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मंदिर मस्जिदों व गुरूद्वारों से कराया गया ऐलान
Updated Wed, 09 Aug 2017 06:19 PM IST
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परेवावैश्य/पीलीभीत। क्षेत्र के दो गांव में 24 घंटे के अंदर दो लोगों की मौत होने से क्षेत्र के लोग भयभीत हैं। इसके चलते मंगलवार की रात लोगों ने दूसरे के घरों अथवा छतों पर गुजारी। कई जगह से बाघ दिखने की सूचनाएं आने पर मंदिरों, मस्जिदों व गुरुद्वारों से भी एलर्ट रहने और घरों से अकेेले न निकलने का ऐलान किया गया।
सोमवार और मंगलवार को बाघ ने लगातार हमले कर गांव डांग निवासी तसलीम अहमद और गांव सरैदापट्टी निवासी शमशुल रहमान मलिक को मार डाला था। मंगलवार को बाघ को पकड़ने की मांग कर ग्रामीणों ने जमा लगाने का भी प्रयास किया लेकिन समझाबुझाकर शांत करा दिया। शव उठने के बाद लोगों को घर जाने लगे। इस दौरान अलग अलग क्षेत्रों से बाघ दिखने की सूचनाएं आने लगी। दहशत को देखते हुए लदपुरा, सिरसी, हरहरपुर हसन, चका, अड़ौली, भूरकोनी, पस्तौर, सेमरखेड़ा सहित तमाम गांव के मंदिरों व मस्जिदों से ऐलान किया गया। इसमें क्षेत्रवासियों से एलर्ट रहने, रात को घरों से न निकलने, खेतों पर अकेले न जाने की अपील की गई। इसके बाद कई ऐसे परिवार जिनके घरों में दरवाजे नहीं उन्होंने पड़ोसियों के घर शरण ली जबकि सड़क किनारे रहने वाले कई परिवारों ने छतों पर रात गुजारी। दहशत के चलते कई लोगों ने तो पूरी रात जागकर काटी और जागते रहो की आवाजें सुनाई देती रहीं। वहीं घटना स्थल से लगभग दो किमी दूर स्थित पौटाडाम पर टेंट में ह रहे मछली ठेकेदार एवं उसके स्टाफ ने गांव से बस मंगवाकर उसकी छत पर रात गुजारी। इसके लिए उन्होंने अपने तख्त भी बस की छतों पर ही रख लिए।
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सोमवार और मंगलवार को बाघ ने लगातार हमले कर गांव डांग निवासी तसलीम अहमद और गांव सरैदापट्टी निवासी शमशुल रहमान मलिक को मार डाला था। मंगलवार को बाघ को पकड़ने की मांग कर ग्रामीणों ने जमा लगाने का भी प्रयास किया लेकिन समझाबुझाकर शांत करा दिया। शव उठने के बाद लोगों को घर जाने लगे। इस दौरान अलग अलग क्षेत्रों से बाघ दिखने की सूचनाएं आने लगी। दहशत को देखते हुए लदपुरा, सिरसी, हरहरपुर हसन, चका, अड़ौली, भूरकोनी, पस्तौर, सेमरखेड़ा सहित तमाम गांव के मंदिरों व मस्जिदों से ऐलान किया गया। इसमें क्षेत्रवासियों से एलर्ट रहने, रात को घरों से न निकलने, खेतों पर अकेले न जाने की अपील की गई। इसके बाद कई ऐसे परिवार जिनके घरों में दरवाजे नहीं उन्होंने पड़ोसियों के घर शरण ली जबकि सड़क किनारे रहने वाले कई परिवारों ने छतों पर रात गुजारी। दहशत के चलते कई लोगों ने तो पूरी रात जागकर काटी और जागते रहो की आवाजें सुनाई देती रहीं। वहीं घटना स्थल से लगभग दो किमी दूर स्थित पौटाडाम पर टेंट में ह रहे मछली ठेकेदार एवं उसके स्टाफ ने गांव से बस मंगवाकर उसकी छत पर रात गुजारी। इसके लिए उन्होंने अपने तख्त भी बस की छतों पर ही रख लिए।
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