{"_id":"669c2806346cb98d2703b4d7","slug":"kanwariyas-relieve-their-fatigue-on-the-platforms-of-muslims-muzaffarnagar-news-c-29-1-mng1001-126548-2024-07-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Muzaffarnagar News: मुस्लिमों के चबूतरों पर थकान उतारते हैं कांवड़िए","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Muzaffarnagar News: मुस्लिमों के चबूतरों पर थकान उतारते हैं कांवड़िए
विज्ञापन
फोटो समेत
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं। मुस्लिम आबादी की अधिकता वाले बझेड़ी, सांझक और तावली के बीच से होकर कांवड़ यात्रा गुजरती हैं। कांवड़िए दुकानों से खरीदारी करते हैं और यहां लोगो के चबूतरों पर अपनी थकान उतारने भी नजर आते हैं। मार्ग के दोनों ओर कांवड़ यात्रा देखने के लिए शाम के समय लोग चारपाई डालकर बैठते हैं।
दिल्ली-दून हाईवे से बझेड़ी होते हुए कांवड़िए आगे बढ़ते हैं। बझेड़ी मुस्लिम समाज का प्रमुख गांव है। कांवड़िए यहां घरों के बाहर आराम करते नजर आते हैं। अंडरपास के निकट मंदिर में बड़े शिविर का संचालन होता है। इसके बाद शहर में कच्ची सड़क के बड़े हिस्से में मुस्लिम आबादी है।
सैफी एकता संगठन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांझक निवासी मुस्तकीम सैफी कहते हैं कि इस फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा। हमारे गांव में हिंदू-मुस्लिम मिलकर कांवड़ियों की सेवा करते हैं। कांवड़िए भी मुस्लिम भाइयों के चबूतरे पर विश्राम करते हैं।
विज्ञापन
किराना व्यापारी सांझक निवासी अरशद ने बताया कि बोर्ड पर नाम लिखने में हमें कोई परेशानी नहीं है। हमारी दुकान से कांवड़ियां सामान ले रहे हैं। लेकिन यह फैसला दूरी बढ़ने का ही काम करेगा।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- --
आदेश के पालन में बुराई नहीं, भावना सही हो
तावली के पूर्व प्रधान जुबेर अहमद ने बताया कि प्रशासन के आदेश का दुकानदारों को पालन करना चाहिए, इसमें कोई बुराई नहीं है। जिसको सामान लेना है, वह ले सकता है। जिसको नहीं लेना है, वह मत लें। समाज में इसेे अच्छा संदेश नहीं जाएगा। गांव तावली निवासी मुजम्मिल मिठाई की दुकान चलाते हैं। उन्होंने कहा कि हमने दुकान पर बोर्ड लगा दिया है। हमें इस फैसले से कोई परेशानी नहीं है हमारी दुकान पर रोज कांवड़ियां पहुंच रहे हैं।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। हरिद्वार से गंगाजल लेकर कांवड़िए शिवालयों की ओर बढ़ने लगे हैं। मुस्लिम आबादी की अधिकता वाले बझेड़ी, सांझक और तावली के बीच से होकर कांवड़ यात्रा गुजरती हैं। कांवड़िए दुकानों से खरीदारी करते हैं और यहां लोगो के चबूतरों पर अपनी थकान उतारने भी नजर आते हैं। मार्ग के दोनों ओर कांवड़ यात्रा देखने के लिए शाम के समय लोग चारपाई डालकर बैठते हैं।
दिल्ली-दून हाईवे से बझेड़ी होते हुए कांवड़िए आगे बढ़ते हैं। बझेड़ी मुस्लिम समाज का प्रमुख गांव है। कांवड़िए यहां घरों के बाहर आराम करते नजर आते हैं। अंडरपास के निकट मंदिर में बड़े शिविर का संचालन होता है। इसके बाद शहर में कच्ची सड़क के बड़े हिस्से में मुस्लिम आबादी है।
विज्ञापन
सैफी एकता संगठन के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सांझक निवासी मुस्तकीम सैफी कहते हैं कि इस फैसले से समाज में गलत संदेश जाएगा। हमारे गांव में हिंदू-मुस्लिम मिलकर कांवड़ियों की सेवा करते हैं। कांवड़िए भी मुस्लिम भाइयों के चबूतरे पर विश्राम करते हैं।
विज्ञापन
किराना व्यापारी सांझक निवासी अरशद ने बताया कि बोर्ड पर नाम लिखने में हमें कोई परेशानी नहीं है। हमारी दुकान से कांवड़ियां सामान ले रहे हैं। लेकिन यह फैसला दूरी बढ़ने का ही काम करेगा।
आदेश के पालन में बुराई नहीं, भावना सही हो
तावली के पूर्व प्रधान जुबेर अहमद ने बताया कि प्रशासन के आदेश का दुकानदारों को पालन करना चाहिए, इसमें कोई बुराई नहीं है। जिसको सामान लेना है, वह ले सकता है। जिसको नहीं लेना है, वह मत लें। समाज में इसेे अच्छा संदेश नहीं जाएगा। गांव तावली निवासी मुजम्मिल मिठाई की दुकान चलाते हैं। उन्होंने कहा कि हमने दुकान पर बोर्ड लगा दिया है। हमें इस फैसले से कोई परेशानी नहीं है हमारी दुकान पर रोज कांवड़ियां पहुंच रहे हैं।