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ई-टेंडरिंग से टूट गया ठेकेदारों का तिलिस्म
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:24 AM IST
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मुजफ्फरनगर। पालिका में एलईडी की ई-टेंडरिंग ने ठेकेदारों का तिलिस्म तोड़ दिया है। 8100 रुपये जिस एलईडी के लिए निर्धारित किए गए थे, प्रतिस्पर्धा में पालिका को अब वह 2348 रुपये की मिलेगी। दस हजार एलईडी पर पालिका को पांच करोड़ 75 लाख 78 हजार 100 रुपये का लाभ होगा। अब समस्त खरीद केवल दो करोड़ 34 लाख 81 हजार 900 में हो जाएगी।
प्रदेश सरकार की सोच के हिसाब से ई-टेंडरिंग के माध्यम से बड़े भ्रष्टाचार उजागर होने लगे हैं। ठेकों में चलने वाली मनमानी पर भी अंकुश लगने लगा है। नगर पालिका परिषद को शहर के खंभों पर लगाने के लिए दस हजार एलईडी खरीदनी हैं। राज्य वित्त के पैसे से होने वाली इस खरीदारी के लिए पालिका ने एक एलईडी का मूल्य 8100 रुपये निर्धारित कर आठ करोड़ दस लाख की व्यवस्था की। इस रेट को दृष्टिगत रखते हुए ई-टेंडरिंग की गई। नगर पालिका परिषद ने एलईडी की खरीद के लिए ई-टेंडरिंग का विकल्प सभी के लिए खोल दिया। पालिका के पंजीकृत ठेकेदारों के अलावा अपंजीकृत देश की किसी भी कंपनी को टेंडर डालने की छूट दी गई। जब टेंडर खुले तो अफसर भी भौचक्के रह गए।
नोएडा की हेलोनिक्स कंपनी ने 71 प्रतिशत बिलों का टेंडर डाला। सूर्या शिव कंस्ट्रक्शन को 67 प्रतिशत और बीपी इलेक्ट्रॉनिक्स आगरा ने 50.78 प्रतिशत बिलो का टेंडर डाला। जिस एलईडी की अनुमानित लागत 8100 के हिसाब से आठ करोड़ दस लाख मानी थी, वह 2348 रुपये के हिसाब से मात्र दो करोड़ 34 लाख 81 हजार 900 रुपये में मिल जाएगी। इससे उन ठेकेदारों में बौखलाहट है, जो इसमें अच्छा मुनाफा ले रहे थे।
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खुली ई-टेंडरिंग से पालिका को करोड़ों का लाभ हुआ है। इसके बाद भी कुछ लोगों ने शिकायत की हैं। इससे कम में खरीदारी करने वाला कोई सामने नहीं आया है। शिकायतों की भी जांच की जाएगी, लेकिन पालिका के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। - विकास सेन, ईओ, नगर पालिका, मुजफ्फरनगर।
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प्रदेश सरकार की सोच के हिसाब से ई-टेंडरिंग के माध्यम से बड़े भ्रष्टाचार उजागर होने लगे हैं। ठेकों में चलने वाली मनमानी पर भी अंकुश लगने लगा है। नगर पालिका परिषद को शहर के खंभों पर लगाने के लिए दस हजार एलईडी खरीदनी हैं। राज्य वित्त के पैसे से होने वाली इस खरीदारी के लिए पालिका ने एक एलईडी का मूल्य 8100 रुपये निर्धारित कर आठ करोड़ दस लाख की व्यवस्था की। इस रेट को दृष्टिगत रखते हुए ई-टेंडरिंग की गई। नगर पालिका परिषद ने एलईडी की खरीद के लिए ई-टेंडरिंग का विकल्प सभी के लिए खोल दिया। पालिका के पंजीकृत ठेकेदारों के अलावा अपंजीकृत देश की किसी भी कंपनी को टेंडर डालने की छूट दी गई। जब टेंडर खुले तो अफसर भी भौचक्के रह गए।
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नोएडा की हेलोनिक्स कंपनी ने 71 प्रतिशत बिलों का टेंडर डाला। सूर्या शिव कंस्ट्रक्शन को 67 प्रतिशत और बीपी इलेक्ट्रॉनिक्स आगरा ने 50.78 प्रतिशत बिलो का टेंडर डाला। जिस एलईडी की अनुमानित लागत 8100 के हिसाब से आठ करोड़ दस लाख मानी थी, वह 2348 रुपये के हिसाब से मात्र दो करोड़ 34 लाख 81 हजार 900 रुपये में मिल जाएगी। इससे उन ठेकेदारों में बौखलाहट है, जो इसमें अच्छा मुनाफा ले रहे थे।
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खुली ई-टेंडरिंग से पालिका को करोड़ों का लाभ हुआ है। इसके बाद भी कुछ लोगों ने शिकायत की हैं। इससे कम में खरीदारी करने वाला कोई सामने नहीं आया है। शिकायतों की भी जांच की जाएगी, लेकिन पालिका के हितों से समझौता नहीं किया जाएगा। - विकास सेन, ईओ, नगर पालिका, मुजफ्फरनगर।