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विभाग के रडार पर सूबे के 4700 शिक्षक
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मुजफ्फरनगर। परिषदीय स्कूलों में फर्जी शिक्षकों की तैनाती की परतें लगातार खुल रही हैं। सूबे में चल रही जांच में करीब 4700 शिक्षक संदिग्ध पाए गए हैं। ये सभी विभाग के रडार पर हैं। जिलों को इन शिक्षकों की सूची जांच के लिए भेज दी गई है। विभागीय अधिकारी स्कूलों में तैनात शिक्षकों से इस सूची का मिलान करने में जुटे हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग में मानव संपदा पोर्टल पर डाटा फीडिंग के दौरान फर्जी शिक्षकों की तैनाती की पोल खुलनी शुरू हुई। इसके साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की बीएड की फर्जी डिग्री पर शिक्षक की नौकरी कर रहे 2823 शिक्षकों से वेतन वसूली के भी आदेश जारी किए जा चुके हैं। पोर्टल पर हुई डाटा फीडिंग से सूबे में करीब 4700 शिक्षकों की तैनाती संदिग्ध पाई गई है। इनकी जांच के लिए सभी जनपदों को सूची भेजी गई है। मुजफ्फरनगर जनपद को 3400, 1000 तथा 300 शिक्षकों की अलग-अलग सूचियां भेजी गई हैं। इस सूची में शिक्षक और उसके पिता का नाम दर्ज है, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस जिले में तैनात हैं। इसलिए सूबे के हर जिले में इनकी तलाश की जा रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने जनपद में इन शिक्षकों को ढूंढें और उनके प्रमाणपत्रों की जांच करें। इस सूची में न केवल शिक्षक बल्कि अनुदेशकों एवं शिक्षामित्रों के नाम भी शामिल हैं।
जनपद में 3500 शिक्षकों की तैनाती
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में 3500 शिक्षक और 1200 शिक्षामित्रों की तैनाती है। जांच के लिए मिली सूची में करीब 4700 नाम शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों को अपने यहां तैनात शिक्षकों की सूची से शासन से मिली सूची का मिलान करना होगा।
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यहां मिले हैं दो फर्जी शिक्षक
जनपद में भी दो फर्जी शिक्षक मिल चुके हैं। इनमें एक पुरकाजी ब्लॉक के गांव बढ़ीवाला में तैनात था। वह बरेली निवासी प्रदीप कुमार सक्सेना की डिग्री पर नौकरी करता पाया गया। उसके खिलाफ बरेली में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है जबकि करीब 34 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश भी बीएसए ने जारी किया है। आगरा विश्व विद्यालय की फर्जी डिग्री पर बझेड़ी स्कूल में नौकरी कर रहे एक अन्य शिक्षक की भी सेवा शून्य की गई है। उसके खिलाफ भी 44 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी हुआ है।
इन्होंने कहा...
निदेशालय से प्राप्त सूची का सत्यापन किया जा रहा है। सूची में जो नाम शामिल हैं उनका मिलान जिले में तैनात शिक्षकों से करा रहे हैं। यदि यहां पर इनमें से कोई तैनात मिलता है तो उसके प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाएगी। - राम सागर पति त्रिपाठी, बीएसए।
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बेसिक शिक्षा विभाग में मानव संपदा पोर्टल पर डाटा फीडिंग के दौरान फर्जी शिक्षकों की तैनाती की पोल खुलनी शुरू हुई। इसके साथ ही डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा की बीएड की फर्जी डिग्री पर शिक्षक की नौकरी कर रहे 2823 शिक्षकों से वेतन वसूली के भी आदेश जारी किए जा चुके हैं। पोर्टल पर हुई डाटा फीडिंग से सूबे में करीब 4700 शिक्षकों की तैनाती संदिग्ध पाई गई है। इनकी जांच के लिए सभी जनपदों को सूची भेजी गई है। मुजफ्फरनगर जनपद को 3400, 1000 तथा 300 शिक्षकों की अलग-अलग सूचियां भेजी गई हैं। इस सूची में शिक्षक और उसके पिता का नाम दर्ज है, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि वह किस जिले में तैनात हैं। इसलिए सूबे के हर जिले में इनकी तलाश की जा रही है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने जनपद में इन शिक्षकों को ढूंढें और उनके प्रमाणपत्रों की जांच करें। इस सूची में न केवल शिक्षक बल्कि अनुदेशकों एवं शिक्षामित्रों के नाम भी शामिल हैं।
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जनपद में 3500 शिक्षकों की तैनाती
जनपद में बेसिक शिक्षा विभाग में 3500 शिक्षक और 1200 शिक्षामित्रों की तैनाती है। जांच के लिए मिली सूची में करीब 4700 नाम शामिल हैं। विभागीय अधिकारियों को अपने यहां तैनात शिक्षकों की सूची से शासन से मिली सूची का मिलान करना होगा।
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यहां मिले हैं दो फर्जी शिक्षक
जनपद में भी दो फर्जी शिक्षक मिल चुके हैं। इनमें एक पुरकाजी ब्लॉक के गांव बढ़ीवाला में तैनात था। वह बरेली निवासी प्रदीप कुमार सक्सेना की डिग्री पर नौकरी करता पाया गया। उसके खिलाफ बरेली में रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है जबकि करीब 34 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश भी बीएसए ने जारी किया है। आगरा विश्व विद्यालय की फर्जी डिग्री पर बझेड़ी स्कूल में नौकरी कर रहे एक अन्य शिक्षक की भी सेवा शून्य की गई है। उसके खिलाफ भी 44 लाख रुपये की रिकवरी का आदेश जारी हुआ है।
इन्होंने कहा...
निदेशालय से प्राप्त सूची का सत्यापन किया जा रहा है। सूची में जो नाम शामिल हैं उनका मिलान जिले में तैनात शिक्षकों से करा रहे हैं। यदि यहां पर इनमें से कोई तैनात मिलता है तो उसके प्रमाणपत्रों की जांच कराई जाएगी। - राम सागर पति त्रिपाठी, बीएसए।