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Pilibhit News: तीन दिन बाद बाघ ने बदला अपना ठिकाना, निगरानी में जुटी टीम
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कलीनगर। सपहा गांव की सीमा में तीन दिन से डेरा जमाए बाघ ने शुक्रवार देर शाम ठिकाना बदल दिया। शनिवार को निगरानी में जुटी टीम ने दावा किया कि बाघ गांव से पश्चिम की दिशा में गन्ने की खेत की ओर आया है। हालांकि यहां मौजूदगी देखने को नहीं मिली। ग्रामीणों का कहना है बाघ क्षेत्र में ही घूम रहा है, विभाग सिर्फ औपचारिकताएं निभाने में जुटा है।
कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत जंगल से बाहर बाघों का खेतों में घूमना आम बात हो गया है। छह माह पूर्व से स्थिति अधिक खराब हुई। तीन दिन से बाघ क्षेत्र के गांव सपहा में स्थित श्मशान की झाड़ियों में डेरा जमाए रहा। देर शाम झाड़ियों से निकलकर गन्ने में छिपने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने पटाखे दागे थे। रात होते ही बाघ गन्ने के खेत से निकलकर आगे की ओर भाग गया।
शनिवार को क्षेत्रीय वनकर्मियों ने बाघ की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू की। दावा किया जा रहा है कि गांव की पश्चिम दिशा में एक गन्ने के खेत तक बाघ के पैरों के निशान मिले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ गांव की सीमा में ही डेरा जमाए है, जो लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि टीम को लगातार निगरानी के लिए लगाया गया है।
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बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे ग्रामीण
सपहा, भैरों कला गांव आसपास हैं। बाघ की लगातार मौजूदगी से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी के डर से बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चों को खेतों के बीच से रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है।
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कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत जंगल से बाहर बाघों का खेतों में घूमना आम बात हो गया है। छह माह पूर्व से स्थिति अधिक खराब हुई। तीन दिन से बाघ क्षेत्र के गांव सपहा में स्थित श्मशान की झाड़ियों में डेरा जमाए रहा। देर शाम झाड़ियों से निकलकर गन्ने में छिपने के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने पटाखे दागे थे। रात होते ही बाघ गन्ने के खेत से निकलकर आगे की ओर भाग गया।
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शनिवार को क्षेत्रीय वनकर्मियों ने बाघ की लोकेशन ट्रेस करनी शुरू की। दावा किया जा रहा है कि गांव की पश्चिम दिशा में एक गन्ने के खेत तक बाघ के पैरों के निशान मिले हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाघ गांव की सीमा में ही डेरा जमाए है, जो लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। रेंजर पीयूष मोहन श्रीवास्तव ने बताया कि टीम को लगातार निगरानी के लिए लगाया गया है।
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बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे ग्रामीण
सपहा, भैरों कला गांव आसपास हैं। बाघ की लगातार मौजूदगी से क्षेत्र में दहशत का माहौल है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि बाघ की मौजूदगी के डर से बच्चों को स्कूल नहीं भेज रहे हैं। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चों को खेतों के बीच से रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है।