरिया
सड़कों पर भटक रहे बेरोजगारों को नौकरी देने का काम करे। पढ़े लिखे बच्चे मजदूरी कर रहे हैं। इससे परिवार को भी काफी दिक्कत होती है। वोट करते समय यही सोचकर मतदान करेंगे। - गीता देवी, बरखेड़ा
कोई भी सरकार आए, मगर गरीबों की ओर कोई ध्यान देने वाला नहीं है। हमेशा अच्छी सरकार बने। यही सोच कर मतदान करने जाएंगे।
- हरदेई, बरखेड़ा
विधायक ऐसा होना चाहिए जो महिला के हित लिए कार्य करें। विधवा पेंशन, स्वास्थ आदि की समस्याओं का समाधान करें। सरकार की योजनाओं को पहुंचाए।
ऐसे उम्मीदवार को वोट करेंगे। जो महिलाओं के लिए लाभकारी योजनाएं बनवाए। समय-समय पर कैंप लगाकर महिलाओं की समस्या को सुनकर उनके समाधान के लिए कार्य करें। तमाम ऐसी महिलाएं हैं जो आज भी मूलभूत समस्याओं से ग्रस्त है - महबुवन बेगम, न्यूरिया

विधानसभा के प्रमुख पांच यह है मुद्दे
- गन्ना किसानों की बजाज हिंदुस्थान पर करोड़ों रुपये का गन्ना भुगतान शेष
- उच्च शिक्षा की व्यवस्था नहीं होने से विद्यार्थियों को दिक्कत
- परिवहन व्यवस्था पूरी तरह चौपट, सड़कें भी खस्ताहाल
- बरखेड़ा- गजरौला मार्ग पर रेलवे क्रांसिंग बद होने पर लगने वाला जाम
- स्वास्थ्य विभाग ने पीएचसी को सीएचसी में तो बदल दिया, मगर स्टाफ की तैनात नहीं
विधानसभा में मतदाता
कुल मतदाता: 323178
पुरुष: 171908
महिला: 151262
अन्य: 08
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जातिगत मतदाता
लोध, किसान 1,10,000
मुस्लिम 48,000
अनुसूचित जाति 35000
सिख 15000
बंगाली 17000
मौर्य 20000
ब्राह्मण-8000
यादव- 5,000
कश्यप-8,000
कायस्थ-5,000
अन्य- 50,000
(नोट- जातिगत आंकड़े लगभग में हैं।)
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इस बाक्स का इस्तेमाल न करें।
भगवाधारी नेता पर लगी हैं लोगों की निगाहें
खुद को भाजपा का कट्टर पंथी बताने वाले एक भगवाधारी आए नेता जी भी इस सीट पर हैं जो टिकट न मिलने पर भड़क उठते हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में जब इन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दिया, तो भड़क गए और रालोद से टिकट लेकर चुनाव मैदान में उतर गए। हालांकि चुवानी दंगल में दूसरे पायदान पर रहे। बाद में फिर भाजपा का दामन थाम लिया। जिला पंचायत चुनाव में सदस्य पद का चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद जब पार्टी ने अध्यक्ष पद का टिकट दूसरे को दे दिया, तो फिर नेता जी की गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सपा का दामन थाम लिया। अध्यक्ष पद के लिए सपा से नामांकन भी कर दिया। सूत्रों के मुताबिक 2022 के चुनाव के लिए जब पिछले उनसे टिकट दिलाने का वादा किया गया था, तब वह बैकफुट पर आ गए थे और जिला पंचायत अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी से नाम वापस ले लिया था। फिर भाजपा में शामिल हो गए थे। मात्र सात दिन के दल-बदल पर जब उनसे पूछा गया था कि सपा में क्यों गए? तब मीडिया से उन्होंने कहा था कि वह तो विपक्षी खेमे में एयर स्ट्राइक करने गए थे। सफल होकर लौटे हैं। अब इन नेता जी को टिकट मिलता है या नहीं? इनका पार्टी के प्रति क्या रुझान रहेगा? आने वाला समय ही तय करेगा।
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