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किसने डाली खातों में करोड़ों की रकम, आयकर की जांच में फर्म मालिकों ने किया इंकार
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Thu, 23 Mar 2017 12:30 AM IST
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शहर की एक फर्म पर जांच करने पहुंची आयकर विभाग की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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आयकर विभाग की जांच में बड़े स्तर पर बैंक अफसरों का गड़बड़झाला सामने आया है। नोटबंदी के बाद करोड़ों की ब्लैकमनी को निष्क्रिय बैंक खातों के जरिये बदल दिया गया। घोषित आय से ज्यादा कैश अकाउंट में जमा होने के बाद जांच हुई तो तीन मामलों में यह सनसनीखेज खुलासा सामने आया है। इस मामले में आयकर अफसरों ने तीन बैंक प्रबंधकों को नोटिस जारी कर खातों की विस्तृत डिटेल तलब की है।
मुजफ्फरनगर और शामली जोन के 1200 खातों की जांच में जुटी आयकर विभाग की टीम के होश उड़ गए हैं। तीन मामलों में छापे की कार्रवाई के बाद फर्म के मालिकों ने अपने खातों में जमा हुई करोड़ों की नकदी से पल्ला झाड़ लिया है। जोन में आयकर की जांच के निशाने पर 400 ऐसे बैंक खाते हैं, जिनमें एक से दस करोड़ तक का कैश जमा किया गया है। नोटबंदी के बाद जमा की गई यह मोटी रकम अघोषित श्रेणी में है।
आयकर के नोटिस के बाद दायरे में आए खातेदारों में हड़कंप मचा है। एक सप्ताह से बड़ी रकम की लेनदेन की जांच के लिए छापे की कार्रवाई चल रही है। बृहस्पतिवार को अपर आयकर आयुक्त वाईपीबी सिंह के निर्देशन में तीन टीमों ने एक साथ छापेमारी की। आयकर अफसर उस वक्त भौचक्क रह गए, जब व्यापारियों ने अपने बैंक खातों में नोटबंदी के दौरान जमा की गई करोड़ों की रकम के लेनदेन से ही इंकार कर दिया।
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जानसठ रोड स्थित महालक्ष्मी एनक्लेव में राज इंटरप्राइजेज अमूल दूध के डीलर पर जांच के लिए आयकर टीम पहुंची थी, जहां आयकर अफसरों के सामने यह खुलासा हुआ। इससे पहले भोपा रोड स्थित पेट्रोल पंप और कांधला के राजीव सर्विस स्टेशन की जांच में भी ऐसा ही पाया गया। व्यापारी और प्रोप्राइटरों ने आयकर अफसरों से कहा कि जिन खातों में करोड़ों का अघोषित लेनदेन किया गया है, वो खाते सालों से बंद हैं। बैंकों ने उनके खातों में किसकी रकम की ट्रांजक्शन की है, उन्हें नहीं मालूम। मामले के खुलासे के बाद आयकर अफसरों ने संबंधित बैंक प्रबंधकों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
उक्त तीन व्यापारियों के खातों की विस्तृत डिटेल मांगी गई है। किस तिथि में कितनी रकम जमा की गई, कब-कब निकाली गई और बैंक स्लिप का क्या रिकार्ड है। यह चौकाने वाली बात है कि नोटबंदी की अवधि के दौरान निष्क्रिय खातों में कैसे करोड़ों का लेनदेन हो गया। फिलहाल इन खातों में कोई रकम नहीं है। बैंकों पर मिलीभगत की शक की सुईं है। आयकर जांच टीम का कहना है कि अभी तक सात मामलों की जांच में तीन व्यापारियों ने बैंक खातों के लेनदेन से इंकार किया है।
55 लाख की अघोषित रकम
मुजफ्फरनगर। शहर की दाल मंडी में आयकर टीम ने बृहस्पतिवार को निशा ट्रेडिंग कंपनी पर छापा मारा। जांच अधिकारी केपी अनुरागी और विवेकानंद ने बताया कि खातों में अघोषित आय से ज्यादा 55 लाख की रकम मिली, जिसे फर्म स्वामी ने स्वीकार कर लिया है। उक्त रकम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में जमा कराई जाएगी।
पेट्रोल पंप मालिकों को सावधान किया
मुजफ्फरनगर। अपर आयकर आयुक्त वाईपीबी सिंह ने आयकर भवन में जिले भर के पेट्रोल पंप मालिकों की बैठक ली। जिन पंप मालिकों ने घोषित आय से अधिक पैसा बैंकों में जमा किया है, वह प्रधानमंत्री गरीब योजना में अपना सेटलमेंट करा सकते हैं। पंप मालिकों ने सरकार की योजना का लाभ उठाते हुए जितना तेल बेचा, उससे अधिक रकम खातों में जमा की है, जो जांच के दायरे में है।
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मुजफ्फरनगर और शामली जोन के 1200 खातों की जांच में जुटी आयकर विभाग की टीम के होश उड़ गए हैं। तीन मामलों में छापे की कार्रवाई के बाद फर्म के मालिकों ने अपने खातों में जमा हुई करोड़ों की नकदी से पल्ला झाड़ लिया है। जोन में आयकर की जांच के निशाने पर 400 ऐसे बैंक खाते हैं, जिनमें एक से दस करोड़ तक का कैश जमा किया गया है। नोटबंदी के बाद जमा की गई यह मोटी रकम अघोषित श्रेणी में है।
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आयकर के नोटिस के बाद दायरे में आए खातेदारों में हड़कंप मचा है। एक सप्ताह से बड़ी रकम की लेनदेन की जांच के लिए छापे की कार्रवाई चल रही है। बृहस्पतिवार को अपर आयकर आयुक्त वाईपीबी सिंह के निर्देशन में तीन टीमों ने एक साथ छापेमारी की। आयकर अफसर उस वक्त भौचक्क रह गए, जब व्यापारियों ने अपने बैंक खातों में नोटबंदी के दौरान जमा की गई करोड़ों की रकम के लेनदेन से ही इंकार कर दिया।
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जानसठ रोड स्थित महालक्ष्मी एनक्लेव में राज इंटरप्राइजेज अमूल दूध के डीलर पर जांच के लिए आयकर टीम पहुंची थी, जहां आयकर अफसरों के सामने यह खुलासा हुआ। इससे पहले भोपा रोड स्थित पेट्रोल पंप और कांधला के राजीव सर्विस स्टेशन की जांच में भी ऐसा ही पाया गया। व्यापारी और प्रोप्राइटरों ने आयकर अफसरों से कहा कि जिन खातों में करोड़ों का अघोषित लेनदेन किया गया है, वो खाते सालों से बंद हैं। बैंकों ने उनके खातों में किसकी रकम की ट्रांजक्शन की है, उन्हें नहीं मालूम। मामले के खुलासे के बाद आयकर अफसरों ने संबंधित बैंक प्रबंधकों को नोटिस जारी कर दिए हैं।
उक्त तीन व्यापारियों के खातों की विस्तृत डिटेल मांगी गई है। किस तिथि में कितनी रकम जमा की गई, कब-कब निकाली गई और बैंक स्लिप का क्या रिकार्ड है। यह चौकाने वाली बात है कि नोटबंदी की अवधि के दौरान निष्क्रिय खातों में कैसे करोड़ों का लेनदेन हो गया। फिलहाल इन खातों में कोई रकम नहीं है। बैंकों पर मिलीभगत की शक की सुईं है। आयकर जांच टीम का कहना है कि अभी तक सात मामलों की जांच में तीन व्यापारियों ने बैंक खातों के लेनदेन से इंकार किया है।
55 लाख की अघोषित रकम
मुजफ्फरनगर। शहर की दाल मंडी में आयकर टीम ने बृहस्पतिवार को निशा ट्रेडिंग कंपनी पर छापा मारा। जांच अधिकारी केपी अनुरागी और विवेकानंद ने बताया कि खातों में अघोषित आय से ज्यादा 55 लाख की रकम मिली, जिसे फर्म स्वामी ने स्वीकार कर लिया है। उक्त रकम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में जमा कराई जाएगी।
पेट्रोल पंप मालिकों को सावधान किया
मुजफ्फरनगर। अपर आयकर आयुक्त वाईपीबी सिंह ने आयकर भवन में जिले भर के पेट्रोल पंप मालिकों की बैठक ली। जिन पंप मालिकों ने घोषित आय से अधिक पैसा बैंकों में जमा किया है, वह प्रधानमंत्री गरीब योजना में अपना सेटलमेंट करा सकते हैं। पंप मालिकों ने सरकार की योजना का लाभ उठाते हुए जितना तेल बेचा, उससे अधिक रकम खातों में जमा की है, जो जांच के दायरे में है।