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विश्व मधुमेह दिवस...मासूमों को जकड़ रहा मधुमेह
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मुजफ्फरनगर। तेजी से फैल रही मधुमेह (डायबिटीज) की बीमारी न केवल बड़ी उम्र के लोगों वरन मासूम बच्चों को अपनी चपेट में ले रही है। स्थिति यह है कि पांच साल तक के कई मासूम भी इंसुलिन के सहारे जीवन जी रहे हैं। जिला अस्पताल में बने एनपीसीडीसीएस सेंटर में हर माह औसतन 70 नए मधुमेह रोगी सामने आ रहे हैं।
नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ डायबिटीज, कैंसर, कार्टियक डिजिज एंड स्ट्रॉक सेंटर (एनपीसीडीसीएस) के प्रभारी डा. एसके त्यागी बताते हैं कि बीते दो साल में सेंटर में 3747 मधुमेह रोगी पंजीकृत हुए हैं। यह स्थिति तो केवल इस सेंटर की है जबकि बहुत से मरीज जिला अस्पताल आते ही नहीं हैं। उनका अलग-अलग स्थानों पर उपचार चल रहा है। डा. त्यागी बताते हैं कि मधुमेह के लिए कोई आयु सीमा नहीं रह गई है। पांच-छह साल की आयु के तीन बच्चे प्रतिदिन इंसुलिन ले रहे हैं, जबकि 20 साल से कम आयु के आठ-दस मधुमेह रोगी हैं। ये टाइप-1 मधुमेह के शिकार हैं। इन बच्चों को जीवन भर इंसुलिन लेना होगा।
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करें योग और व्यायाम, शुगर में मिलेगा आराम
मुजफ्फरनगर। डा. एसके त्यागी बताते हैं कि मधुमेह से बचने के लिए जीवन शैली में बदलाव करना बेहद जरूरी है। हमें नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम आधे से एक घंटा व्यायाम करें। नियमित दिनचर्या एवं परहेज से ज्यादातर रोगियों की शुगर कंट्रोल हो जाती है। ग्रीन लैंड स्कूल में संचालित योग साधना केंद्र के प्रभारी सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि मधुमेह रोगियों के लिए योग बेहद कारगर है। टाइप-1 के मधुमेह रोगियों की शुगर भी योग के माध्यम से कंट्रोल हो जाती है। टाइप-2 के रोगी पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से कई शुगर के रोगी ठीक हुए हैं। अब ये रोगी सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुगर के मरीजों के लिए अर्धमत्स्येंद्रासन, योग मुद्रा, मंडूकासन तथा अन्य ऐसे योगासन लाभप्रद होते हैं, जिनसे पैंक्रियाज सक्रिय हो।
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शुगर से बचाव को दिनचर्या में करें बदलाव
- प्रतिदिन कम से कम आधे से एक घंटे तक व्यायाम करें
- फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन करें।
- वजन को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
- तनाव कम करें। इसके लिए योग एवं ध्यान करें।
- शुगर के लक्षण नजर आने पर तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
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नेशनल प्रोग्राम फॉर कंट्रोल ऑफ डायबिटीज, कैंसर, कार्टियक डिजिज एंड स्ट्रॉक सेंटर (एनपीसीडीसीएस) के प्रभारी डा. एसके त्यागी बताते हैं कि बीते दो साल में सेंटर में 3747 मधुमेह रोगी पंजीकृत हुए हैं। यह स्थिति तो केवल इस सेंटर की है जबकि बहुत से मरीज जिला अस्पताल आते ही नहीं हैं। उनका अलग-अलग स्थानों पर उपचार चल रहा है। डा. त्यागी बताते हैं कि मधुमेह के लिए कोई आयु सीमा नहीं रह गई है। पांच-छह साल की आयु के तीन बच्चे प्रतिदिन इंसुलिन ले रहे हैं, जबकि 20 साल से कम आयु के आठ-दस मधुमेह रोगी हैं। ये टाइप-1 मधुमेह के शिकार हैं। इन बच्चों को जीवन भर इंसुलिन लेना होगा।
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करें योग और व्यायाम, शुगर में मिलेगा आराम
मुजफ्फरनगर। डा. एसके त्यागी बताते हैं कि मधुमेह से बचने के लिए जीवन शैली में बदलाव करना बेहद जरूरी है। हमें नियमित रूप से व्यायाम करना चाहिए। प्रतिदिन कम से कम आधे से एक घंटा व्यायाम करें। नियमित दिनचर्या एवं परहेज से ज्यादातर रोगियों की शुगर कंट्रोल हो जाती है। ग्रीन लैंड स्कूल में संचालित योग साधना केंद्र के प्रभारी सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि मधुमेह रोगियों के लिए योग बेहद कारगर है। टाइप-1 के मधुमेह रोगियों की शुगर भी योग के माध्यम से कंट्रोल हो जाती है। टाइप-2 के रोगी पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि नियमित योगाभ्यास से कई शुगर के रोगी ठीक हुए हैं। अब ये रोगी सामान्य जिंदगी जी रहे हैं। उन्होंने बताया कि शुगर के मरीजों के लिए अर्धमत्स्येंद्रासन, योग मुद्रा, मंडूकासन तथा अन्य ऐसे योगासन लाभप्रद होते हैं, जिनसे पैंक्रियाज सक्रिय हो।
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शुगर से बचाव को दिनचर्या में करें बदलाव
- प्रतिदिन कम से कम आधे से एक घंटे तक व्यायाम करें
- फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का ज्यादा सेवन करें।
- वजन को नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।
- तनाव कम करें। इसके लिए योग एवं ध्यान करें।
- शुगर के लक्षण नजर आने पर तुरंत योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।