भाई को मंजूर नहीं था आंचल का प्रेम
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मंसूरपुर की रेल लाइन के पास बस्ती निवासी युुवती आंचल का गली के ही रहने वाले युवक अरुण से पिछले डेढ़ साल से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों ही परिवार मजदूरी करते हैं। अरुण वाल्मीकि समाज से और आंचल के प्रजापति बिरादरी की होने की वजह से दोनों के घरवाले इस रिश्ते के खिलाफ थे। परिजनों के काम पर चले जाने के बाद अक्सर अरुण और आंचल में मिलना-जुलना हो जाता था। कुछ दिनों बाद परिजनों को इसका पता चला तो बखेड़ा हो गया।
फिर भी प्रेमी युगल ने मिलना-जुलना बंद नहीं किया। आंचल के भाई कृष्ण ने अपने दोस्त काजू से संपर्क किया। काजू ने भी अरुण पर उसकी बहन पर नजर रखने की बात कही।
दोनों ने अरुण को ठिकाने लगाने की साजिश रची। कृष्णा ने अपनी बहन को खतौली के खानपुर में अपने मामा के यहां भेज दिया। इस बीच भी आंचल और अरुण के बीच फोन पर बातचीत जारी रही। अरुण उससे मिलने के लिए भी वहां आने-जाने लगा।
दस अप्रैल को आरोपी ने आंचल को डरा-धमकाकर अरुण को बुलाने के लिए फोन कराया।
अरुण खानपुर के लिए निकला तो रास्ते में बहाने से कृष्ण और काजू ने उसे अपनी बाइक पर बैठा लिया। दोनों उसे लेकर खतौली में रेलवे के लोहे के पुल के पास पहुंचे और गला दबाकर अरुण की हत्या कर शव को गंगनहर में फेंक दिया। पुलिस के मुताबिक एकाएक अरुण के गायब होने पर प्रेमिका आंचल ने हंगामा खड़ा कर दिया और प्रेमी से मिलने की जिद करने लगी। उसकी पिटाई तक की गई, लेकिन उसने अरुण से मिलने की जिद नहीं छोड़ी। दोनों हत्यारोपियों को लगा कि अब मामला खुल सकता है। इस पर दोनों ने आंचल की भी हत्या करने का फैसला कर लिया।