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लद्दावाला का शाहनवाज हत्याकांड
Updated Sat, 13 Oct 2018 12:07 AM IST
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दो हत्यारों को आजीवन कारावास
मुजफ्फरनगर। अदालत ने विवाहेतर संबंध में बाधक बने पति की प्रेमी के साथ मिलकर हत्या करने वाली महिला और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास के साथ जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेेज दिया गया। आठ साल पहले यह सनसनीखेज वारदात हुई थी।
शहर कोतवाली पर क्षेत्र के मोहल्ला लद्धावाला निवासी मोहम्मद इस्लाम पुत्र इकबाल ने 15 जून 2010 को अपने भाई की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसका भाई शाहनवाज मोहल्ला लद्धावाला में दुकान करता था। दुकान के ऊपर ही निवास बनाया हुआ है । शाहनवाज की दुकान पर रिजवान नौकरी करता था। रिजवान के शाहनवाज की पत्नी रहीसा के साथ विवाहेतर संबंध बन गए, जिसमें शाहनवाज बाधक था। इस बाधा को हटाने के लिए रहीसा ने अपने प्रेमी रिजवान के साथ 15 जून को 2010 को शाहनवाज की चाकू से गला काट कर हत्या कर उसका शव बोरे में भर कर दुकान के गोदाम में छिपा दिया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार की अदालत संख्या- 4 में हुई । एडीजीसी विजयपाल सिंह वर्मा ने कोर्ट में सात गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त रहीसा व रिजवान को शाहनवाज की हत्या का दोषी करार देते हुए धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपया का जुर्माना , धारा 201 के तहत सात-सात वर्ष का कठोर कारावास एवं दो-दो हजार रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
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मुजफ्फरनगर। अदालत ने विवाहेतर संबंध में बाधक बने पति की प्रेमी के साथ मिलकर हत्या करने वाली महिला और उसके प्रेमी को आजीवन कारावास के साथ जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेेज दिया गया। आठ साल पहले यह सनसनीखेज वारदात हुई थी।
शहर कोतवाली पर क्षेत्र के मोहल्ला लद्धावाला निवासी मोहम्मद इस्लाम पुत्र इकबाल ने 15 जून 2010 को अपने भाई की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। बताया था कि उसका भाई शाहनवाज मोहल्ला लद्धावाला में दुकान करता था। दुकान के ऊपर ही निवास बनाया हुआ है । शाहनवाज की दुकान पर रिजवान नौकरी करता था। रिजवान के शाहनवाज की पत्नी रहीसा के साथ विवाहेतर संबंध बन गए, जिसमें शाहनवाज बाधक था। इस बाधा को हटाने के लिए रहीसा ने अपने प्रेमी रिजवान के साथ 15 जून को 2010 को शाहनवाज की चाकू से गला काट कर हत्या कर उसका शव बोरे में भर कर दुकान के गोदाम में छिपा दिया था। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मुकदमे की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार की अदालत संख्या- 4 में हुई । एडीजीसी विजयपाल सिंह वर्मा ने कोर्ट में सात गवाह और सबूत पेश किए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनते हुए अभियुक्त रहीसा व रिजवान को शाहनवाज की हत्या का दोषी करार देते हुए धारा 302/34 के तहत आजीवन कारावास एवं पांच-पांच हजार रुपया का जुर्माना , धारा 201 के तहत सात-सात वर्ष का कठोर कारावास एवं दो-दो हजार रुपये का जुर्माना की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों को जेल भेज दिया गया।
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