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Moradabad News: अवसाद व आत्महत्या के ख्यालों से बचा रहा टेलीमानस
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मुरादाबाद। यदि आपके मन में किसी बात को लेकर चिंता या तनाव है, आपके मन में गलत ख्याल आते हैं। आप अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं कर पा रहे हैं तो बिना घबराए अपने मन की बात टेलीमानस से साझा कर सकते हैं। इस सरकारी हेल्पलाइन पर कॉल करने वालों की संख्या इस साल 15 प्रतिशत तक बढ़ी है।
यहां फोन मिलाने पर सरकारी मनोरोग विशेषज्ञ मरीज की काउंसिलिंग करते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब फोन पर काउंसिलिंग के जरिये लोगों के आत्महत्या के विचार बदल गए। हालांकि, टेलीमानस हेल्पलाइन की यह सेवा मुरादाबाद मंडल के लिए बरेली से संचालित हो रही है, लेकिन इसकी मदद लेने वाले कम नहीं हैं।
आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद से रोजाना औसतन छह कॉल हेल्पलाइन नंबर पर पहुंचते हैं। डॉक्टर मरीजों की काउंसिलिंग करने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में दिखाने की सलाह देते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे मरीजों ने इस बात का खुलासा किया वह तनावग्रस्त थे। टेलीमानस पर कॉल कर काउंसिलिंग कराने के बाद जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ओपीडी संचालित हो रही है। हर दिन 60-70 मनोरोगी यहां पहुंच रहे हैं।
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स्कूलों में फैलाई जाएगी जागरूकता
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में तैैनात क्लीनिक साइकोलॉजिस्ट डॉ. एस धनंजय ने बताया कि बच्चों में अवसाद के केस बढ़े हैं। स्कूल में घटने वाली छोटी-छोटी घटनाओं को बच्चे मन में बैठा लेते हैं। इसका असर उनके व्यवहार पर पड़ता है। ऐसे में स्कूलों में टेलीमानस के प्रति बच्चों, शिक्षकों व अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही स्कूलों में टेलीमानस से संबंधित बार कोड भी चस्पा किया जाएगा। जिससे कोई भी अपने मन की बात या चिंता डॉक्टरों से साझा कर सके।
केस-1
रामगंगा विहार निवासी युवक की फेसबुक पर एक युवती से मित्रता हुई। युवती ने चार लाख रुपये उधार लेने के बाद उसे ब्लॉक कर दिया। इससे युवक अवसाद में आ गया। उसने खाना-पीना बंद कर दिया। यह बात उसने अपने माता-पिता से भी साझा नहीं की। टेलीमानस के बारे में पता चला तो कॉल कर सारी बात बताई। विशेषज्ञों ने काउंसिलिंग की तो उसके मन का डर निकला। अब जिला अस्पताल से उसका डिप्रेशन का इलाज चल रहा है।
केस-2
परीक्षा में कम अंक आने पर टीचर की डांट से क्षुब्ध 11वीं का छात्र आत्महत्या का मन बना चुका था। आत्महत्या को लेकर बार-बार जिक्र करने से उसके दोस्त सतर्क हो गए। उन्होंने टेलीमानस के बारे में उसे बताया और डॉक्टर से बात कराई। काउंसिलिंग व कुछ दवाओं के बाद अब छात्र काफी ठीक है। जिला अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि दो सप्ताह और दवा खाने के बाद वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। उसके माता-पिता को सारी बात बताई गई है।
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ज्यादातर सामान्य शिकायतें टेलीमानस पर प्राप्त होती हैं, लेकिन लोगों को आत्महत्या से बचाने के उदाहरण भी हैं। यदि कोई को माता-पिता, दोस्त या डॉक्टर से अपनी बात कहने में संकोच कर रहा है तो वह 18008914416 या 14416 नंबरों पर कॉल कर काउंसिलिंग करा सकता है। कॉल करने वाले की जानकारी गोपनीय रखी जाती है। - डॉ. एस धनंजय, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट
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यहां फोन मिलाने पर सरकारी मनोरोग विशेषज्ञ मरीज की काउंसिलिंग करते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जब फोन पर काउंसिलिंग के जरिये लोगों के आत्महत्या के विचार बदल गए। हालांकि, टेलीमानस हेल्पलाइन की यह सेवा मुरादाबाद मंडल के लिए बरेली से संचालित हो रही है, लेकिन इसकी मदद लेने वाले कम नहीं हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक मुरादाबाद से रोजाना औसतन छह कॉल हेल्पलाइन नंबर पर पहुंचते हैं। डॉक्टर मरीजों की काउंसिलिंग करने के बाद उन्हें जिला अस्पताल में दिखाने की सलाह देते हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में पहुंचे मरीजों ने इस बात का खुलासा किया वह तनावग्रस्त थे। टेलीमानस पर कॉल कर काउंसिलिंग कराने के बाद जिला अस्पताल पहुंचे। जिला अस्पताल में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ओपीडी संचालित हो रही है। हर दिन 60-70 मनोरोगी यहां पहुंच रहे हैं।
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स्कूलों में फैलाई जाएगी जागरूकता
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिला अस्पताल में तैैनात क्लीनिक साइकोलॉजिस्ट डॉ. एस धनंजय ने बताया कि बच्चों में अवसाद के केस बढ़े हैं। स्कूल में घटने वाली छोटी-छोटी घटनाओं को बच्चे मन में बैठा लेते हैं। इसका असर उनके व्यवहार पर पड़ता है। ऐसे में स्कूलों में टेलीमानस के प्रति बच्चों, शिक्षकों व अभिभावकों को जागरूक किया जाएगा। साथ ही स्कूलों में टेलीमानस से संबंधित बार कोड भी चस्पा किया जाएगा। जिससे कोई भी अपने मन की बात या चिंता डॉक्टरों से साझा कर सके।
केस-1
रामगंगा विहार निवासी युवक की फेसबुक पर एक युवती से मित्रता हुई। युवती ने चार लाख रुपये उधार लेने के बाद उसे ब्लॉक कर दिया। इससे युवक अवसाद में आ गया। उसने खाना-पीना बंद कर दिया। यह बात उसने अपने माता-पिता से भी साझा नहीं की। टेलीमानस के बारे में पता चला तो कॉल कर सारी बात बताई। विशेषज्ञों ने काउंसिलिंग की तो उसके मन का डर निकला। अब जिला अस्पताल से उसका डिप्रेशन का इलाज चल रहा है।
केस-2
परीक्षा में कम अंक आने पर टीचर की डांट से क्षुब्ध 11वीं का छात्र आत्महत्या का मन बना चुका था। आत्महत्या को लेकर बार-बार जिक्र करने से उसके दोस्त सतर्क हो गए। उन्होंने टेलीमानस के बारे में उसे बताया और डॉक्टर से बात कराई। काउंसिलिंग व कुछ दवाओं के बाद अब छात्र काफी ठीक है। जिला अस्पताल के डॉक्टर का कहना है कि दो सप्ताह और दवा खाने के बाद वह पूरी तरह ठीक हो जाएगा। उसके माता-पिता को सारी बात बताई गई है।
ज्यादातर सामान्य शिकायतें टेलीमानस पर प्राप्त होती हैं, लेकिन लोगों को आत्महत्या से बचाने के उदाहरण भी हैं। यदि कोई को माता-पिता, दोस्त या डॉक्टर से अपनी बात कहने में संकोच कर रहा है तो वह 18008914416 या 14416 नंबरों पर कॉल कर काउंसिलिंग करा सकता है। कॉल करने वाले की जानकारी गोपनीय रखी जाती है। - डॉ. एस धनंजय, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट