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Muzaffarnagar News: ढूंढने निकले तो 100 मजरों में बांस-बल्लियों पर मिले तार
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मुजफ्फरनगर। विभिन्न गांवों और मजरों में बांस-बल्लियों पर लटके जर्जर बिजली के तारों को जल्द ही बदला जाएगा। नए विद्युत पोल लगाए जाएंगे और कई नए मजरों का विद्युतीकरण भी किया जाएगा। एशियन डेवलपमेंट बैंक (एडीबी) के सहयोग से कराए जाने वाले इस कार्य के लिए ऊर्जा निगम ने निजी कंपनी से सर्वे कराना शुरू कर दिया है। सर्वे में 100 से अधिक मजरों में जर्जर तार पाए गए हैं, जिन्हें बदलने की तैयारी चल रही है।
ऊर्जा निगम वर्तमान में शहर और देहात दोनों क्षेत्रों में आरडीएसएस और बिजनेस प्लान के तहत जर्जर विद्युत तारों को बदलने, पोषकों का विभक्तिकरण करने और बिजलीघरों की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य करा रहा है। जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित गांवों और उनके मजरों के विद्युतीकरण के लिए एक नई योजना की शुरुआत की गई है। विभागीय अधिकारी जनप्रतिनिधियों से भी इस संबंध में प्रस्ताव मांगे गए हैं।
ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि निजी कंपनी से कराए जा रहे सर्वे के आधार पर अनुमान है कि इस योजना के तहत तीन लाख से अधिक लोगों को विद्युतीकरण का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह भी बताया कि दो वर्ष पूर्व इस दायरे में लगभग 60 मजरों को शामिल किया गया था, लेकिन वर्तमान सर्वे के अनुसार यह संख्या बढ़कर 100 से ऊपर जाने की संभावना है।
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निजी कंपनी द्वारा विस्तृत सर्वे जारी
एनआर कंसल्टेंसी नामक एक निजी कंपनी ऊर्जा निगम की ओर से पूरे जनपद में सर्वे का कार्य कर रही है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन सभी रिहायशी इलाकों की पहचान करना है, जहां विद्युतीकरण की आवश्यकता है। शुरुआती सर्वे में जनपद के विभिन्न गांवों के 60 से अधिक ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है जहां विद्युतीकरण की तत्काल आवश्यकता है।
पश्चिमांचल क्षेत्र में व्यापक विद्युतीकरण
एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) फेज-2 और इलेक्ट्रीफिकेशन ऑफ अनइलेक्ट्रीफाइड हाउस होल्ड (अविद्युतीकरण) योजना के अंतर्गत अविद्युतीकृत मजरों और घरों का विद्युतीकरण किया जाना है। ऊर्जा निगम की ओर से वर्ष 2023 में जारी की गई एक सूची के अनुसार, सहारनपुर मंडल के 355 रिहायशी इलाकों को इस योजना में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम क्षेत्र के छह जोन के कुल 14 जनपदों में 2516 ऐसे इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां विद्युतीकरण का कार्य किया जाएगा। इन कार्यों में लंबी दूरी के उन कनेक्शनों पर लोहे और पत्थर के पोल लगाना भी शामिल है जो वर्तमान में बांस-बल्लियों से जुड़े हुए हैं।
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ऊर्जा निगम वर्तमान में शहर और देहात दोनों क्षेत्रों में आरडीएसएस और बिजनेस प्लान के तहत जर्जर विद्युत तारों को बदलने, पोषकों का विभक्तिकरण करने और बिजलीघरों की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य करा रहा है। जनपद के दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित गांवों और उनके मजरों के विद्युतीकरण के लिए एक नई योजना की शुरुआत की गई है। विभागीय अधिकारी जनप्रतिनिधियों से भी इस संबंध में प्रस्ताव मांगे गए हैं।
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ऊर्जा निगम के मुख्य अभियंता विनोद कुमार गुप्ता ने बताया कि निजी कंपनी से कराए जा रहे सर्वे के आधार पर अनुमान है कि इस योजना के तहत तीन लाख से अधिक लोगों को विद्युतीकरण का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह भी बताया कि दो वर्ष पूर्व इस दायरे में लगभग 60 मजरों को शामिल किया गया था, लेकिन वर्तमान सर्वे के अनुसार यह संख्या बढ़कर 100 से ऊपर जाने की संभावना है।
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निजी कंपनी द्वारा विस्तृत सर्वे जारी
एनआर कंसल्टेंसी नामक एक निजी कंपनी ऊर्जा निगम की ओर से पूरे जनपद में सर्वे का कार्य कर रही है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य उन सभी रिहायशी इलाकों की पहचान करना है, जहां विद्युतीकरण की आवश्यकता है। शुरुआती सर्वे में जनपद के विभिन्न गांवों के 60 से अधिक ऐसे क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है जहां विद्युतीकरण की तत्काल आवश्यकता है।
पश्चिमांचल क्षेत्र में व्यापक विद्युतीकरण
एडीबी (एशियन डेवलपमेंट बैंक) फेज-2 और इलेक्ट्रीफिकेशन ऑफ अनइलेक्ट्रीफाइड हाउस होल्ड (अविद्युतीकरण) योजना के अंतर्गत अविद्युतीकृत मजरों और घरों का विद्युतीकरण किया जाना है। ऊर्जा निगम की ओर से वर्ष 2023 में जारी की गई एक सूची के अनुसार, सहारनपुर मंडल के 355 रिहायशी इलाकों को इस योजना में शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम क्षेत्र के छह जोन के कुल 14 जनपदों में 2516 ऐसे इलाके चिह्नित किए गए हैं, जहां विद्युतीकरण का कार्य किया जाएगा। इन कार्यों में लंबी दूरी के उन कनेक्शनों पर लोहे और पत्थर के पोल लगाना भी शामिल है जो वर्तमान में बांस-बल्लियों से जुड़े हुए हैं।