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दुष्कर्म पीड़िता ने युवक को पहचानने से किया इंकार, आरोपी बरी
Thu, 02 Feb 2023 01:51 AM IST
ranjeett ranjeett
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
अमर उजाला ब्यूरो मुरादाबाद
Published by: ranjeett ranjeett
Updated Thu, 02 Feb 2023 01:51 AM IST
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मुरादाबाद
- फोटो : अमर उजाला
संभल। गुन्नौर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में युवक ने चार वर्ष पहले युवती के साथ दुष्कर्म किया था। जिसकी रिपोर्ट पीड़िता के पिता ने युवक के विरुद्ध कोतवाली में दर्ज कराई थी। पुलिस ने विवेचना के बाद चार्जशीट कोर्ट में लगाई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान युवती ने युवक को पहचान से इंकार कर दिया न्यायालय ने युवक को बरी कर दिया।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश कुमार यादव ने बताया कि 25 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता ने कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि उसकी पुत्री के साथ सात माह पहले गांव युवक ने खेत में दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने पिता की तहरीर पर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद पुलिस ने युवक रतन सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया और चार्जशीट न्यायालय में पेश की।
इस बीच युवती सात माह की गर्भवती हो गई और लोकलाज के डर के कारण परिजनों को जानकारी नहीं दी। जब युवती को अधिक पीड़ा हुई तो मां को सारी घटना से अवगत कराया। न्यायालय ने विचारण के दौरान पीड़िता ने युवक को पहचानने से इंकार कर दिया और कहा कि उसके साथ 50 से 60 वर्षीय किसी व्यक्ति ने दुष्कर्म किया था। जिसको वह पहचानती नहीं है। चिकित्सक द्वारा पीड़िता एवं गर्भ में पल रहे बच्चे का नमूना डीएनए टेस्ट के लिए भेजा गया। लेकिन विवेचक द्वारा डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया। उक्त समस्त परिस्थितियों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश संभल अशोक यादव ने रतन सिंह को दोष मुक्त किया है।
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बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेश कुमार यादव ने बताया कि 25 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता ने कोतवाली में तहरीर देकर बताया कि उसकी पुत्री के साथ सात माह पहले गांव युवक ने खेत में दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया। पुलिस ने पिता की तहरीर पर दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कर ली। इसके बाद पुलिस ने युवक रतन सिंह को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया और चार्जशीट न्यायालय में पेश की।
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इस बीच युवती सात माह की गर्भवती हो गई और लोकलाज के डर के कारण परिजनों को जानकारी नहीं दी। जब युवती को अधिक पीड़ा हुई तो मां को सारी घटना से अवगत कराया। न्यायालय ने विचारण के दौरान पीड़िता ने युवक को पहचानने से इंकार कर दिया और कहा कि उसके साथ 50 से 60 वर्षीय किसी व्यक्ति ने दुष्कर्म किया था। जिसको वह पहचानती नहीं है। चिकित्सक द्वारा पीड़िता एवं गर्भ में पल रहे बच्चे का नमूना डीएनए टेस्ट के लिए भेजा गया। लेकिन विवेचक द्वारा डीएनए टेस्ट नहीं कराया गया। उक्त समस्त परिस्थितियों को देखते हुए विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश संभल अशोक यादव ने रतन सिंह को दोष मुक्त किया है।
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