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बेमौसम बारिश से किसान परेशान, आगे भी मौसम में उतार-चढ़ाव
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पीलीभीत। सर्दी वाले पौष और माघ माह में थोड़ी बरसात से गेहूं, सरसों और अन्य रबी फसलों को तो फायदा पहुंचता है, मगर इस बार बेमौसम बारिश कई गुना अधिक हो चुकी है। अब भी थमने का नाम नहीं ले रही है। इससे किसान परेशान हैं क्योंकि खेतों में गेहूं पका खड़ा है या फिर पकने की ओर है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने खेतों में पानी इकट्ठा न होने की सलाह किसानों को दी है।
शुक्रवार सुबह से ही बादल छाए रहे और तेज हवा के बीच बारिश भी हुई। दोपहर में हालांकि चटक धूप खिल गई, लेकिन शाम को एक बार फिर से हवा चली और बारिश शुरू हो गई। न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा के झोंकों ने खेतों में गेहूं की फसल बिछा दी है। बेमौसम बारिश से गेहूं के अलावा जौं, सरसों, मसूर, चना, आलू, पत्ता गोभी, मटर, टमाटर, फूल गोभी, अरबी जैसी सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा का कहना है कि भूमध्य सागर में उठे पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी बरकरार है। शनिवार को भी सुबह बादल छाए रहेंगे। दिन में धूप खिलेगी, लेकिन शाम को बूंदाबंदी या हल्की बारिश हो सकती है। 15 मार्च को भी बादल और बारिश के आसार बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में गेहूं समेत अन्य रबी फसलें पकी खड़ी हैं। अगर यही हाल रहा तो गेहूं में बड़ा नुकसान हो सकता है।
खेतों में भरा पानी तत्काल बाहर निकालें किसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. रनजीत सिंह का कहना है कि बीते दो महीने से कई बार रुक-रुककर बारिश हो चुकी है। पहले जब गेहूं की फसल में दाना आ रहा था तो बारिश इतनी नुकसानदायक नहीं थी, लेकिन अब फसल पक चुकी है या फिर पकने की ओर है। निचले खेतों में पानी भरने से गेहूं, सरसों समेत अन्य रबी फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह है कि वे अपने खेत में बारिश का पानी इकट्ठा न होने दें। खेत में पानी भरा होगा तो हवा चलने पर वह आसानी से गिर जाएगी। गन्ने की फसल अगर गिर जाए तो उसे तत्काल पताई से बांधकर सीधा करा दें। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार सरसों की फसल अगर पक गई है तो उसे किसान तत्काल काटकर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दें। जिस सरसों की कटाई नहीं हुई है उनकी पत्तियों में धब्बे, ब्लाइट और स्टैम ब्लाइट आने की आशंका है। सब्जी में मिर्च, बैगन और टमाटर में बीमारी लगने का खतरा है। इससे बचने के लिए किसान डाई एथेन-एम-45 नामक दवा ढाई ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से एक एकड़ में छिड़काव करें।
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गेहूं सरसों को ज्यादा नुकसान, गन्ना भी बिछ गया खेतों में
बीसलपुर। बीते दो दिन तेज हवा और बारिश से गेहूं, मसूर, मूंग, सरसों और लाही की फसलों को नुकसान हो गया। गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। गुरुवार की शाम और शुक्रवार सुबह तेज हवा चली। फिर बारिश हुई। इससे खेतों में खड़ी गेहूं, मसूर, मूंग, सरसों और लाही की फसलों को नुकसान पहुंचा। गेहूं खेतों में गिर गया। गन्ने की भी फसल जमीन पर गिरी है, लेकिन गन्ने को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। अखौली, अर्जुनपुर, बैरा, बौनी, उगनपुर, अमृता खास, अमरा करोड़ कासिमपुर, गजरौला, अहिरवहाड़ा, दुवहा, मंडरा सुमन, चुटकुना, मोहम्मदपुर और कंधरापुर आदि गांवो में गेहूं खेतों में चटाई की तरह बिछ गया। सुबह किसान खेतों पर गए तो उनके चेहरों की हवाइयां उड़ गई।
एक एकड़ के हमारे खेत में खड़ी गेहूं की फसल बिल्कुल गिर गई है, इसमें उनका काफी नुकसान हो गया। राजस्व विभाग से इतने नुकसान की भरपाई होना भी मुश्किल है। - विनोद कुमार, कृषक, गांव अखौली
चार बीघा सरसों चली गई
बारिश से चार बीघा सरसों की फसल खराब हो गई। कई साल बाद सरसों बोई थी। बहुत नुकसान हो गया। -सुखलाल, कृषक, गांव अर्जुनपुर
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शुक्रवार सुबह से ही बादल छाए रहे और तेज हवा के बीच बारिश भी हुई। दोपहर में हालांकि चटक धूप खिल गई, लेकिन शाम को एक बार फिर से हवा चली और बारिश शुरू हो गई। न्यूनतम तापमान 14 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 22 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा के झोंकों ने खेतों में गेहूं की फसल बिछा दी है। बेमौसम बारिश से गेहूं के अलावा जौं, सरसों, मसूर, चना, आलू, पत्ता गोभी, मटर, टमाटर, फूल गोभी, अरबी जैसी सब्जियों को भी नुकसान पहुंचा है। मौसम वैज्ञानिक डॉ. एचएस कुशवाहा का कहना है कि भूमध्य सागर में उठे पश्चिमी विक्षोभ का असर अभी बरकरार है। शनिवार को भी सुबह बादल छाए रहेंगे। दिन में धूप खिलेगी, लेकिन शाम को बूंदाबंदी या हल्की बारिश हो सकती है। 15 मार्च को भी बादल और बारिश के आसार बने हुए हैं। किसानों का कहना है कि खेतों में गेहूं समेत अन्य रबी फसलें पकी खड़ी हैं। अगर यही हाल रहा तो गेहूं में बड़ा नुकसान हो सकता है।
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खेतों में भरा पानी तत्काल बाहर निकालें किसान
कृषि विशेषज्ञ डॉ. रनजीत सिंह का कहना है कि बीते दो महीने से कई बार रुक-रुककर बारिश हो चुकी है। पहले जब गेहूं की फसल में दाना आ रहा था तो बारिश इतनी नुकसानदायक नहीं थी, लेकिन अब फसल पक चुकी है या फिर पकने की ओर है। निचले खेतों में पानी भरने से गेहूं, सरसों समेत अन्य रबी फसलों और सब्जियों को भारी नुकसान हो सकता है। किसानों को सलाह है कि वे अपने खेत में बारिश का पानी इकट्ठा न होने दें। खेत में पानी भरा होगा तो हवा चलने पर वह आसानी से गिर जाएगी। गन्ने की फसल अगर गिर जाए तो उसे तत्काल पताई से बांधकर सीधा करा दें। कृषि विशेषज्ञ के अनुसार सरसों की फसल अगर पक गई है तो उसे किसान तत्काल काटकर सुरक्षित जगह पर पहुंचा दें। जिस सरसों की कटाई नहीं हुई है उनकी पत्तियों में धब्बे, ब्लाइट और स्टैम ब्लाइट आने की आशंका है। सब्जी में मिर्च, बैगन और टमाटर में बीमारी लगने का खतरा है। इससे बचने के लिए किसान डाई एथेन-एम-45 नामक दवा ढाई ग्राम प्रति लीटर के हिसाब से एक एकड़ में छिड़काव करें।
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गेहूं सरसों को ज्यादा नुकसान, गन्ना भी बिछ गया खेतों में
बीसलपुर। बीते दो दिन तेज हवा और बारिश से गेहूं, मसूर, मूंग, सरसों और लाही की फसलों को नुकसान हो गया। गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। गुरुवार की शाम और शुक्रवार सुबह तेज हवा चली। फिर बारिश हुई। इससे खेतों में खड़ी गेहूं, मसूर, मूंग, सरसों और लाही की फसलों को नुकसान पहुंचा। गेहूं खेतों में गिर गया। गन्ने की भी फसल जमीन पर गिरी है, लेकिन गन्ने को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ। अखौली, अर्जुनपुर, बैरा, बौनी, उगनपुर, अमृता खास, अमरा करोड़ कासिमपुर, गजरौला, अहिरवहाड़ा, दुवहा, मंडरा सुमन, चुटकुना, मोहम्मदपुर और कंधरापुर आदि गांवो में गेहूं खेतों में चटाई की तरह बिछ गया। सुबह किसान खेतों पर गए तो उनके चेहरों की हवाइयां उड़ गई।
एक एकड़ के हमारे खेत में खड़ी गेहूं की फसल बिल्कुल गिर गई है, इसमें उनका काफी नुकसान हो गया। राजस्व विभाग से इतने नुकसान की भरपाई होना भी मुश्किल है। - विनोद कुमार, कृषक, गांव अखौली
चार बीघा सरसों चली गई
बारिश से चार बीघा सरसों की फसल खराब हो गई। कई साल बाद सरसों बोई थी। बहुत नुकसान हो गया। -सुखलाल, कृषक, गांव अर्जुनपुर