Amit Shah: अमित शाह का घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस का आदेश, आतंकवाद से लड़ाई में AI भी अहम; सरकार की क्या तैयारी?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ और अवैध आव्रजन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने आतंकवाद से निपटने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI के अधिक इस्तेमाल पर भी जोर दिया। सम्मेलन में आतंकवाद, कट्टरपंथ, साइबर अपराध और पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर समेत कई चुनौतियों पर चर्चा हुई। आखिर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की नई प्राथमिकताएं क्या हैं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को नई दिल्ली में नौवें राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया। सम्मेलन में देशभर से करीब 850 अधिकारी शामिल हुए। अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ और अवैध आव्रजन के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में एजेंसियों को ज्यादा समन्वित और सख्त तरीके से काम करना होगा।
आतंकवाद के खिलाफ AI का इस्तेमाल कैसे बढ़ेगा?
अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को मल्टी-एजेंसी सेंटर यानी MAC पर उपलब्ध खुफिया जानकारी के विश्लेषण में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने AI की मदद से राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP तैयार करने पर भी जोर दिया। उनका निर्देश है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल जानकारी जुटाने तक सीमित न रहे, बल्कि उसके विश्लेषण और कार्रवाई में भी किया जाए।
सम्मेलन में किन सुरक्षा चुनौतियों पर हुई चर्चा?
सम्मेलन के पहले दिन आतंकवाद, कट्टरपंथ, साइबर अपराध और पाकिस्तान की प्रॉक्सी वॉर जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। अमित शाह ने आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने के लिए गृह मंत्रालय की ‘प्रहार’ पहल के प्रभावी क्रियान्वयन और सुरक्षा कर्मियों के प्रशिक्षण पर जोर दिया। उन्होंने विदेशों में छिपे भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया तेज करने और उनके मुकदमों में तेजी लाने का भी निर्देश दिया।
भगोड़ों और यूएपीए मामलों पर क्या रणनीति होगी?
अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों को फरार आरोपियों के खिलाफ अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने यानी ट्रायल इन एब्सेंटिया के प्रावधान का इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया। गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत मामलों की जांच में सभी एजेंसियों को मिलकर और व्यापक तरीके से काम करने को कहा गया। इसके अलावा घुसपैठ रोकने के लिए एक व्यापक सुरक्षा ढांचा तैयार करने का निर्देश दिया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में आगे क्या हुआ?
सम्मेलन में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए एक विजन दस्तावेज और साइबर अपराध से निपटने के लिए नए नीति ढांचे पर भी चर्चा हुई। राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन का आयोजन 2021 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर हर साल किया जा रहा है। इस बार भी इसका फोकस बदलते सुरक्षा खतरों के बीच एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, तकनीक के इस्तेमाल और आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करने पर रहा।