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Muzaffarnagar News: औषधीय खेती करने में दिलचस्पी ले रहे दूधली के किसान
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दूधली के उदय की बागवानी में बादाम के पेड़ पर आया फूल
गन्ने और गेहूं के साथ डेढ़ बीघा जमीन में औषधीय खेती कर रहे उदय सिंह पुंडीर
औषधीय पौधों से खुद की शुगर सामान्य करने का किया दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। दूधली के किसान उदय सिंह पुंडीर को जैविक विधि से रोग मुक्त खेती करना उनका शौक है। परंपरागत खेती गन्ने और गेहूं के साथ डेढ़ बीघा जमीन में उनकी पहल ग्रामीणों के लिए मिसाल बनी है। कहना है कि हर किसान को कीटनाशक से बचकर कुछ भूमि में स्वदेशी तकनीक से सब्जी और फल उगाना चाहिए।
किसान उदय पुंडीर कहते है बाग में सहजन और परिजात (हार सिंगार) के पेड़ लगाए है। उनके पत्तों को सुखाने के बाद चाय के रूप में पीने से उनकी शुगर लेवल सामान्य रहने लगी। वह हर सब्जी खुद उगाकर घर में उपयोग करते है। बाग में बादाम के अलावा अमरूद, आम, नींबू, आडू के पेड़ लगाए है। औषधीय पौधों में काला बांसा, तेजपत्ता, मरूआ, पोदीना की पैदावार अच्छी खासी करते है। गांव के बच्चे बाग में घूमने आते है और फलों का लुत्फ उठाते हैं। रिश्तेदार भी सीजनल सब्जी और फल का स्वाद लेते है।
बादाम के पेड़ पर पहली बार फूल आने से गदगद
किसान उदय सिंह पुंडीर तीन साल पहले हरियाणा के कुरूक्षेत्र के उचाना गांव में भ्रमण करने गए थे। वहां बादाम का पूरा बाग देखा तो उसकी खेती करने को लालायित हो गए। उसी साल हापुड़ नर्सरी से कैलिफॉर्निया किस्म का बादाम का एक पेड़ अपनी बागवानी में लाकर प्रयोग के रूप लगाया था। वर्तमान में पेड़ फूलों से महका तो बादाम आने को लेकर परिजन उत्साहित हो गए। वे 30 भूमि के स्वामी है। साढ़े 28 बीघा में ईख और गन्ना बोते है। सिर्फ डेढ़ बीघा में औषधीय पौधों को लगाकर प्रकृति के नजदीक रहते है।
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औषधीय पौधों से खुद की शुगर सामान्य करने का किया दावा
संवाद न्यूज एजेंसी
चरथावल (मुजफ्फरनगर)। दूधली के किसान उदय सिंह पुंडीर को जैविक विधि से रोग मुक्त खेती करना उनका शौक है। परंपरागत खेती गन्ने और गेहूं के साथ डेढ़ बीघा जमीन में उनकी पहल ग्रामीणों के लिए मिसाल बनी है। कहना है कि हर किसान को कीटनाशक से बचकर कुछ भूमि में स्वदेशी तकनीक से सब्जी और फल उगाना चाहिए।
किसान उदय पुंडीर कहते है बाग में सहजन और परिजात (हार सिंगार) के पेड़ लगाए है। उनके पत्तों को सुखाने के बाद चाय के रूप में पीने से उनकी शुगर लेवल सामान्य रहने लगी। वह हर सब्जी खुद उगाकर घर में उपयोग करते है। बाग में बादाम के अलावा अमरूद, आम, नींबू, आडू के पेड़ लगाए है। औषधीय पौधों में काला बांसा, तेजपत्ता, मरूआ, पोदीना की पैदावार अच्छी खासी करते है। गांव के बच्चे बाग में घूमने आते है और फलों का लुत्फ उठाते हैं। रिश्तेदार भी सीजनल सब्जी और फल का स्वाद लेते है।
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बादाम के पेड़ पर पहली बार फूल आने से गदगद
किसान उदय सिंह पुंडीर तीन साल पहले हरियाणा के कुरूक्षेत्र के उचाना गांव में भ्रमण करने गए थे। वहां बादाम का पूरा बाग देखा तो उसकी खेती करने को लालायित हो गए। उसी साल हापुड़ नर्सरी से कैलिफॉर्निया किस्म का बादाम का एक पेड़ अपनी बागवानी में लाकर प्रयोग के रूप लगाया था। वर्तमान में पेड़ फूलों से महका तो बादाम आने को लेकर परिजन उत्साहित हो गए। वे 30 भूमि के स्वामी है। साढ़े 28 बीघा में ईख और गन्ना बोते है। सिर्फ डेढ़ बीघा में औषधीय पौधों को लगाकर प्रकृति के नजदीक रहते है।

दूधली के उदय की बागवानी में बादाम के पेड़ पर आया फूल

दूधली के उदय की बागवानी में बादाम के पेड़ पर आया फूल

दूधली के उदय की बागवानी में बादाम के पेड़ पर आया फूल
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