{"_id":"5e14d2928ebc3e87fa54efd1","slug":"panchayats-involved-in-complaints-during-election-year-muzaffarnagar-news-mrt4626404121","type":"story","status":"publish","title_hn":"चुनावी साल में शिकायतों में उलझी पंचायतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
चुनावी साल में शिकायतों में उलझी पंचायतें
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चुनावी साल में शिकायतों में उलझी पंचायतें
मुजफ्फरनगर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर फिर से कवायद शुरू होने लगी है। गांवों में राजनीति चरम पर पहुंच गई है। इसके चलते लोग वर्तमान ग्राम प्रधानों के खिलाफ खूब शिकायतें कर रहे हैं। इन्हीं शिकायतों के चलते इन दिनों दस ग्राम प्रधान जांच की जद में हैं, जबकि बीते चार वर्षों में आठ ग्राम प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
इसी वर्ष अक्तूबर-नवंबर माह में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते जिले की 498 ग्राम पंचायतों में भी चुनावी राजनीति तेज हो गई है। वर्तमान ग्रामप्रधान के खिलाफ विपक्षियों की लामबंदी होने लगी है। ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए कार्यों को लेकर भी शिकायतों का दौर चल रहा है। जिला पंचायत राज विभाग के माध्यम से दस ग्राम प्रधानों के खिलाफ विकास कार्यों की अनियमितताओं व अन्य बिंदुओं को लेकर जांच चल रही है। यह जांच जिला स्तरीय अधिकारियों को सौंपी गई है। बीते चार साल के कार्यकाल में करीब एक दर्जन ग्राम प्रधानों को जांच के दायरे से गुजरना पड़ा। इनमें से आठ के खिलाफ कार्रवाई हुई। कुछ के वित्तीय अधिकार सीज हुए तो कुछ को निलंबित होना पड़ा। एक ग्राम प्रधान की बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हुई। उधर, डीपीआरओ सुधीर कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने कुछ समय पूर्व ही जार्च लिया है, जो भी जांच चल रही हैं उनसे पूर्व की हैं।
इन ग्राम प्रधानों के खिलाफ चल रही जांच
ग्रामीणों की शिकायत पर दस ग्राम प्रधान जांच के दायरे में हैं। इनमें सरनावली, हजूर नगर, दूधली, टांडा, खानूपुर, पलड़ा, पिपलहेड़ा, रेई, बधाई कला और गढ़मलपुर सागड़ी शामिल हैं। पंचायत चुनाव तक ग्राम प्रधानों के खिलाफ दर्ज होने वाली शिकायतों में और इजाफा होने की संभावना है। ग्राम प्रधान के खिलाफ ज्यादातर शिकायतें विकास कार्यों को लेकर होती हैं। इनमें नाला-नाली निर्माण, सड़क निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण आदि कार्यों को आधार बनाकर शिकायतें की गईं हैं। इसके अतिरिक्त मनरेगा में कराए गए कार्यों में गड़बड़ी को भी शिकायतों का आधार बनाया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुजफ्फरनगर। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर फिर से कवायद शुरू होने लगी है। गांवों में राजनीति चरम पर पहुंच गई है। इसके चलते लोग वर्तमान ग्राम प्रधानों के खिलाफ खूब शिकायतें कर रहे हैं। इन्हीं शिकायतों के चलते इन दिनों दस ग्राम प्रधान जांच की जद में हैं, जबकि बीते चार वर्षों में आठ ग्राम प्रधानों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
इसी वर्ष अक्तूबर-नवंबर माह में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की संभावना जताई जा रही है। इसके चलते जिले की 498 ग्राम पंचायतों में भी चुनावी राजनीति तेज हो गई है। वर्तमान ग्रामप्रधान के खिलाफ विपक्षियों की लामबंदी होने लगी है। ग्राम प्रधान द्वारा कराए गए कार्यों को लेकर भी शिकायतों का दौर चल रहा है। जिला पंचायत राज विभाग के माध्यम से दस ग्राम प्रधानों के खिलाफ विकास कार्यों की अनियमितताओं व अन्य बिंदुओं को लेकर जांच चल रही है। यह जांच जिला स्तरीय अधिकारियों को सौंपी गई है। बीते चार साल के कार्यकाल में करीब एक दर्जन ग्राम प्रधानों को जांच के दायरे से गुजरना पड़ा। इनमें से आठ के खिलाफ कार्रवाई हुई। कुछ के वित्तीय अधिकार सीज हुए तो कुछ को निलंबित होना पड़ा। एक ग्राम प्रधान की बर्खास्तगी की कार्रवाई भी हुई। उधर, डीपीआरओ सुधीर कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि उन्होंने कुछ समय पूर्व ही जार्च लिया है, जो भी जांच चल रही हैं उनसे पूर्व की हैं।
विज्ञापन
इन ग्राम प्रधानों के खिलाफ चल रही जांच
ग्रामीणों की शिकायत पर दस ग्राम प्रधान जांच के दायरे में हैं। इनमें सरनावली, हजूर नगर, दूधली, टांडा, खानूपुर, पलड़ा, पिपलहेड़ा, रेई, बधाई कला और गढ़मलपुर सागड़ी शामिल हैं। पंचायत चुनाव तक ग्राम प्रधानों के खिलाफ दर्ज होने वाली शिकायतों में और इजाफा होने की संभावना है। ग्राम प्रधान के खिलाफ ज्यादातर शिकायतें विकास कार्यों को लेकर होती हैं। इनमें नाला-नाली निर्माण, सड़क निर्माण, तालाब सौंदर्यीकरण आदि कार्यों को आधार बनाकर शिकायतें की गईं हैं। इसके अतिरिक्त मनरेगा में कराए गए कार्यों में गड़बड़ी को भी शिकायतों का आधार बनाया जाता है।
विज्ञापन