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दूसरे दिन भी जिला अस्पताल में बिजली संकट बरकरार
Updated Sat, 30 Jun 2018 12:04 AM IST
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दूसरे दिन भी जिला अस्पताल में बिजली संकट बरकरार
क्रासर...
जनरेटर चला नहीं, गर्मी से तिलमिलाए डॉक्टर व मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। लगातार दूसरे दिन भी जिला अस्पताल में बिजली का संकट बरकरार रहा। दिन भर आंखमिचौली का खेल चलता रहा और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा मरीजों उनके तीमारदारों व ओपीडी में बैठे डॉक्टरों को उठाना पड़ा। बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था भी अस्पताल प्रशासन का साथ नहीं दे सकी। पंखे बंद थे, हर कोई गर्मी से बेहाल दिखा।
बृहस्पतिवार सुबह से जिला अस्पताल में बिजली का संकट बरकरार है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो बिजली लाइन में तकनीकी फाल्ट आने की वजह से लाइट गुल हो गई थी, मरीजों के सामने कोई समस्या खड़ी नहीं हो जाए इसको लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई। अफसरों के यह सभी दावे दूसरे दिन गलत साबित होते दिखे। शुक्रवार सुबह से अस्पताल में बिजली का आंखमिचौली का खेल जारी रहा। इन दिनों भीषण गर्मी के चलते अस्पताल में रोज एक हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, इनको देखने की जिम्मेदारी भी चंद डॉक्टरों पर है। वह भी बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं। आलम यह कि सुबह आठ बजे डॉक्टरों के ओपीडी में पहुंचते ही मरीजों की भीड़ टूट पड़ती है, ऐसे में बिजली नहीं आने पर सभी पसीने से तरबतर दिखाई देते हैं। इस तरह बृहस्पतिवार सुबह कई घंटे बिजली गुल रहने के बाद भी किसी ने जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं समझी, ठीक उसी तरह शुक्रवार को भी अस्पताल में बिजली को लेकर हाहाकार मचा रहा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मानें तो सुबह अस्पताल पहुंचने के बाद से बिजली के आने जाने का सिलसिला जारी है। सुबह 10 बजे के बाद स्थिति और बेकाबू होने लगती है जब ओपीडी में बैठे डॉक्टरों के कक्ष में मरीजों की लंबी लाइन लगी होती है और सभी पसीने से तरबतर दिखाई देते हैं। गर्मी से तिलमिला रहे मरीजों उनके तीमारदारों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी हाथ वाले पंखे का सहारा लेना पड़ा। इस मामले में सीएमएस डॉ. रतनपाल सिंह सुमन का कहना है कि बिजली लाइन में आए फाल्ट को ठीक कराया जा रहा है। शाम तक व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी।
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दूसरे दिन भी जिला अस्पताल में बिजली संकट बरकरार
क्रासर...
जनरेटर चला नहीं, गर्मी से तिलमिलाए डॉक्टर व मरीज
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। लगातार दूसरे दिन भी जिला अस्पताल में बिजली का संकट बरकरार रहा। दिन भर आंखमिचौली का खेल चलता रहा और अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा मरीजों उनके तीमारदारों व ओपीडी में बैठे डॉक्टरों को उठाना पड़ा। बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था भी अस्पताल प्रशासन का साथ नहीं दे सकी। पंखे बंद थे, हर कोई गर्मी से बेहाल दिखा।
बृहस्पतिवार सुबह से जिला अस्पताल में बिजली का संकट बरकरार है। अस्पताल प्रशासन की मानें तो बिजली लाइन में तकनीकी फाल्ट आने की वजह से लाइट गुल हो गई थी, मरीजों के सामने कोई समस्या खड़ी नहीं हो जाए इसको लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की गई। अफसरों के यह सभी दावे दूसरे दिन गलत साबित होते दिखे। शुक्रवार सुबह से अस्पताल में बिजली का आंखमिचौली का खेल जारी रहा। इन दिनों भीषण गर्मी के चलते अस्पताल में रोज एक हजार से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं, इनको देखने की जिम्मेदारी भी चंद डॉक्टरों पर है। वह भी बिजली की समस्या से जूझ रहे हैं। आलम यह कि सुबह आठ बजे डॉक्टरों के ओपीडी में पहुंचते ही मरीजों की भीड़ टूट पड़ती है, ऐसे में बिजली नहीं आने पर सभी पसीने से तरबतर दिखाई देते हैं। इस तरह बृहस्पतिवार सुबह कई घंटे बिजली गुल रहने के बाद भी किसी ने जनरेटर चलाने की जरूरत नहीं समझी, ठीक उसी तरह शुक्रवार को भी अस्पताल में बिजली को लेकर हाहाकार मचा रहा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों की मानें तो सुबह अस्पताल पहुंचने के बाद से बिजली के आने जाने का सिलसिला जारी है। सुबह 10 बजे के बाद स्थिति और बेकाबू होने लगती है जब ओपीडी में बैठे डॉक्टरों के कक्ष में मरीजों की लंबी लाइन लगी होती है और सभी पसीने से तरबतर दिखाई देते हैं। गर्मी से तिलमिला रहे मरीजों उनके तीमारदारों के साथ-साथ डॉक्टरों को भी हाथ वाले पंखे का सहारा लेना पड़ा। इस मामले में सीएमएस डॉ. रतनपाल सिंह सुमन का कहना है कि बिजली लाइन में आए फाल्ट को ठीक कराया जा रहा है। शाम तक व्यवस्था दुरुस्त हो जाएगी।
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