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भागवत जीवन और संस्कृति का दर्शन:ओमानंद
Updated Wed, 09 May 2018 12:24 AM IST
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भागवत जीवन भारतीय संस्कृति का दर्शन :ओमानंद
मोरना। भागवतपीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण है, जो जीवन और मृत्यु के सत्य का बोध कराती है।
शुकदेव आश्रम में महाराष्ट्र से पधारे बब्बनदेव महाराज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत भगवान वेद व्यास जी के हृदय से निकली अमृत वाणी है, जिसके श्रवण से अज्ञान मिट जाता है। भागवत पापों का नाश लोक-परलोक को सुधारती है। भागवत संपूर्ण मानव जाति के लिए एक उपहार, संजीवनी है। मनुष्य में भक्ति का भाव जागृत होता है, परमार्थ और सत्य कर्म का मार्ग मिलता है। संत एकनाथ, नामदेव, ज्ञानेश्वर, रामदास और तुकाराम के जीवन दर्शन से मानव मात्र को प्रेरणा लेनी चाहिए। कथा वाचिका राधाताई देव कुंडलीकर ने कहा कि भागवत सुनने के लिए प्रभु के प्रति भाव का समर्पण रखे। यजमान चंद्रशेखर गिरि, संगीता गिरि, सार्थक गिरि ने विधि विधान से भागवत पूजन किया। सुमन शास्त्री, अचल शास्त्री, श्यामाचार्य, राजू, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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मोरना। भागवतपीठ शुकदेव आश्रम के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत भारतीय जीवन और संस्कृति का दर्पण है, जो जीवन और मृत्यु के सत्य का बोध कराती है।
शुकदेव आश्रम में महाराष्ट्र से पधारे बब्बनदेव महाराज द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ करते हुए स्वामी ओमानंद सरस्वती ने कहा कि भागवत भगवान वेद व्यास जी के हृदय से निकली अमृत वाणी है, जिसके श्रवण से अज्ञान मिट जाता है। भागवत पापों का नाश लोक-परलोक को सुधारती है। भागवत संपूर्ण मानव जाति के लिए एक उपहार, संजीवनी है। मनुष्य में भक्ति का भाव जागृत होता है, परमार्थ और सत्य कर्म का मार्ग मिलता है। संत एकनाथ, नामदेव, ज्ञानेश्वर, रामदास और तुकाराम के जीवन दर्शन से मानव मात्र को प्रेरणा लेनी चाहिए। कथा वाचिका राधाताई देव कुंडलीकर ने कहा कि भागवत सुनने के लिए प्रभु के प्रति भाव का समर्पण रखे। यजमान चंद्रशेखर गिरि, संगीता गिरि, सार्थक गिरि ने विधि विधान से भागवत पूजन किया। सुमन शास्त्री, अचल शास्त्री, श्यामाचार्य, राजू, विजय शर्मा आदि मौजूद रहे।
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