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मदर्स डे के तौर पर मनेगा हजरत खदीजा का यौमे विसाल
Updated Mon, 05 Jun 2017 06:47 PM IST
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पीलीभीत। उम्मुल मोमिनीन (मोमिनों की मां) हजरत खदीजा तुल कुबरा का यौमे विसाल 10वें रमजान (मंगलवार) को यौम-ए-मादर (मदर्स डे) के रूप में मनाया जाएगा। हजरत खदीजा रदि. बहुत बुलंद किरदार, आबिदा और जाहिदा औरत थीं।
मौलाना अब्दुल करीम नूरी बताते हैं कि उनके मर्तबे का इसी बात से पता चलता है कि हजरत जिब्राईल अलैहिस्सलाम उनके लिए अल्लाह तआला का सलाम और जन्नती मेवे लेकर आए। उन्होंने गरीब मिस्कीनों की मिसाली इमदाद की। हजरत खदीजा का सऊदी अरब में कपड़े का बहुत बड़ा व्यापार था। उनका कारोबार कई दूसरे मुल्कों तक होता था। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम भी तिजारत किया करते थे। एक रिवायत के मुताबिक हजरत खदीजा के एक रिश्तेदार ने तिजारत में पैगम्बर-ए-इस्लाम से कांट्रेक्ट की सलाह दी। हजरत खदीजा ने सलाह मान ली और पैगम्बर-ए-इस्लाम से तिजारती कांट्रेक्ट हो गया। पैगम्बर-ए-इस्लाम ने कारोबार की बागडोर संभाली तो मुनाफा बहुत बढ़ गया। उनके अखलाक, किरदार, मेहनत, लगन और ईमानदारी से मुतास्सिर होकर हजरत खदीजा ने हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम के चाचा के पास हजरत मोहम्मद मुस्तफा से अपने निकाह का पैगाम भेजा, जिसे उन्होंने कुबूल कर लिया। उस वक्त हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम की उम्र 25 साल जबकि हजरत खदीजा की उम्र 40 साल थी। वह बेवाह (विधवा) थीं। इस तरह हजरत खदीजा हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम की पहली बीवी बनीं। खातून-ए-जन्नत हजरत बीबी फातिमा रदि. उन्हीं की बेटी हैं। आज के दिन हजरत खदीजा रदि. को तमाम मुसलमानों के घरों और मजहबी इदारों में नियाज नज्र कर खिराजे अकीदत पेश की जाती है। छह जून को शहर के कई स्थानों पर सामूहिक रोजा इफ्तार के कार्यक्रम आदि होंगे।
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मौलाना अब्दुल करीम नूरी बताते हैं कि उनके मर्तबे का इसी बात से पता चलता है कि हजरत जिब्राईल अलैहिस्सलाम उनके लिए अल्लाह तआला का सलाम और जन्नती मेवे लेकर आए। उन्होंने गरीब मिस्कीनों की मिसाली इमदाद की। हजरत खदीजा का सऊदी अरब में कपड़े का बहुत बड़ा व्यापार था। उनका कारोबार कई दूसरे मुल्कों तक होता था। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम भी तिजारत किया करते थे। एक रिवायत के मुताबिक हजरत खदीजा के एक रिश्तेदार ने तिजारत में पैगम्बर-ए-इस्लाम से कांट्रेक्ट की सलाह दी। हजरत खदीजा ने सलाह मान ली और पैगम्बर-ए-इस्लाम से तिजारती कांट्रेक्ट हो गया। पैगम्बर-ए-इस्लाम ने कारोबार की बागडोर संभाली तो मुनाफा बहुत बढ़ गया। उनके अखलाक, किरदार, मेहनत, लगन और ईमानदारी से मुतास्सिर होकर हजरत खदीजा ने हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम के चाचा के पास हजरत मोहम्मद मुस्तफा से अपने निकाह का पैगाम भेजा, जिसे उन्होंने कुबूल कर लिया। उस वक्त हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम की उम्र 25 साल जबकि हजरत खदीजा की उम्र 40 साल थी। वह बेवाह (विधवा) थीं। इस तरह हजरत खदीजा हजरत मोहम्मद मुस्तफा सललल्लाहो अलैहेवसल्लम की पहली बीवी बनीं। खातून-ए-जन्नत हजरत बीबी फातिमा रदि. उन्हीं की बेटी हैं। आज के दिन हजरत खदीजा रदि. को तमाम मुसलमानों के घरों और मजहबी इदारों में नियाज नज्र कर खिराजे अकीदत पेश की जाती है। छह जून को शहर के कई स्थानों पर सामूहिक रोजा इफ्तार के कार्यक्रम आदि होंगे।
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