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Muzaffarnagar News: सांडर्स की हत्या के बाद अभय देव से मिले थे भगत सिंह
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आचार्य अभय देव का फाइल फोटो।
- योगी अभयदेव की ‘एक योग यात्री’ पांडुलिपि में दोनों की मुलाकात का जिक्र
- चरथावल में जन्मे थे योगी अभय देव, गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार में पढ़ाया
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। चरथावल कसबे में जन्मे और अरविंद निकेतन आश्रम की स्थापना करने वाले योगी अभय देव और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बीच आत्मीय रिश्ता रहा। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार में दोनों के बीच कई मुलाकात भी हुई। एक योग यात्री पुस्तिका में दोनों के बीच मुलाकात का जिक्र है। सांडर्स की हत्या के कुछ दिन बाद भगत सिंह ने आचार्य अभय देव से मुलाकात की थी।
लाहौर षड्यंत्र केस में 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई थी। चरथावल में अरविंद निकेतन के संस्थापक वेदमनीषी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य अभय देव से भगत सिंह की कई मुलाकातें हुई थी। वर्ष 1967 में अभयदेव की ‘एक योग यात्री’ की पांडुलिपि में दोनों की मुुलाकातों का जिक्र है। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार में शिक्षार्थी से लेकर आचार्य तक के सफ़र में उनकी सरदार भगत सिंह से कई मुलाकातें हुई।
भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त भी गुरुकुल में अभय देव से मिलते थे और वहां रहे भी। आचार्य अभयदेव ने साहित्य में जिक्र किया कि एक बार हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद प्लेटफॉर्म पर भगत सिंह मिल गए। क्रांतिकारी नौजवान ने उन्हें आचार्य को न कुली करने दिया और न ही बिस्तर उठाने दिया। 5-7 मील स्टेशन से गुरुकुल तक पैदल ही वह अभयदेव का बिस्तर लेकर साथ चले।
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इस तरह हुई थी पहली मुलाकात
आचार्य अभय देव ने लिखा कि सर्दी का वक्त था, वर्ष 1928 का वाकया है। स्वामी श्रद्धानंद के बराबर के बड़े कमरे में मैं रहता था। पगड़ी पहने एक नौजवान ने एकांत में मुझसे मिलने की इच्छा प्रकट की। बातचीत प्रारम्भ करते ही उसने बताया कि मैं भगत सिंह हूं। उस पहली मुलाकात के बाद आपसी स्नेह बढ़ गया। यह भेंट लाहौर में अंग्रेज पुलिस अफसर सांडर्स को मारने के बाद हुई थी।
फ्रेंच रिवोल्युशन पढ़ते थे भगत सिंह
भगत सिंह पढ़ने के शौकीन थे। उनकी कमीज की जेब में गुटका साइज फ्रेंच ‘रिवोल्युशन’ नामक पुस्तक मैंने एक दो बार देखी। एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि आपकी योग विद्या मेरे तो किसी काम की नहीं है, परंतु एक योग अवश्य सीखना चाहता हूं। मुझे कोई ऐसा योगाभ्यास बता दीजिए, जिससे कि अंग्रेज मेरे अंदर की कोई भी बात मुझसे नहीं उगलवा सकें।
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ऐसे थे आचार्य अभय देव
कस्बे के राम प्रसाद त्यागी और हरि कुंवर के आर्य समाजी परिवार में उनका आचार्य अभय देव का जन्म हुआ था। पांच साल की अल्पायु में उनकी मां चल बसी। उनके बचपन का नाम देव शर्मा था। आठ साल की उम्र में हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी में प्रवेश दिलाया गया। उस वक्त महात्मा मुंशीराम (स्वामी श्रद्धानंद) गुरुकुल के आचार्य थे। उन्हीं की शिक्षा-दीक्षा में वह वेद मनीषी बने और योग साधक भी।
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- चरथावल में जन्मे थे योगी अभय देव, गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार में पढ़ाया
अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। चरथावल कसबे में जन्मे और अरविंद निकेतन आश्रम की स्थापना करने वाले योगी अभय देव और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बीच आत्मीय रिश्ता रहा। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार में दोनों के बीच कई मुलाकात भी हुई। एक योग यात्री पुस्तिका में दोनों के बीच मुलाकात का जिक्र है। सांडर्स की हत्या के कुछ दिन बाद भगत सिंह ने आचार्य अभय देव से मुलाकात की थी।
लाहौर षड्यंत्र केस में 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी दे दी गई थी। चरथावल में अरविंद निकेतन के संस्थापक वेदमनीषी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आचार्य अभय देव से भगत सिंह की कई मुलाकातें हुई थी। वर्ष 1967 में अभयदेव की ‘एक योग यात्री’ की पांडुलिपि में दोनों की मुुलाकातों का जिक्र है। गुरुकुल कांगड़ी हरिद्वार में शिक्षार्थी से लेकर आचार्य तक के सफ़र में उनकी सरदार भगत सिंह से कई मुलाकातें हुई।
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भगत सिंह के साथी बटुकेश्वर दत्त भी गुरुकुल में अभय देव से मिलते थे और वहां रहे भी। आचार्य अभयदेव ने साहित्य में जिक्र किया कि एक बार हरिद्वार रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतरने के बाद प्लेटफॉर्म पर भगत सिंह मिल गए। क्रांतिकारी नौजवान ने उन्हें आचार्य को न कुली करने दिया और न ही बिस्तर उठाने दिया। 5-7 मील स्टेशन से गुरुकुल तक पैदल ही वह अभयदेव का बिस्तर लेकर साथ चले।
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इस तरह हुई थी पहली मुलाकात
आचार्य अभय देव ने लिखा कि सर्दी का वक्त था, वर्ष 1928 का वाकया है। स्वामी श्रद्धानंद के बराबर के बड़े कमरे में मैं रहता था। पगड़ी पहने एक नौजवान ने एकांत में मुझसे मिलने की इच्छा प्रकट की। बातचीत प्रारम्भ करते ही उसने बताया कि मैं भगत सिंह हूं। उस पहली मुलाकात के बाद आपसी स्नेह बढ़ गया। यह भेंट लाहौर में अंग्रेज पुलिस अफसर सांडर्स को मारने के बाद हुई थी।
फ्रेंच रिवोल्युशन पढ़ते थे भगत सिंह
भगत सिंह पढ़ने के शौकीन थे। उनकी कमीज की जेब में गुटका साइज फ्रेंच ‘रिवोल्युशन’ नामक पुस्तक मैंने एक दो बार देखी। एक बार उन्होंने मुझसे कहा कि आपकी योग विद्या मेरे तो किसी काम की नहीं है, परंतु एक योग अवश्य सीखना चाहता हूं। मुझे कोई ऐसा योगाभ्यास बता दीजिए, जिससे कि अंग्रेज मेरे अंदर की कोई भी बात मुझसे नहीं उगलवा सकें।
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ऐसे थे आचार्य अभय देव
कस्बे के राम प्रसाद त्यागी और हरि कुंवर के आर्य समाजी परिवार में उनका आचार्य अभय देव का जन्म हुआ था। पांच साल की अल्पायु में उनकी मां चल बसी। उनके बचपन का नाम देव शर्मा था। आठ साल की उम्र में हरिद्वार के गुरुकुल कांगड़ी में प्रवेश दिलाया गया। उस वक्त महात्मा मुंशीराम (स्वामी श्रद्धानंद) गुरुकुल के आचार्य थे। उन्हीं की शिक्षा-दीक्षा में वह वेद मनीषी बने और योग साधक भी।

आचार्य अभय देव का फाइल फोटो।