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ब्रह्मचर्य और सदाचार का महत्व समझे युवा: आर्य
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युवाओं ने लिया शाकाहार का संकल्प
पुरकाजी। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि युवा शक्ति जीवन में नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढे़। ब्रह्मचर्य, शाकाहार और सदाचार को अपनाएं, तभी तेजस्वी जीवन बनेगा।
पुरकाजी क्षेत्र के गांव धमात में आयोजित संस्कार चेतना सम्मेलन का शुभारंभ वेदमंत्रों के साथ यज्ञ से हुआ। युवाओं ने आहुतियां अर्पित कर भारतीय वैदिक संस्कृति के अनुरूप आचरण का संकल्प लिया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति मनुष्य को आत्मिक ज्ञान, सदाचार, चरित्र, देशप्रेम और नैतिक मूल्यों को जीवन मे धारण करने की प्रेरणा देती है। मन, वचन, कर्म से शुद्ध व्यवहार करें। दूसरे के हक का हनन करना पाप है। संस्कारों से ही आत्मा, मन, शरीर, बुद्धि, आरोग्यता और सामाजिक उत्थान की भावना पैदा होती है। मर्यादित आचरण सबसे बड़ा धर्म है। शिक्षक सोमपाल सिंह आर्य ने कहा कि यज्ञ से पृथ्वी का पर्यावरण शुद्ध होता है। योग से आत्मिक बल बढ़ता है। ग्राम प्रधान राजकुमार ने कहा कि श्रेष्ठ सत्संग से सद्गुण जाग्रत होते है। ओजस्वी आर्य, उषाकिरण आर्या, सुरेश धीमान, आरजू, आरती, हिमानी , दीपा, रुपा आर्य, रणविजय आर्य, मयंक आदि को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वैदिक साहित्य भेंट किया। ग्रामीणों ने नशा, तंबाकू, मांसाहार से दूर रहने का संकल्प भी लिया।
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पुरकाजी। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि युवा शक्ति जीवन में नैतिक मूल्यों के साथ आगे बढे़। ब्रह्मचर्य, शाकाहार और सदाचार को अपनाएं, तभी तेजस्वी जीवन बनेगा।
पुरकाजी क्षेत्र के गांव धमात में आयोजित संस्कार चेतना सम्मेलन का शुभारंभ वेदमंत्रों के साथ यज्ञ से हुआ। युवाओं ने आहुतियां अर्पित कर भारतीय वैदिक संस्कृति के अनुरूप आचरण का संकल्प लिया। आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि भारतीय संस्कृति मनुष्य को आत्मिक ज्ञान, सदाचार, चरित्र, देशप्रेम और नैतिक मूल्यों को जीवन मे धारण करने की प्रेरणा देती है। मन, वचन, कर्म से शुद्ध व्यवहार करें। दूसरे के हक का हनन करना पाप है। संस्कारों से ही आत्मा, मन, शरीर, बुद्धि, आरोग्यता और सामाजिक उत्थान की भावना पैदा होती है। मर्यादित आचरण सबसे बड़ा धर्म है। शिक्षक सोमपाल सिंह आर्य ने कहा कि यज्ञ से पृथ्वी का पर्यावरण शुद्ध होता है। योग से आत्मिक बल बढ़ता है। ग्राम प्रधान राजकुमार ने कहा कि श्रेष्ठ सत्संग से सद्गुण जाग्रत होते है। ओजस्वी आर्य, उषाकिरण आर्या, सुरेश धीमान, आरजू, आरती, हिमानी , दीपा, रुपा आर्य, रणविजय आर्य, मयंक आदि को आचार्य गुरुदत्त आर्य ने वैदिक साहित्य भेंट किया। ग्रामीणों ने नशा, तंबाकू, मांसाहार से दूर रहने का संकल्प भी लिया।
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