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ऐतिहासिक तालाब की अनदेखी कर रहा स्थानीय प्रशासन
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खतौली ब्लाक के गांव शेखपुरा में स्थित ऐतिहासिक तालाब में गंदगी का अंबार।
- फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर, खतौली। गांव शेखपुरा में बने ऐतिहासिक तालाब का प्रशासनिक मशीनरी की लापरवाही के चलते अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। जहां एक ओर शासन तालाबों को लेकर गंभीर है, वही स्थानीय प्रशासन इस तालाब की ओर कोई ध्यान नही दे रहा है।
ब्लाक खतौली के गांव शेखपुरा में स्थित ऐतिहासिक तालाब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। तालाब का रकबा सरकारी अभिलेखों में 52 बीघा का है, जबकि मौके पर कुछ ग्रामीणों ने उस पर कब्जा किया हुआ है। जिसको लेकर उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। गांव शेखपुरा के तालाब की भव्यता देखते ही बनती है। यह तालाब चारों ओर से पक्का बना हुआ है। इसमें लाखोरी ईंट से निर्माण किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, मुगल काल में इस तालाब का निर्माण किया गया था। तालाब में 8 बड़े बुर्ज बने हैं, जबकि चार घाट हैं, जो रैंप नुमा बने हुए हैं। चारों ओर से तालाब में उतरने के लिए पक्की सीढ़ियों का निर्माण कराया गया था।
इस समय सरकार तालाबों के जीर्णोद्धार पर अधिक ध्यान दे रही है। मगर सच्चाई यह है कि इस तालाब की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है। तालाब कचरे से अटा पड़ा है। बड़ी मात्रा में तालाब के अंदर सिल्ट जमा है। करीब 25 वर्ष पूर्व तालाब की सफाई का अभियान चलाया गया था, मगर उस समय भी पूर्ण रूप से सफाई नहीं हो सकी थी। कचरा और सिल्ट ने इसकी ऐतिहासिकता को छिपा दिया है। इस तालाब की अगर सफाई हो जाती है, तो इसकी ऐतिहासिकता और भव्यता पर लोग आकर्षित हो उठेंगे। जैसा इस तालाब का निर्माण हुआ है। जनपद में शायद ही किसी तालाब का इस प्रकार निर्माण हुआ हो। इस संबंध में तहसीलदार आरती यादव का कहना है कि मौके पर पहुंचकर इस तालाब को वह स्वयं देखेंगी और इसकी साफ-सफाई भी कराई जाएगी।
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ब्लाक खतौली के गांव शेखपुरा में स्थित ऐतिहासिक तालाब अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। तालाब का रकबा सरकारी अभिलेखों में 52 बीघा का है, जबकि मौके पर कुछ ग्रामीणों ने उस पर कब्जा किया हुआ है। जिसको लेकर उच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है। गांव शेखपुरा के तालाब की भव्यता देखते ही बनती है। यह तालाब चारों ओर से पक्का बना हुआ है। इसमें लाखोरी ईंट से निर्माण किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार, मुगल काल में इस तालाब का निर्माण किया गया था। तालाब में 8 बड़े बुर्ज बने हैं, जबकि चार घाट हैं, जो रैंप नुमा बने हुए हैं। चारों ओर से तालाब में उतरने के लिए पक्की सीढ़ियों का निर्माण कराया गया था।
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इस समय सरकार तालाबों के जीर्णोद्धार पर अधिक ध्यान दे रही है। मगर सच्चाई यह है कि इस तालाब की ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है। तालाब कचरे से अटा पड़ा है। बड़ी मात्रा में तालाब के अंदर सिल्ट जमा है। करीब 25 वर्ष पूर्व तालाब की सफाई का अभियान चलाया गया था, मगर उस समय भी पूर्ण रूप से सफाई नहीं हो सकी थी। कचरा और सिल्ट ने इसकी ऐतिहासिकता को छिपा दिया है। इस तालाब की अगर सफाई हो जाती है, तो इसकी ऐतिहासिकता और भव्यता पर लोग आकर्षित हो उठेंगे। जैसा इस तालाब का निर्माण हुआ है। जनपद में शायद ही किसी तालाब का इस प्रकार निर्माण हुआ हो। इस संबंध में तहसीलदार आरती यादव का कहना है कि मौके पर पहुंचकर इस तालाब को वह स्वयं देखेंगी और इसकी साफ-सफाई भी कराई जाएगी।
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