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Muzaffarnagar News: चीनी के दाम गिरने शुरू हुए...मिलने लगी राहत
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मुजफ्फरनगर। चीनी के बाजार में नरमी से लोगों को राहत मिलनी शुरू हो गई है। गृहिणियों का कहना है कि रसोई के बजट में राहत मिलेगी। उधर, थोक भाव में करीब 800 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आने से व्यापारियों का कहना है कि नुकसान होगा। व्यापारियों को डर है कि यदि कीमतों में और गिरावट हुई तो पहले से स्टॉक की गई चीनी पर नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जानसठ की रीना का कहना है कि पिछले हफ्ते चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। इससे फायदा हुआ है। सरकार ने जमाखोरी पर शिकंजा कसा तो, चीनी के दाम कम हुए हैं। पुरकाजी के गांव भैसानी निवासी गृहिणी नीलम त्यागी का कहना है कि दाम अब कम होकर 55 रुपये हो जाने से आम जनमानस को फायदा होगा। रसोई के बजट में भी फर्क पड़ेगा। चीनी के दाम घटकर 40 रुपये होने चाहिए।
चरथावल व्यापार मंडल अध्यक्ष अनुज गर्ग का कहना है चीनी के भाव तेजी से बढ़ने के कारण व्यापारियों और ग्राहक, दोनों को नुकसान हुआ है। उन्होंने पहले महंगे दाम पर चीनी खरीदी, फिर रेट कम होने से शुरू हो गए। इससे घाटा होना स्वाभाविक है। दाम बढ़े तो आपूर्ति कम हो गई। पर्याप्त मात्रा में चीनी नहीं बिकी। अब अचानक रेट गिरने से नुकसान हो गया। सरकार को भाव स्थिर करना चाहिए ताकि ग्राहक और व्यापारियों को नुकसान होने से निजात मिले।
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-फैक्टरी मालिकों का किया भुगत रहे चीनी के थोक व्यापारी
नई मंडी में चीनी के थोक कारोबारी अतुल मूंदड़ा का कहना है कि चीनी के भाव में तेजी के दौरान जिन व्यापारियों ने ऊंचे दाम पर माल खरीदा था, उनके लिए मौजूदा गिरावट परेशानी का कारण बन गई है। थोक चीनी के दामों में 20 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। इस स्थिति के लिए चीनी मिल मालिक जिम्मेदार हैं, जबकि भुगतना चीनी के थोक व्यापारियों को पड़ रहा है।
-चीनी की खपत और बिक्री पर भी असर होने की आशंका
चीनी के थोक कारोबारी शुभम मित्तल का कहना है कि चीनी के दाम में उतार-चढ़ाव से थोक बाजार में खरीद-बिक्री का संतुलन प्रभावित होता है। कारोबारी कम मात्रा में खरीद कर बाजार की दिशा भांप रहे हैं। वहीं जिन व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक है, वे भी जल्दबाजी में माल निकालने के बजाय भाव स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं।
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जानसठ की रीना का कहना है कि पिछले हफ्ते चीनी 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई थी, वह अब घटकर 55 रुपये प्रति किलो पर आ गई है। इससे फायदा हुआ है। सरकार ने जमाखोरी पर शिकंजा कसा तो, चीनी के दाम कम हुए हैं। पुरकाजी के गांव भैसानी निवासी गृहिणी नीलम त्यागी का कहना है कि दाम अब कम होकर 55 रुपये हो जाने से आम जनमानस को फायदा होगा। रसोई के बजट में भी फर्क पड़ेगा। चीनी के दाम घटकर 40 रुपये होने चाहिए।
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चरथावल व्यापार मंडल अध्यक्ष अनुज गर्ग का कहना है चीनी के भाव तेजी से बढ़ने के कारण व्यापारियों और ग्राहक, दोनों को नुकसान हुआ है। उन्होंने पहले महंगे दाम पर चीनी खरीदी, फिर रेट कम होने से शुरू हो गए। इससे घाटा होना स्वाभाविक है। दाम बढ़े तो आपूर्ति कम हो गई। पर्याप्त मात्रा में चीनी नहीं बिकी। अब अचानक रेट गिरने से नुकसान हो गया। सरकार को भाव स्थिर करना चाहिए ताकि ग्राहक और व्यापारियों को नुकसान होने से निजात मिले।
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-फैक्टरी मालिकों का किया भुगत रहे चीनी के थोक व्यापारी
नई मंडी में चीनी के थोक कारोबारी अतुल मूंदड़ा का कहना है कि चीनी के भाव में तेजी के दौरान जिन व्यापारियों ने ऊंचे दाम पर माल खरीदा था, उनके लिए मौजूदा गिरावट परेशानी का कारण बन गई है। थोक चीनी के दामों में 20 प्रतिशत की गिरावट आ गई है। इस स्थिति के लिए चीनी मिल मालिक जिम्मेदार हैं, जबकि भुगतना चीनी के थोक व्यापारियों को पड़ रहा है।
-चीनी की खपत और बिक्री पर भी असर होने की आशंका
चीनी के थोक कारोबारी शुभम मित्तल का कहना है कि चीनी के दाम में उतार-चढ़ाव से थोक बाजार में खरीद-बिक्री का संतुलन प्रभावित होता है। कारोबारी कम मात्रा में खरीद कर बाजार की दिशा भांप रहे हैं। वहीं जिन व्यापारियों के पास पुराना स्टॉक है, वे भी जल्दबाजी में माल निकालने के बजाय भाव स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं।