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World hepetitis day : चंद मिनट की मस्ती बांट रही जिंदगी भर का दर्द
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मुरादाबाद। लीवर शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है। भोजन की पाचन क्रिया इसी पर निर्भर होती है। बावजूद, इसके जाने एवं अनजाने में अनियमित खानपान, दूषित पानी एवं शराब पीने, नशे के लिए सिरिंज शेयरिंग से लीवर को संक्रमित कर हेपेटाइटिस के शिकार हो रहे हैं। मुरादाबाद में हेपेटाइटिस सी और बी के करीब 110 मरीज हैं। नशे के लिए इंजेक्शन सिरिंज की शेयरिंग सबसे बड़ी वजह बन रही है। हेपेटाइटिस सी का जिला अस्पताल में इलाज है। जबकि बी जिंदगी भर दर्द दे रहा है। मात्र चार फीसदी मरीज ही दवाओं से रिकवरी कर पाते हैं।
हेपेटाइटिस संक्रामक बीमारी है। इससे लीवर में सूजन आता है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, ई और डी में बी सबसे खतरनाक है। बी और सी संक्रमित व्यक्ति के खून से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। बी में अधिकतर मामले संक्रमित मां से बच्चे में आते हैं। इसके अलावा बी और सी संक्रमित सिरिंज और संक्रमित व्यक्ति का खून स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाए जाने से फैलता है। सीएमओ डा. एमसी गर्ग बताते हैं, मुरादाबाद में हेपेटाइटिस सी का सरकारी अस्पताल में इलाज है। हेपेटाइटिस बी की मेरठ मेडिकल कालेज या निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा है। बी और सी के अधिकतर मरीज नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंज शेयरिंग के शिकार हैं। कई लोग झोलाछापों के संक्रमित सिंरिंज के इस्तेमाल से इसकी चपेट में आए हैं। जिले में बी और सी के मरीजों की संख्या करीब 110 है।
जिला अस्पताल से चल रहा 53 मरीजों का इलाज
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी के 53 मरीज पंजीकृत हैं। नोडल अधिकारी हेमंत चौधरी के मुताबिक आशंकित मरीज की अस्पताल में जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर मेरठ मेडिकल कालेज से वायरल लोड की जांच कराई जाती है। वायरल रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर जिला अस्पताल में इलाज चलता है। मरीजों की 12 हफ्तों की दवा चलती है। एक बार में चार हफ्ते की दवा दी जाती है, ताकि मरीज को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
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- जिला अस्पताल में जल्द ही हेपेटाइटिस सी के मरीजों की वायरल लोड जांच के लिए लैब खुल जाएगी। लैब स्वीकृत है। स्टाफ कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मशीनें आनी बाकी है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कालेज मेरठ और निजी अस्पतालों में सुविधा है।
- डा. एमसी गर्ग, सीएमओ।
संक्रमित मां से बच्चो को, संक्रमित का खून चढ़ाने और सिरिंज शेयरिंग से देशभर में हेपेटाइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं। देश में एक लाख की आबादी में औसतन 40 मरीज हैं। मुरादाबाद में बी और सी के मरीजों की संख्या अधिक है।
- डा. अरुण कुमार, लीवर रोग विशेषज्ञ।
क्या है हेपेटाइटिस और कैसे फैलता है
- हेपेटाइटिस ए और ई संक्रमित भोजन और गंदे पानी पीने से होता है। इसमें दवा की जरूरत नहीं पड़ती है और संक्रमण इम्युनिटी से ठीक हो जाता है।
- हेपेटाइटिस डी केवल उन्हीं लोगों को होता है जो पहले से बी से संक्रमित होते हैं। जिंदगी भर दवा चलती है।
- हेपेटाइटिस सी संक्रमित का खून चढ़ाने, सिरिंज शेयरिंग और झोलाछाप की लापरवाही से संक्रमित सुई लगाने से होता है। इसका 12 हफ्तों का इलाज है।
- हेपेटाइटिस बी सबसे घातक है। इसमें संक्रमित मां से डिलीवरी के दौरान बच्चे को होता है। संक्रमित का खून चढ़ाने और सीरिंज शेयरिंग से सबसे अधिक फैलता है। मरीज आजीवन दवाओं पर निर्भर होते हैं।
- लीवर में सूजन ही हेपेटाइटिस की बीमारी है। शराब के अत्यधिक सेवन, खानपान में लापरवाही, दूषित पानी पीने से यह होता है।
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हेपेटाइटिस संक्रामक बीमारी है। इससे लीवर में सूजन आता है। हेपेटाइटिस ए, बी, सी, ई और डी में बी सबसे खतरनाक है। बी और सी संक्रमित व्यक्ति के खून से दूसरे व्यक्ति तक फैलता है। बी में अधिकतर मामले संक्रमित मां से बच्चे में आते हैं। इसके अलावा बी और सी संक्रमित सिरिंज और संक्रमित व्यक्ति का खून स्वस्थ व्यक्ति को चढ़ाए जाने से फैलता है। सीएमओ डा. एमसी गर्ग बताते हैं, मुरादाबाद में हेपेटाइटिस सी का सरकारी अस्पताल में इलाज है। हेपेटाइटिस बी की मेरठ मेडिकल कालेज या निजी अस्पतालों में इलाज की सुविधा है। बी और सी के अधिकतर मरीज नशे के लिए इस्तेमाल होने वाली सिरिंज शेयरिंग के शिकार हैं। कई लोग झोलाछापों के संक्रमित सिंरिंज के इस्तेमाल से इसकी चपेट में आए हैं। जिले में बी और सी के मरीजों की संख्या करीब 110 है।
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जिला अस्पताल से चल रहा 53 मरीजों का इलाज
मुरादाबाद। जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस सी के 53 मरीज पंजीकृत हैं। नोडल अधिकारी हेमंत चौधरी के मुताबिक आशंकित मरीज की अस्पताल में जांच में पॉजिटिव रिपोर्ट आने पर मेरठ मेडिकल कालेज से वायरल लोड की जांच कराई जाती है। वायरल रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर जिला अस्पताल में इलाज चलता है। मरीजों की 12 हफ्तों की दवा चलती है। एक बार में चार हफ्ते की दवा दी जाती है, ताकि मरीज को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं लगाने पड़ें।
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- जिला अस्पताल में जल्द ही हेपेटाइटिस सी के मरीजों की वायरल लोड जांच के लिए लैब खुल जाएगी। लैब स्वीकृत है। स्टाफ कर्मियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मशीनें आनी बाकी है। हेपेटाइटिस बी के मरीजों के इलाज के लिए मेडिकल कालेज मेरठ और निजी अस्पतालों में सुविधा है।
- डा. एमसी गर्ग, सीएमओ।
संक्रमित मां से बच्चो को, संक्रमित का खून चढ़ाने और सिरिंज शेयरिंग से देशभर में हेपेटाइटिस के मरीज बढ़ रहे हैं। देश में एक लाख की आबादी में औसतन 40 मरीज हैं। मुरादाबाद में बी और सी के मरीजों की संख्या अधिक है।
- डा. अरुण कुमार, लीवर रोग विशेषज्ञ।
क्या है हेपेटाइटिस और कैसे फैलता है
- हेपेटाइटिस ए और ई संक्रमित भोजन और गंदे पानी पीने से होता है। इसमें दवा की जरूरत नहीं पड़ती है और संक्रमण इम्युनिटी से ठीक हो जाता है।
- हेपेटाइटिस डी केवल उन्हीं लोगों को होता है जो पहले से बी से संक्रमित होते हैं। जिंदगी भर दवा चलती है।
- हेपेटाइटिस सी संक्रमित का खून चढ़ाने, सिरिंज शेयरिंग और झोलाछाप की लापरवाही से संक्रमित सुई लगाने से होता है। इसका 12 हफ्तों का इलाज है।
- हेपेटाइटिस बी सबसे घातक है। इसमें संक्रमित मां से डिलीवरी के दौरान बच्चे को होता है। संक्रमित का खून चढ़ाने और सीरिंज शेयरिंग से सबसे अधिक फैलता है। मरीज आजीवन दवाओं पर निर्भर होते हैं।
- लीवर में सूजन ही हेपेटाइटिस की बीमारी है। शराब के अत्यधिक सेवन, खानपान में लापरवाही, दूषित पानी पीने से यह होता है।