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पीटीआर से एक किलोमीटर दायरे में पक्के निर्माण पर रोक, 161 गांवों का होगा सर्वे
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विकास भवन में बैठक लेते अधिकारी। संवाद
- फोटो : PILIBHIT
पीलीभीत। पीलीभीत टाइगर रिजर्व (पीटीआर) से दो किलोमीटर दायरे में पक्के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। इस दायरे में आने वाले 161 गांवों में बने भवनों का सर्वे भी कराया जाएगा। इस एरिया को इको सेंसिटिव जोन बनाने की तैयारी है। दरअसल पिछले दिनों इको सेंसिटिव जोन के विस्तार को लेकर आदेेश जारी किए थे। जिसके बाद पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से सभी जिलों को आदेश जारी किए। पीलीभीत के एक बड़े क्षेत्रफल में वन क्षेत्र विकसित है।
टाइगर रिजर्व होने से अपने जिले पर भी फोकस है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वन विभाग और जिला प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है। गुरुवार को एडीएम न्यायिक सूरज यादव की अध्यक्षता में डीडी पीटीआर नवीन खंडेलवाल और सीडीओ धर्मेंद्र प्रताप सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इसमें ब्लॉक के अधिकारियों को भी बुलाया गया। पीटीआर से एक किलोमीटर के दायरे में 161 गांव आ रहे हैं।
इसके अलावा इस परिधि में तमाम पक्के निर्माण हैं। बैठक में अफसरों ने कहा कि जंगल के एक किलोमीटर दायरे में पर्यावरण मंत्रालय के अगले आदेश तक न तो कोई नया निर्माण होगा न ही कोई नई इंडस्ट्री या नई गतिविधि होगी। इन गांवों में कितने भवन हैं, होटल, दुकानें या अन्य भवन हैं उनकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए टीमें गठित की जाएंगी। रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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करीब दस किलोमीटर क्षेत्र में बने हैं पक्के निर्माण
जंगल से सटे करीब दस किलोमीटर एरिया में पक्के निर्माण हैं। जंगल से इनकी दूरी करीब एक से दो किलोमीटर तक है। इको सेंसिटिव जोन बनने से गांवों में भी लोग निर्माण नहीं कर सकेंगे। अधिकारियों ने वन विभाग और ब्लॉक के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी 161 गांवों के साथ अन्य भवनों का भी रिकॉर्ड तैयार करें। मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
‘पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से निर्देश मिले हैं कि जंगल से एक किलोमीटर तक दायरे में बने पक्के भवनों का सर्वे किया जाए। नए निर्माण नहीं किए जाएंगे। जंगल से लगा एक किलोमीटर का दायरा इको सेंसिटिव जोन होगा। सर्वे कराकर रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।’ - नवीन खंडेलवाल, उप निदेशक पीटीआर
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टाइगर रिजर्व होने से अपने जिले पर भी फोकस है। वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने वन विभाग और जिला प्रशासन से पूरी रिपोर्ट तलब की है। गुरुवार को एडीएम न्यायिक सूरज यादव की अध्यक्षता में डीडी पीटीआर नवीन खंडेलवाल और सीडीओ धर्मेंद्र प्रताप सिंह की मौजूदगी में बैठक हुई। इसमें ब्लॉक के अधिकारियों को भी बुलाया गया। पीटीआर से एक किलोमीटर के दायरे में 161 गांव आ रहे हैं।
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इसके अलावा इस परिधि में तमाम पक्के निर्माण हैं। बैठक में अफसरों ने कहा कि जंगल के एक किलोमीटर दायरे में पर्यावरण मंत्रालय के अगले आदेश तक न तो कोई नया निर्माण होगा न ही कोई नई इंडस्ट्री या नई गतिविधि होगी। इन गांवों में कितने भवन हैं, होटल, दुकानें या अन्य भवन हैं उनकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए टीमें गठित की जाएंगी। रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।
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करीब दस किलोमीटर क्षेत्र में बने हैं पक्के निर्माण
जंगल से सटे करीब दस किलोमीटर एरिया में पक्के निर्माण हैं। जंगल से इनकी दूरी करीब एक से दो किलोमीटर तक है। इको सेंसिटिव जोन बनने से गांवों में भी लोग निर्माण नहीं कर सकेंगे। अधिकारियों ने वन विभाग और ब्लॉक के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी 161 गांवों के साथ अन्य भवनों का भी रिकॉर्ड तैयार करें। मंत्रालय को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
‘पर्यावरण मंत्रालय की तरफ से निर्देश मिले हैं कि जंगल से एक किलोमीटर तक दायरे में बने पक्के भवनों का सर्वे किया जाए। नए निर्माण नहीं किए जाएंगे। जंगल से लगा एक किलोमीटर का दायरा इको सेंसिटिव जोन होगा। सर्वे कराकर रिपोर्ट मंत्रालय को भेजी जाएगी।’ - नवीन खंडेलवाल, उप निदेशक पीटीआर