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बीस दिनों के लिए बंद रहेगी गंगनहर
Updated Sun, 24 Sep 2017 12:39 AM IST
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20 दिनों के लिए बंद रहेगी गंगनहर
मुजफ्फरनगर। हरिद्वार में हर की पौड़ी पर सफाई अभियान के कारण अपर गंग नहर 20 दिनों के लिए बंद रहेगी। 30 सितंबर की रात से लेकर 20 अक्तूबर तक गंगनहर का क्लोजर टाइम प्रस्तावित है।
सिंचाई विभाग की ओर से नहरों, रजवाहों और माइनरों की सफाई तथा अन्य मरम्मत के लिए अपर गंगनहर को प्रति वर्ष करीब 20 दिनों तक के लिए बंद किया जाता है। इस अवधि में हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी पर भी सफाई की जाती है। इस बार 30 सितंबर की रात्रि को हरिद्वार स्थित मायापुर रेगुलेटर को बंद कर पानी रोक दिया जाएगा, जिसे 20 अक्तूबर की रात्रि में जारी किया जाएगा। गंगनहर मुजफ्फरनगर खंड के अधिशासी अभियंता हरि शर्मा के अनुसार उनके खंड में जिले में 88 रजवाहों और माइनरों से करीब 73 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। गंग नहर के रोस्टर के दौरान सभी रजवाहों, नहरों और माइनरों की सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाएगा। उधर, इस अवधि में रजवाहों में पानी नहीं होने से फसलों की सिंचाई प्रभावित होगी। खासकर जमीन की पलेवा नहीं होने से गेहूं की बुवाई पर असर पड़ सकता है।
रेत खनन माफिया होते हैं सक्रिय
मुजफ्फरनगर। गंगनहर के बंद होने पर रेत खनन माफिया सक्रिय होते हैं। जिले में निरगाजनी, बेलड़ा, भोपा, जौली, काटका, सिखेड़ा, चितौड़ा, सराय रसूलपुर, खतौली, सठेड़ी के अलावा अनूप शहर ब्रांच नहर में जटवाड़ा, संभलहेड़ा, मीरापुर, कुतुबपुर आदि स्थानों से भारी मात्रा में रेत का खनन होता है। रेत खनन को लेकर माफिया में खूनी संघर्ष भी होता है। पूर्व में भी फायरिंग और हत्या की घटनाएं हो चुकी हैं। सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरि शर्मा ने बताया कि इस बार गंगनहर से रेत खनन नहीं होने दिया जाएगा। खनन रोकने के लिए 18 टीमों का गठन किया गया है।
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बरसात के चलते पानी घटाया
मुजफ्फरनगर। गंगनहर की क्षमता 10500 क्यूसेक पानी की है। मगर, शनिवार को गंगनहर में 7025 क्यूसेक पानी छोड़ गया। एक्सईएन शर्मा ने बताया कि पहाड़ों पर लगातार हो रही बरसात के कारण गंगा में भारी मात्रा में सिल्ट आ गई है। साथ ही इस क्षेत्र में भी बरसात के कारण नहरों से सिंचाई कम हुई है, इसलिए गंगनहर में कम पानी छोड़ा गया है।
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मुजफ्फरनगर। हरिद्वार में हर की पौड़ी पर सफाई अभियान के कारण अपर गंग नहर 20 दिनों के लिए बंद रहेगी। 30 सितंबर की रात से लेकर 20 अक्तूबर तक गंगनहर का क्लोजर टाइम प्रस्तावित है।
सिंचाई विभाग की ओर से नहरों, रजवाहों और माइनरों की सफाई तथा अन्य मरम्मत के लिए अपर गंगनहर को प्रति वर्ष करीब 20 दिनों तक के लिए बंद किया जाता है। इस अवधि में हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी पर भी सफाई की जाती है। इस बार 30 सितंबर की रात्रि को हरिद्वार स्थित मायापुर रेगुलेटर को बंद कर पानी रोक दिया जाएगा, जिसे 20 अक्तूबर की रात्रि में जारी किया जाएगा। गंगनहर मुजफ्फरनगर खंड के अधिशासी अभियंता हरि शर्मा के अनुसार उनके खंड में जिले में 88 रजवाहों और माइनरों से करीब 73 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। गंग नहर के रोस्टर के दौरान सभी रजवाहों, नहरों और माइनरों की सफाई और मरम्मत का कार्य किया जाएगा। उधर, इस अवधि में रजवाहों में पानी नहीं होने से फसलों की सिंचाई प्रभावित होगी। खासकर जमीन की पलेवा नहीं होने से गेहूं की बुवाई पर असर पड़ सकता है।
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रेत खनन माफिया होते हैं सक्रिय
मुजफ्फरनगर। गंगनहर के बंद होने पर रेत खनन माफिया सक्रिय होते हैं। जिले में निरगाजनी, बेलड़ा, भोपा, जौली, काटका, सिखेड़ा, चितौड़ा, सराय रसूलपुर, खतौली, सठेड़ी के अलावा अनूप शहर ब्रांच नहर में जटवाड़ा, संभलहेड़ा, मीरापुर, कुतुबपुर आदि स्थानों से भारी मात्रा में रेत का खनन होता है। रेत खनन को लेकर माफिया में खूनी संघर्ष भी होता है। पूर्व में भी फायरिंग और हत्या की घटनाएं हो चुकी हैं। सिंचाई विभाग के एक्सईएन हरि शर्मा ने बताया कि इस बार गंगनहर से रेत खनन नहीं होने दिया जाएगा। खनन रोकने के लिए 18 टीमों का गठन किया गया है।
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बरसात के चलते पानी घटाया
मुजफ्फरनगर। गंगनहर की क्षमता 10500 क्यूसेक पानी की है। मगर, शनिवार को गंगनहर में 7025 क्यूसेक पानी छोड़ गया। एक्सईएन शर्मा ने बताया कि पहाड़ों पर लगातार हो रही बरसात के कारण गंगा में भारी मात्रा में सिल्ट आ गई है। साथ ही इस क्षेत्र में भी बरसात के कारण नहरों से सिंचाई कम हुई है, इसलिए गंगनहर में कम पानी छोड़ा गया है।