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धूमधाम से मना रक्षाबंधन का पवित्र त्यौहार, भाइयों ने दिया बहनों को रक्षा का वचन
Updated Mon, 27 Aug 2018 01:08 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार धूमधाम से मनाया गया। बहनों ने हल्दी, चावल से तिलक लगाकर भाइयों को राखी बांधी और भाइयों ने जीवन भर बहन की रक्षा करने का वादा किया। साथ ही बहनों को उपहार और नगद धनराशि भेंट की।
रक्षाबंधन के मद्देनजर सुबह से ही मिठाई विक्रेताओं ने टेंट लगाकर दुकान सजा रखी थी, वहीं राखी विक्रेता दुकानदार भी जगह-जगह स्टाल लगाए हुए थे। हालांकि इस दौरान घटिया और मिलावटी खोये से बनी मिठाइयों की भी बिक्री की गई।
हिंदू मुस्लिम एकता का त्योहार है राखी
हिंदू मुस्लिम एकता मंच ने सामाजिक रिश्ते के सबसे बड़े त्यौहार रक्षाबंधन को राष्ट्रीय त्योहार घोषित करने की मांग की है। क्षेत्र के ग्राम रटौल निवासी प्रधान जाकिर खान ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व इंसानियत के रिश्ते पर आधारित है जो सामाजिक रिश्ते मजबूत करता है। उन्होंने बताया 15वीं शताब्दी में महारानी कर्मावती ने मुगल राजा हुमायूं को कच्चा धागा बांधकर रिश्ते की शुरूआत की थी। हुमायूं ने मुसलमान होने के बावजूद राखी की लाज रखी थी। ऐसे त्यौहार को राष्ट्रीय त्यौहार घोषित करने से देश की धर्म निरपेक्षता और एकता मजबूत होगी।
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मंदिरों में की गई विशेष पूजा-अर्चना
रक्षाबंधन पर नगर क्षेत्र के मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना हुई। बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज की शिष्या गुरू मां दृष्टि भूषण माता जी के सानिध्य में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया। स्याद्वाद गुरुकुल के बच्चों को अमीनगर सराय से आई शिक्षिका अनीता जैन ने रक्षा सूत्र बांधे। माता जी ने कहा कि यह त्योहार हमें परिवार के प्रति दायित्वों का बोझ कराता है। इस दौरान नवीन भैया, निजानंद, सुनीता दीदी, रेखा दीदी, रंजना दीदी आदि मौजूद रहे।
बच्चों ने वृक्षों पर राखी बांधकर लिया पर्यावरण का संकल्प
रक्षाबंधन पर बच्चों ने सैकड़ों वृक्षों में राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। उन्होंने संदेश दिया कि वृक्षों के काटने से जहां प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है वहीं यह कानूनन अपराध है। वृक्षों को लगाने से न केवल वातावरण शुद्ध होता है बल्कि जलवायु भी नियंत्रित होती है। बच्चों ने लोगों से अपील की कि वह वृक्ष काटने की जगह पौधरोपण करे जिससे धराहरी भरी हो।
त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दी में बहाया पसीना
रक्षाबंधन के त्यौहार पर घर पहुंचने की जल्दी में लोगों को खासा पसीना बहाना पड़ा। डग्गामार वाहन, बसें और ट्रेनें सभी खचाखच भरी थी, जिससे लोगों को आवागमन में मुसीबत का सामना करना पड़ा। त्योहार के चलते जहां बहनों को भाई के घर पहुंचने की जल्दी थी तो दूरदराज क्षेत्रों में कमाने-खाने वालों को परिजनों के साथ पर्व मनाने के लिए जल्द से जल्द घर पहुंचने का उतावलापन दिख रहा था, जिसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों व अन्य यात्री वाहनों के स्टैंडों पर भीड़ ही भीड़ नजर आ रही थी। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं के लिए थी।
युवकों ने पतंगबाजी की
बादलों की आवाजाही के बीच आसमान में लहराती पतंगे, घरों की छतों से डीजे की धुनों पर थिरकते युवा, पतंगों को काटने के बाद वो काटा की गूंज से गुंजायमान होता माहौल। जोश, उत्साह और उमंग का कुछ ऐसा ही नजारा रक्षाबंधन के मौके पर शहर के भीतरी इलाके में देखने को मिला। नगर में रक्षाबंधन पर्व पर पतंग उड़ाने का रिवाज है। सुबह से ही आसमान में पतंग नजर आने लगी। युवा हाथों में चरखी और पतंगें लेकर छतों पर चढ़ गए। सुबह से ही बादलों की आंख.मिचौनी के बीच नौजवानों की टोलियां पतंग उड़ाती नजर आईं।
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रक्षाबंधन के मद्देनजर सुबह से ही मिठाई विक्रेताओं ने टेंट लगाकर दुकान सजा रखी थी, वहीं राखी विक्रेता दुकानदार भी जगह-जगह स्टाल लगाए हुए थे। हालांकि इस दौरान घटिया और मिलावटी खोये से बनी मिठाइयों की भी बिक्री की गई।
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हिंदू मुस्लिम एकता का त्योहार है राखी
हिंदू मुस्लिम एकता मंच ने सामाजिक रिश्ते के सबसे बड़े त्यौहार रक्षाबंधन को राष्ट्रीय त्योहार घोषित करने की मांग की है। क्षेत्र के ग्राम रटौल निवासी प्रधान जाकिर खान ने कहा कि रक्षाबंधन पर्व इंसानियत के रिश्ते पर आधारित है जो सामाजिक रिश्ते मजबूत करता है। उन्होंने बताया 15वीं शताब्दी में महारानी कर्मावती ने मुगल राजा हुमायूं को कच्चा धागा बांधकर रिश्ते की शुरूआत की थी। हुमायूं ने मुसलमान होने के बावजूद राखी की लाज रखी थी। ऐसे त्यौहार को राष्ट्रीय त्यौहार घोषित करने से देश की धर्म निरपेक्षता और एकता मजबूत होगी।
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मंदिरों में की गई विशेष पूजा-अर्चना
रक्षाबंधन पर नगर क्षेत्र के मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना हुई। बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में आचार्य श्री विद्याभूषण सन्मति सागर जी महाराज की शिष्या गुरू मां दृष्टि भूषण माता जी के सानिध्य में रक्षाबंधन का त्योहार मनाया गया। स्याद्वाद गुरुकुल के बच्चों को अमीनगर सराय से आई शिक्षिका अनीता जैन ने रक्षा सूत्र बांधे। माता जी ने कहा कि यह त्योहार हमें परिवार के प्रति दायित्वों का बोझ कराता है। इस दौरान नवीन भैया, निजानंद, सुनीता दीदी, रेखा दीदी, रंजना दीदी आदि मौजूद रहे।
बच्चों ने वृक्षों पर राखी बांधकर लिया पर्यावरण का संकल्प
रक्षाबंधन पर बच्चों ने सैकड़ों वृक्षों में राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। उन्होंने संदेश दिया कि वृक्षों के काटने से जहां प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है वहीं यह कानूनन अपराध है। वृक्षों को लगाने से न केवल वातावरण शुद्ध होता है बल्कि जलवायु भी नियंत्रित होती है। बच्चों ने लोगों से अपील की कि वह वृक्ष काटने की जगह पौधरोपण करे जिससे धराहरी भरी हो।
त्योहार पर घर पहुंचने की जल्दी में बहाया पसीना
रक्षाबंधन के त्यौहार पर घर पहुंचने की जल्दी में लोगों को खासा पसीना बहाना पड़ा। डग्गामार वाहन, बसें और ट्रेनें सभी खचाखच भरी थी, जिससे लोगों को आवागमन में मुसीबत का सामना करना पड़ा। त्योहार के चलते जहां बहनों को भाई के घर पहुंचने की जल्दी थी तो दूरदराज क्षेत्रों में कमाने-खाने वालों को परिजनों के साथ पर्व मनाने के लिए जल्द से जल्द घर पहुंचने का उतावलापन दिख रहा था, जिसके चलते रेलवे स्टेशनों, बस स्टेशनों व अन्य यात्री वाहनों के स्टैंडों पर भीड़ ही भीड़ नजर आ रही थी। सबसे ज्यादा दिक्कत महिलाओं के लिए थी।
युवकों ने पतंगबाजी की
बादलों की आवाजाही के बीच आसमान में लहराती पतंगे, घरों की छतों से डीजे की धुनों पर थिरकते युवा, पतंगों को काटने के बाद वो काटा की गूंज से गुंजायमान होता माहौल। जोश, उत्साह और उमंग का कुछ ऐसा ही नजारा रक्षाबंधन के मौके पर शहर के भीतरी इलाके में देखने को मिला। नगर में रक्षाबंधन पर्व पर पतंग उड़ाने का रिवाज है। सुबह से ही आसमान में पतंग नजर आने लगी। युवा हाथों में चरखी और पतंगें लेकर छतों पर चढ़ गए। सुबह से ही बादलों की आंख.मिचौनी के बीच नौजवानों की टोलियां पतंग उड़ाती नजर आईं।