{"_id":"5e5ff80e8ebc3eeacd24122c","slug":"baagh-pilibhit-news-bly398425076","type":"story","status":"publish","title_hn":"दियोरिया के जंगल में तीन बाघों के आने से पूरनपुर रोड का यातायात रुका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दियोरिया के जंगल में तीन बाघों के आने से पूरनपुर रोड का यातायात रुका
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बीसलपुर। दियोरिया जंगल में तीन बाघ सड़क पर आ जाने से पूरनपुर रोड का यातायात थम गया। दोनों ओर से वाहनों की लंबी लाइन लग गई। राहगीर दहशत में रहे। जब बाघ चले गए, तब जाकर जाम खुला।
वन दरोगा राधेश्याम भारती ने बताया कि जंगल में पिछले एक पखवाड़े से तीन बाघ बाहर से आ गए हैं। वह अक्सर रास्ते में आकर खड़े हो जाते हैं। कभी-कभी देर तक खड़े रहते हैं। बुधवार को भी बाघ रास्ते के नजदीक आ गए। इससे पूरनपुर मार्ग का यातायात रुक गया। बाघों के डर से राहगीर भी नहीं गुजरे। जब बाघ चले गए, तब राहगीर वहां से निकले, लेकिन उसके बाद भी उनमें दहशत बरकरार रही। वन दरोगा ने बताया कि बाघों के आने से पहले जहां पूरनपुर रोड से दिन में 500 से अधिक राहगीर गुजरते थे। वहीं अब बमुश्किल से 50 भी नहीं गुजरते। बाघों के डर से वाहन या पैदल यात्री लंबा चक्कर लगाकर रामनगर और जराकोठी होते हुए पूरनपुर आते जाते हैं।
लेखपालों में दहशत
बीसलपुर क्षेत्र के 20 से अधिक लेखपाल रोजाना दियोरिया जंगल से होते हुए पूरनपुर तहसील जाते थे। लगभग इतने ही लेखपाल रोजाना पूरनपुर से दियोरिया के जंगल होते हुए बीसलपुर तहसील में आते थे। अब ये सभी लेखपाल रामनगर और जराकोठी होते हुए आते जाते हैं। इनका कहना है कि वन विभाग ने बाघों से बचाव के इंतजाम नहीं किए। इसलिए उनको घूमकर जाना पड़ता है।
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वन दरोगा राधेश्याम भारती ने बताया कि जंगल में पिछले एक पखवाड़े से तीन बाघ बाहर से आ गए हैं। वह अक्सर रास्ते में आकर खड़े हो जाते हैं। कभी-कभी देर तक खड़े रहते हैं। बुधवार को भी बाघ रास्ते के नजदीक आ गए। इससे पूरनपुर मार्ग का यातायात रुक गया। बाघों के डर से राहगीर भी नहीं गुजरे। जब बाघ चले गए, तब राहगीर वहां से निकले, लेकिन उसके बाद भी उनमें दहशत बरकरार रही। वन दरोगा ने बताया कि बाघों के आने से पहले जहां पूरनपुर रोड से दिन में 500 से अधिक राहगीर गुजरते थे। वहीं अब बमुश्किल से 50 भी नहीं गुजरते। बाघों के डर से वाहन या पैदल यात्री लंबा चक्कर लगाकर रामनगर और जराकोठी होते हुए पूरनपुर आते जाते हैं।
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लेखपालों में दहशत
बीसलपुर क्षेत्र के 20 से अधिक लेखपाल रोजाना दियोरिया जंगल से होते हुए पूरनपुर तहसील जाते थे। लगभग इतने ही लेखपाल रोजाना पूरनपुर से दियोरिया के जंगल होते हुए बीसलपुर तहसील में आते थे। अब ये सभी लेखपाल रामनगर और जराकोठी होते हुए आते जाते हैं। इनका कहना है कि वन विभाग ने बाघों से बचाव के इंतजाम नहीं किए। इसलिए उनको घूमकर जाना पड़ता है।
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