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पीड़ित परिवार बोला,  हमें अदालत से इंसाफ मिला       

अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर Updated Wed, 24 May 2017 12:44 AM IST
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पीड़ित परिवार के लोग।
पीड़ित परिवार के लोग। - फोटो : अमर उजाला

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दादा रियासत और पोते आजाद उर्फ राजा की हत्या में अभियुक्तों को मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के फैसले से पीड़ित पक्ष संतुष्ट है। पीड़ित पक्ष ने कहा कि उन्हें खुदा पर भरोसा था और कोर्ट पर भी पूरा विश्वास था। अदालत से हमें न्याय मिला है।      
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मंगलवार को कोर्ट का निर्णय आना था, इसलिए बच्चों से लेकर महिलाएं तक सुबह से कुरान शरीफ पढ़ रहे थे। खुदा से न्याय मिलने की दुआएं कर रहे थे। जैसे ही परिजनों को पता चला कि हत्यारोपियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है, तो परिजनों ने खुदा का शुक्रिया अदा किया। आजाद के पिता मोहम्मद आलिम, मां समरजहां उर्फ सम्मो, दादी खैरुनिशा, छोटे भाई मुनव्वर उर्फ मोनू तथा छोटी बहन नेहा रानी का कहना है कि अदालत का फैसला छह साल छह माह 14 दिन बाद आया है।


उन्हें अदालत पर पहले से ही भरोसा था। दूसरे खुदा पर पूरा भरोसा था। दूध का दूध, पानी का पानी हुआ है। उन्हें कोर्ट से न्याय मिला है। घर पर मंगलवार को सुबह से ही बच्चे कुरान पढ़ रहे थे। दोहरे हत्याकांड में पिता-पुत्र को फांसी की सजा सुनाए जाने से पूरे गांव में उक्त मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।  उधर, फांसी की सजा पाने वालों के मकान का दरवाजा बंद था। बारिक की पत्नी और परिजन मुजफ्फरनगर गए हुए थे।      

बकरीद पर घर आया हुआ था आजाद      
बरला में हुए दोहरे हत्याकांड में मौत के घाट उतार दिया गया आजाद उर्फ राजा बकरीद पर अपने घर आया था। उसे दादा रियासत से बेहद लगाव था। बेटे और पिता की हत्या होने से मोहम्मद आलिम के परिवार पर गमा का पहाड़ टूटा था। बरला निवासी मोहम्मद आलिम का बड़ा बेटा आजाद उर्फ राजा एमबीए का छात्र था, जो हरियाणा के यमुनानगर जिले के जगादरी में नेशनल पॉलीटेक्निक कॉलेज में पढ़ रहा था, जिस कारण वह कम ही गांव आता था।

वह वारदात के तीन दिन पहले ही बकरीद मनाने अपने घर आया था। ईद-उल-अजहा मनाने के बाद वह तुरंत वापस कॉलेज जाना चाहता था, मगर वह काफी दिनों बाद घर आया, तो दादा रियासत ने उसे कुछ दिन और ठहरने को कह दिया था, क्योंकि मेहमान आ-जा रहे थे। दादा से बेहद लगाव के कारण वह दादा की बात नहीं टाल सका। वारदात के दिन वह दादा की मदद करने के लिए ही जंगल में पापुलर के पत्ते एकत्र करने गया था, तभी हमलावरों ने आकर धारदार हथियारों से हमला कर आजाद उर्फ राजा और दादा रियासत की हत्या कर दी।

बेटे और पिता की हत्या से मौहम्मद आलिम और परिजनों पर गमों का पहाड़ टूट गया। हमले में घायल होने के कारण छोटे बेटे मुनव्वर उर्फ मोनू की पढ़ाई भी बीच में छूट गई। वह इंजीनियर बनना चाहता था। दोहरे हत्याकांड के बाद परिवार का आर्थिक तंगी का भी सामना करना पड़ा। आज मोहम्मद आलिम गाड़ी चला कर परिवार का भरण-पोषण कर रहा है।  

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