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ओबीसी के वर्गीकरण का स्वागत किया
Updated Fri, 25 Aug 2017 01:23 AM IST
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ओबीसी के वर्गीकरण का स्वागत किया
मुजफ्फरनगर। भारत सरकार के ओबीसी के वर्गीकरण के निर्णय का गरीब अतिपिछड़ी जाति के लोगों ने स्वागत किया है। भारतीय अति पिछड़ा वर्ग की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कई अति पिछड़ी जातियां ऐसी हैं, जो ओबीसी के लाभ से वंचित हैं। दबंग पिछड़ी जातियां उनका लाभ चट कर गईं। अलग श्रेणी में शामिल होने से ऐसी जातियों को आगे बढने का अवसर मिलेगा।
रामपुरी में मोर्चा कार्यालय पर हुई बैठक में अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने कहा कि अति पिछड़ी जातियां लंबे समय से आंदोलन करती रही हैं कि उन्हें दबंग पिछड़ी जातियों से अलग किया जाए। केंद्र सरकार ने अति पिछड़ों के इस मर्म को समझा है। कश्यप, नाई, लुहार, बढई, कुम्हार, पाल आदि ऐसी जातियां है, जिन्हें पिछड़े वर्ग के आरक्षण का लाभ नाम मात्र भी नहीं मिल पाया है। प्रदेश की दबंग किसान जातियां इसका लाभ उठाती रही हैं। जिन लोगों के लिए आरक्षण किया गया था वह वंचित रह गई। 27 प्रतिशत में आबादी के हिसाब से अति पिछड़ी जातियों को कम से कम 18 प्रतिशत आरक्षण अलग से मिलना चाहिए। हरेंद्र पाल, रामपाल सिंह पाल, अजय सैनी, जगदीश पांचाल, नरेश पांचाल, राकेश कश्यप, विक्रम सैनी, देशपाल आदि रहे।
गरीब जातियों को मिलेगा हक
मुजफ्फरनगर। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतेंद्र सैनी ने केंद्र के निर्णय का स्वागत किया है। सैनी का कहना है कि 1952 काका कालेलकर की रिपोर्ट आई थी, तभी से अति पिछड़ी जातियां लगातार मांग कर रही थी। ओबीसी में वर्गीकरण एक बड़ा कदम है, इससे विकास की दौड़ में बहुत अधिक पिछड़ गई जातियों को अवसर मिलेगा।
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मुजफ्फरनगर। भारत सरकार के ओबीसी के वर्गीकरण के निर्णय का गरीब अतिपिछड़ी जाति के लोगों ने स्वागत किया है। भारतीय अति पिछड़ा वर्ग की बैठक में वक्ताओं ने कहा कि कई अति पिछड़ी जातियां ऐसी हैं, जो ओबीसी के लाभ से वंचित हैं। दबंग पिछड़ी जातियां उनका लाभ चट कर गईं। अलग श्रेणी में शामिल होने से ऐसी जातियों को आगे बढने का अवसर मिलेगा।
रामपुरी में मोर्चा कार्यालय पर हुई बैठक में अध्यक्ष मोहन प्रजापति ने कहा कि अति पिछड़ी जातियां लंबे समय से आंदोलन करती रही हैं कि उन्हें दबंग पिछड़ी जातियों से अलग किया जाए। केंद्र सरकार ने अति पिछड़ों के इस मर्म को समझा है। कश्यप, नाई, लुहार, बढई, कुम्हार, पाल आदि ऐसी जातियां है, जिन्हें पिछड़े वर्ग के आरक्षण का लाभ नाम मात्र भी नहीं मिल पाया है। प्रदेश की दबंग किसान जातियां इसका लाभ उठाती रही हैं। जिन लोगों के लिए आरक्षण किया गया था वह वंचित रह गई। 27 प्रतिशत में आबादी के हिसाब से अति पिछड़ी जातियों को कम से कम 18 प्रतिशत आरक्षण अलग से मिलना चाहिए। हरेंद्र पाल, रामपाल सिंह पाल, अजय सैनी, जगदीश पांचाल, नरेश पांचाल, राकेश कश्यप, विक्रम सैनी, देशपाल आदि रहे।
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गरीब जातियों को मिलेगा हक
मुजफ्फरनगर। सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष सतेंद्र सैनी ने केंद्र के निर्णय का स्वागत किया है। सैनी का कहना है कि 1952 काका कालेलकर की रिपोर्ट आई थी, तभी से अति पिछड़ी जातियां लगातार मांग कर रही थी। ओबीसी में वर्गीकरण एक बड़ा कदम है, इससे विकास की दौड़ में बहुत अधिक पिछड़ गई जातियों को अवसर मिलेगा।
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