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बालटाल से आंखों देखी.. देखते ही देखते बह गए टेंट
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पीलीभीत। अमरनाथ यात्रा में आंखों के सामने मची तबाही के उस खौफनाक मंजर ने सभी का दिल दहला दिया है। पत्थरों से कुचलकर मौत और तेज बहाव में लोगों को बहता देखकर तीर्थयात्री सुधबुध खो बैठे थे। बरखेड़ा से अमरनाथ यात्रा पर गए 23 लोगों के जत्थे में अधिवक्ता सत्यप्रकाश पांडेय भी शामिल हैं। उन्होंने फोन पर वहां के हालात बयां किए।
सत्यप्रकाश ने बताया कि बाबा अमरनाथ गुफा से दर्शन कर निकले थे। समय करीब साढ़े चार बजे का था। हल्की बारिश हो रही थी। गुफा से करीब तीन सौ मीटर की दूसरी पर भंडारे में चाय पी और खीर खाई थी। इसी दौरान अचानक गुफा की ओर से पत्थर और मलबा आना शुरू हो गया।
इसके बाद पत्थरों के साथ पानी की मोटी धार आने लगी। दस मिनट में ही लोग बहने लगे थे। दस मिनट पहले उन्होंने जिस भंडारे में खीर खाई थी, वह भी देखते ही देखते बह गया। एक साथी भंडारे की तरफ गिरते-गिरते बचा। किसी तरह खुद को बचाते हुए वहां से निकले तो सामने देखा कि एक बड़े पत्थर से आर्मी जवान की कुचलकर मौत हो गई और बाद में एक महिला कुचल गई।
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बड़ी संख्या में लोग तेज बहाव में बहने लगे थे। चारों ओर बचाओ-बचाओ की चीखें गूंजने लगीं। सभी खुुद को बचाने में जुटे थे। किसी का सामान बहा तो कोई तेज बहाव में खुुद बह गया। उस समय गुफा के पास 20 से 25 हजार श्रद्धालु थे। भंडारे और टेंट पानी में बहने लगे। कुछ ही देर में भक्तिमय माहौल में चीखपुकार गूंजने लगी।
चारों ओर खौफनाक मंजर फैला था। आर्मी जवानों ने रेस्क्यू शुरू किया। कई आर्मी जवान भी तेज बहाव में बह गए। बचाव दल ने किसी तरह से रस्सी का घेरा बनाकर उन्हें गुफा से तीन किमी दूर पंजतरणी तक पहुंचाया। बाद में पैदल किसी तरह से शनिवार दोपहर में बालटाल पहुंचे।
यह लोग जत्थे में हैं शामिल
सत्यप्रकाश पांडेय, जितेंद्र सिंह चौहान, संजीव कुमार, अमित गुप्ता, मुकेश गुप्ता, अरविंद वर्मा, मुकेश कुमार, सुधाकर त्रिपाठी, नन्हेलाल वर्मा, अनिल वर्मा, सरोज वाजपेयी, इंद्रभूषण, गोपाल कश्यप, रामऔतार पांडेय, दीपक गुप्ता, सुशीला देवी, डॉ. महावीर सिंह, लक्ष्मी देवी, राजकमल राजन, अमित जौहरी, संतोष पांडेय, अनिल वर्मा, सचिन रस्तोगी शामिल रहे।
बालटाल और पंजतरणी में फंसे हैं लोग
किसी तरह से 20 किमी कर लंबा सफर तक यह नौ लोग बालटाल पहुंच गए है। जबकि अभी 12 लोग पंजतरणी में ही फंसे है। इनमें इंद्रभूषण का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वह पैदल चलने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए 12 लोगों का दल पंजतरणी में रुका हुआ है। दल के सभी सदस्य एकत्र होने के बाद वहां से निकलेंगे। इसके बाद घर की ओर प्रस्थान करेंगे।
तबाही के मंजर देख गुमसुम हैं कई लोग
आंखों देखी तबाही का खौफनाक मंजर लोगों के दिलों में बैठ गया है। बताया जा रहा है कि सभी लोग सुरक्षित तो हैं मगर गुमसुम भी हैं। एक-दूसरे को देख रहे हैं पर आपस में भी बात करने का मन नहीं हो रहा है। ईश्वर से सभी प्रार्थना कर रहे है कि सुरक्षित घर पहुंच जाएं।
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सत्यप्रकाश ने बताया कि बाबा अमरनाथ गुफा से दर्शन कर निकले थे। समय करीब साढ़े चार बजे का था। हल्की बारिश हो रही थी। गुफा से करीब तीन सौ मीटर की दूसरी पर भंडारे में चाय पी और खीर खाई थी। इसी दौरान अचानक गुफा की ओर से पत्थर और मलबा आना शुरू हो गया।
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इसके बाद पत्थरों के साथ पानी की मोटी धार आने लगी। दस मिनट में ही लोग बहने लगे थे। दस मिनट पहले उन्होंने जिस भंडारे में खीर खाई थी, वह भी देखते ही देखते बह गया। एक साथी भंडारे की तरफ गिरते-गिरते बचा। किसी तरह खुद को बचाते हुए वहां से निकले तो सामने देखा कि एक बड़े पत्थर से आर्मी जवान की कुचलकर मौत हो गई और बाद में एक महिला कुचल गई।
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बड़ी संख्या में लोग तेज बहाव में बहने लगे थे। चारों ओर बचाओ-बचाओ की चीखें गूंजने लगीं। सभी खुुद को बचाने में जुटे थे। किसी का सामान बहा तो कोई तेज बहाव में खुुद बह गया। उस समय गुफा के पास 20 से 25 हजार श्रद्धालु थे। भंडारे और टेंट पानी में बहने लगे। कुछ ही देर में भक्तिमय माहौल में चीखपुकार गूंजने लगी।
चारों ओर खौफनाक मंजर फैला था। आर्मी जवानों ने रेस्क्यू शुरू किया। कई आर्मी जवान भी तेज बहाव में बह गए। बचाव दल ने किसी तरह से रस्सी का घेरा बनाकर उन्हें गुफा से तीन किमी दूर पंजतरणी तक पहुंचाया। बाद में पैदल किसी तरह से शनिवार दोपहर में बालटाल पहुंचे।
यह लोग जत्थे में हैं शामिल
सत्यप्रकाश पांडेय, जितेंद्र सिंह चौहान, संजीव कुमार, अमित गुप्ता, मुकेश गुप्ता, अरविंद वर्मा, मुकेश कुमार, सुधाकर त्रिपाठी, नन्हेलाल वर्मा, अनिल वर्मा, सरोज वाजपेयी, इंद्रभूषण, गोपाल कश्यप, रामऔतार पांडेय, दीपक गुप्ता, सुशीला देवी, डॉ. महावीर सिंह, लक्ष्मी देवी, राजकमल राजन, अमित जौहरी, संतोष पांडेय, अनिल वर्मा, सचिन रस्तोगी शामिल रहे।
बालटाल और पंजतरणी में फंसे हैं लोग
किसी तरह से 20 किमी कर लंबा सफर तक यह नौ लोग बालटाल पहुंच गए है। जबकि अभी 12 लोग पंजतरणी में ही फंसे है। इनमें इंद्रभूषण का स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण वह पैदल चलने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए 12 लोगों का दल पंजतरणी में रुका हुआ है। दल के सभी सदस्य एकत्र होने के बाद वहां से निकलेंगे। इसके बाद घर की ओर प्रस्थान करेंगे।
तबाही के मंजर देख गुमसुम हैं कई लोग
आंखों देखी तबाही का खौफनाक मंजर लोगों के दिलों में बैठ गया है। बताया जा रहा है कि सभी लोग सुरक्षित तो हैं मगर गुमसुम भी हैं। एक-दूसरे को देख रहे हैं पर आपस में भी बात करने का मन नहीं हो रहा है। ईश्वर से सभी प्रार्थना कर रहे है कि सुरक्षित घर पहुंच जाएं।