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तेंदुए ने बंदर को बनाया निवाला
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मझोला। जंगल से दूर मझोला शुगर मिल में पिछले कई दिनों से तेंदुए की दहशत है। तेेंदुए को पकड़ने के लिए विभागीय स्तर से किए जा रहे प्रयास मात्र औपचारिकताओं तक सीमित हैं। तेंदुए ने मिल परिसर को अपनी शरणस्थली बना लिया है। गुरुवार को दिन में करीब 11 बजे मिल परिसर में तेंदुए ने एक बंदर को निवाला बना लिया। तेंदुआ देख कुछ दूरी पर मौजूद चौकीदार भाग खड़ा हुआ। सूचना के बाद पहुंचे वनकर्मियों ने तेंदुए की निगरानी शुरू कर दी है।
बाघ संरक्षण के लिए जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा तो मिल गया, लेकिन संसाधनों के साथ फील्ड स्टाफ की कमी को पूरा नहीं किया जा सका। इसको लेकर शासन स्तर से भी कोई संजीदगी दिखाई नहीं दे रही है। जंगल का अनुकूल वातावरण होने के चलते बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है। जंगल सीमा पर कोई रोक न होने से वन्यजीव जंगल से बाहर की ओर रुख कर रहे है। उनको जंगल की ओर वापस करने के विभागीय स्तर से प्रयास तो किए जाते है, लेकिन वह कारगर नहीं होते है। जिसके चलते वन्यजीव जंगल से बाहर रुकना शुरू कर देते है। अमरिया क्षेत्र इसका उदाहरण है। इधर पिछले 20 दिनों से मझोला की सीमा में स्थित शुगर मिल में एक तेंदुए की चहलकदमी देखी जा रही है। सूचना के बाद शुरुआत में विभाग ने चार कैमरे लगाकर तेंदुए की निगरानी शुरू कर दी थी। उस समय यह कहा गया था कि तेंदुआ जंगल की ओर वापस चला गया, लेकिन इसके बावजूद उसकी मौजूदगी देखी जाती रही। इधर गुरुवार दिन में मिल परिसर में छिपे तेंदुए ने बाहर निकलकर एक बंदर को निवाला बना लिया। तेंदुआ देख कुछ दूरी पर मौजूद चौकीदार नारायण लाल व दौलत राम ने भागकर जान बचाई और बाहर की ओर जाकर शोर मचाया तो तेंदुआ अंदर की ओर झाड़ियों में निकल गया।
मझोला मिल में तेंदुए की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए कैमरे लगाने के लिए विभागीय अनुमति मांगी गई है। जल्द ही कैमरे लगवा दिए जाएंगे।
- सतेंद्र चौधरी, रेंजर, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
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बाघ संरक्षण के लिए जिले के जंगल को टाइगर रिजर्व का दर्जा तो मिल गया, लेकिन संसाधनों के साथ फील्ड स्टाफ की कमी को पूरा नहीं किया जा सका। इसको लेकर शासन स्तर से भी कोई संजीदगी दिखाई नहीं दे रही है। जंगल का अनुकूल वातावरण होने के चलते बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की संख्या बढ़ रही है। जंगल सीमा पर कोई रोक न होने से वन्यजीव जंगल से बाहर की ओर रुख कर रहे है। उनको जंगल की ओर वापस करने के विभागीय स्तर से प्रयास तो किए जाते है, लेकिन वह कारगर नहीं होते है। जिसके चलते वन्यजीव जंगल से बाहर रुकना शुरू कर देते है। अमरिया क्षेत्र इसका उदाहरण है। इधर पिछले 20 दिनों से मझोला की सीमा में स्थित शुगर मिल में एक तेंदुए की चहलकदमी देखी जा रही है। सूचना के बाद शुरुआत में विभाग ने चार कैमरे लगाकर तेंदुए की निगरानी शुरू कर दी थी। उस समय यह कहा गया था कि तेंदुआ जंगल की ओर वापस चला गया, लेकिन इसके बावजूद उसकी मौजूदगी देखी जाती रही। इधर गुरुवार दिन में मिल परिसर में छिपे तेंदुए ने बाहर निकलकर एक बंदर को निवाला बना लिया। तेंदुआ देख कुछ दूरी पर मौजूद चौकीदार नारायण लाल व दौलत राम ने भागकर जान बचाई और बाहर की ओर जाकर शोर मचाया तो तेंदुआ अंदर की ओर झाड़ियों में निकल गया।
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मझोला मिल में तेंदुए की वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए कैमरे लगाने के लिए विभागीय अनुमति मांगी गई है। जल्द ही कैमरे लगवा दिए जाएंगे।
- सतेंद्र चौधरी, रेंजर, पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग