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मुजफ्फरनगर: पुलवामा में शहीद प्रशांत शर्मा के पिता को सौंपा 50 लाख सहायता राशि का चेक

Mon, 31 Aug 2020 12:03 AM IST
मेरठ ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: मेरठ ब्यूरो Updated Mon, 31 Aug 2020 12:03 AM IST
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Shaheed Prashant Sharma: A check for 50 lakh aid given to his father
शहीद प्रशांत के पिता को चेक देते प्रदेश के कैबिनेट गन्ना विकास मंत्री सुरेश राणा मंत - फोटो : MUZAFFARNAGAR
पुलवामा में शहीद मुजफ्फरनगर के लाल प्रशांत शर्मा की शहादत को सलाम करने मुख्यमंत्री प्रतिनिधि के रूप में गन्ना मंत्री सुरेश राणा रविवार सुबह उनके स्थान पर पहुंचे। गन्ना मंत्री ने शहीद जवान के परिवार को सांत्वना देते हुए हर कदम पर प्रदेश सरकार के उनके साथ खड़े होने का भरोसा दिया। गन्ना मंत्री ने शहीद के पिता शीशपाल शर्मा को सरकार की ओर से 50 लाख रुपये सहायता राशि का चेक सौंपा।
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गन्ना मंत्री ने कहा कि इस दुख की घड़ी में शहीद के परिवार को और भी जो मदद होगी की जाएगी। प्रशांत ने देश की रक्षा के लिए अपनी कुर्बानी देकर भारतीयों का नतमस्तक ऊंचा कर दिया।
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देश की सीमाओं की रक्षा के लिए जान देने वाले वीर सपूतों को कोई भूला नहीं सकता। केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान के साथ ही राज्यमंत्री कपिलदेव अग्रवाल, विधायक उमेश मलिक, विधायक विजय कश्यप, विधायक प्रमोद ऊंटवाल आदि ने भी शहीद के पिता को सांत्वना दी।
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यह भी पढ़ें: अपने लाल का चेहरे देख बेहोश हुई मां, रो-रोकर बुरा हाल, शहीद की अंतिम यात्रा में लगे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे

मोती झील पुल तक पैदलयात्रा, फिर सेना ने संभाली व्यवस्था
शहीद प्रशांत शर्मा की अंतिम यात्रा उनके बुढ़ाना मोड़ स्थित घर से जनसैलाब के साथ गमगीन माहौल व देशभक्ति के जज्बे के साथ शुरू हुई। एसएसपी अभिषेक यादव के साथ ही डीएम सेल्वा कुमारी जे ने भी शहीद के पार्थिव शरीर को सम्मान दिया।

मंत्रियों के साथ एसएसपी ने भी अंतिम सफर में पार्थिव शरीर को कांधा दिया। शहीद के पार्थिव शरीर को पैदल ही चरथावल मोड़ से आगे मोती झील पुल तक लाया गया, जहां से शव को सेना के वाहन में रखा गया।

सेना के वाहन के आगे मेरठ से आई जाट रेजीमेंट के जवान पूरे सम्मान के साथ लेकर कदम चाल में आगे-आगे चलते रहे। सेना की व्यवस्था को युवाओं ने भी पूरा सहयोग किया और सड़क के दोनों ओर मानव श्रृंखला बनाकर भीड़ को बीच में घुसने से बचाते रहे। इसके बाद आत्मबोध श्मशान घाट पहुंचकर शहीद के पार्थिव शरीर का पूर्ण विधि-विधान के अनुसार अंतिम संस्कार कर दिया गया।

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