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एसटीएफ का छापा, एमबीबीएस के दो छात्र गिरफ्तार

Tue, 20 Mar 2018 12:22 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर।
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर। Updated Tue, 20 Mar 2018 12:22 AM IST
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STF raid, two MBBS students arrested
raid - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
मंसूरपुर/मेरठ। सीसीएसयू में एमबीबीएस छात्रों की उत्तर पुस्तिकाएं बदलने के मामले में एसटीएफ मेरठ ने सोमवार को मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज बेगराजपुर में छापा मारकर एमबीबीएस द्वितीय वर्ष के दो छात्रों को गिरफ्तार कर लिया। इन दोनों की कॉपियों पर ही एसटीएफ ने मुकदमा दर्ज कराया था। वहीं फरार अन्य कर्मचारियों की तलाश में भी मेरठ और अलीगढ़ में दबिश दी गई।
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एसपी एसटीएफ आलोक प्रियदर्शी के अनुसार एमबीबीएस की दोनों कॉपियां एफआईआर में शामिल की गई हैं। दोनों कॉपियां आयुष पुत्र डॉ. सुनील कुमार निवासी पानीपत और स्वर्णजीत पुत्र यशवीर निवासी संधाली जिला संगरूर, पंजाब के नाम की थीं। एसटीएफ के इंस्पेक्टर राकेश कुमार के नेतृत्व में टीम ने मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज पहुंचकर जांच के साथ प्रबंध तंत्र से पूछताछ की। सोमवार को दोनों छात्रों की परीक्षा थी। दोनों छात्रों को कस्टडी में लेकर उनकी परीक्षा दिलाने के बाद टीम उन्हें लेकर मेरठ पहुंच गई।
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आयुष के पिता हैं वरिष्ठ डॉक्टर
एसटीएफ के एसपी ने बताया कि आयुष के पिता डॉ. सुनील कुमार हृदय रोग विशेषज्ञ हैं। कुछ दिन पहले वे गुड़गांव के एक अस्पताल में डॉक्टर थे। पूछताछ में आयुष और सुनील कुमार ने बताया कि सीसीएसयू का का छात्रनेता कविराज चार साल से उनका मित्र था। उन्होंने कॉपी बदलवाने के लिए कभी नहीं कहा था। लेकिन कविराज उनके घर तक भी जुड़ा हुआ था। छात्रनेता कविराज का दोनों छात्रों के परिजनों के यहां भी आना-जाना था। 15 मार्च को ही कविराज ने कहा था कि वह खाली कॉपी देें, नंबर अच्छे आ जाएंगे। कविराज के झांसे में दोनों छात्र फंस गए।
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वहीं, एमबीबीएस के दोनों छात्रों ने पूछताछ में बताया कि अंबाला निवासी संदीप की बेटी मुजफ्फरनगर के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई कर रही है। कुछ दिन से संदीप लगातार कहता था कि वह उन्हें अच्छे नंबर दिलवाएगा। संदीप ने ही उनकी कांपियों में खेल कराकर फंसाया है। दोनों छात्रों ने यह भी कहा कि संदीप ने अपनी बेटी की कॉपी क्यों नहीं बदलवायी। हालांकि संदेह के घेरे में आई इस छात्रा को एसटीएफ ने फिलहाल छोड़ दिया है, जबकि जांच सूची में इसका नाम भी दर्ज कर लिया है।

कॉलेज का कोई हाथ नहीं : गौरव स्वरूप
कॉलेज के कोषाध्यक्ष गौरव स्वरूप ने बताया कि उत्तर पुस्तिका कांड में कॉलेज का कोई हाथ नहीं है। दोषी लोगों पर कार्रवाई की जाए। छात्रा की प्रथम व द्वितीय वर्ष में सप्लीमेंट्री आई है। अगर वह दूसरों को पास कराती तो अपने आप भी पास हो जाती। हां, इन छात्रों ने जरूर पास होने के नाम पर गिरोह को पैसे दिए होंगे। पूरे गैंग का खुलासा होना चाहिए। उधर, एसटीएफ इंस्पेक्टर राकेश कुमार ने बताया कि केस में एक छात्रा का नाम भी सामने आ रहा था। लेकिन इसमें छात्रा का कोई रोल नहीं पाया गया है।

पास आउट रईसजादे रडार पर, देते थे मोटी रकम
मुजफ्फरनगर। एमबीबीएस कॉपी कांड के तार व्यापमं घोटाले की तर्ज पर फैले हैं। व्यापमं में एडमिशन में खेल निकला था, इसमें एडमिशन के बाद पास कराने का भंडाफोड़ हुआ है। मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर के अलावा बिजनौर, सहारनपुर तक इस खेल के तार जुड़े मिले हैं।

उत्तरपुस्तिका कांड में आरोपियों के टारगेट रईसजादे रहते थे, जिनकी कापियों में सवालों के उत्तर लिखने की एवज में मोटी रकम हथियाई जाती थी। एमबीबीएस में एडमिशन के लिए बड़ी रकम खर्च होती है। हालांकि प्रथम वर्ष में दाखिले के लिए 18 से 20 लाख रुपये लगते हैं, लेकिन कोर्स को पूरा करने में एक छात्र को करीब 60 से 70 लाख रुपये खर्च करने पड़ते हैं। हालांकि प्राइवेट कालेजों का भी सीधा टारगेट डोनेशन वालों को दाखिला देना प्राथमिकता रहती है।

एसटीएफ की पकड़ में आए बिजनौर के आरोपी कविराज ने कई राज खोले हैं। यह गिरोह रईसजादों को अपना शिकार बनाते हैं, जिन्हें पास कराने में मोटी रकम हाथ लगती है। एसटीएफ इस पूरे खेल की असल जड़ तक पहुंचने में जुटी है। दो पेज लिखने की एवज में 50 हजार रुपये तक लिए गए हैं। इस प्रकरण में कालेजों से पास आउट एमबीबीएस छात्र और सीनियर विद्यार्थी भी जुड़े बताए गए हैं। गिरोह की गुत्थी सहारनपुर, बिजनौर, गाजियाबाद तक जुड़े होने का अनुमान है। ब्यूरो

पिछले चार साल का रिकार्ड खंगाल रही टीम
मुजफ्फरनगर। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से वेस्ट में कई मेडिकल कालेज संबद्ध है, जिनमें प्रतिवर्ष एडमिशन से लेकर परीक्षा, रिजल्ट की जिम्मेदारी है। ताज्जुब यह है परीक्षाएं बार कोडिंग के माध्यम से होती है। प्रत्येक कॉपी बार कोड अंकित है। ऐसे में खेल को अंजाम  देने के लिए आरोपियों ने जो चक्रव्यूह रचा हुआ था, उसकी भनक किसी को नहीं थी।

एक कॉपी में अलग-अलग हैंड राइटिंग होना संदेह दिखाता है। एसटीएफ ने उत्तरपुस्तिकाएं बदले जाने का भंडाफोड़ किया है। जांच में जो तथ्य सामने आए हैं। वह चौंका इसलिए रहे हैं कि मूल्यांकन की जिम्मेदारी विश्वविद्याल की होती है। एसटीएफ जिन छात्रों, लोगों को इसमें पकड़ रही है।


उनकी हैंड राइटिंग की जांच हो रही है। बेगराजपुर स्थित मुजफ्फरनगर मेडिकल कालेज के दो छात्रों को भी इस बाबत एसटीएफ ने उठाया है। इनका दोष भी हैंड राइटिंग की जांच के बाद साफ होगा। एसटीएफ द्वारा विवि से जुड़े मेडिकल कालेजों में पिछले चार साल का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। इन में एमबीबीएस रिजल्ट का कुल प्रतिशत आंकड़ा भी जांचा जाएगा। एसटीएफ इस बात की तस्दीक करने में लगी है कि चार साल पहले इन कालेजों का रिजल्ट प्रतिशत कितना था, कॉपी कांड के बाद कितना बढ़ा है। एसटीएफ हैंड राइटिंग में इसकी असल जड़ तलाश कर रही है। ब्यूरो

 
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