Sambhal Jama Masjid case: पृथ्वीराज के शासन में बना था देवालय... मुगलकाल में बनी मस्जिद; इस किताब में है जिक्र
पृथ्वीराज चौहान के शासन में देवालय बना था। मुगलकाल में मस्जिद बनी थी। मेरठ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर डॉ. विघ्नेश त्यागी जो इतिहासकार और लेखक हैं उन्होंने अपनी किताब युग युगीन पुस्तक में हरिहर मंदिर होने का हवाला दिया है।
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जिसमें लिखा है कि हरिहर मंदिर पृथ्वीराज चौहान के शासन 1178 से 1193 तक रहा। इस दरमियान ही पृथ्वीराज चौहान ने संभल को दूसरी राजधानी का दर्जा दिया था। उस समय भी संभल में यह देवालय बना था। पृथ्वीराज चौहान का ठिकाना सेना के कैंप में हुआ करता था। मोहल्ला कोट आबाद था।
प्रोफेसर ने लिखा है कि बाबर के शासन में इसको मस्जिद बनाया गया। उस समय की लिखावट की जानकारी या उससे पहले की लिखावट की जानकारी लिपी शास्त्र से सामने आ सकती है। यदि खोदाई की जाए तो देवालय होने के कई प्रमाण मिलेंगे।
संभल नगर धार्मिक नजरिये से भी ऐतिहासिक है। संभल महात्म्य पुस्तक नगर के साहित्यकार वाणी सरण शर्मा ने लिखी है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि संभल में 68 तीर्थ और 19 कूप हैं। इन सभी तीर्थ और कूपों का केंद्र बिंदु हरिहर मंदिर है। किताब में यह भी लिखा है कि 24 कोसीय परिक्रमा का दायरा के अनुसार हरिहर ही केंद्र बिंदु है। जिसमें सभी तीर्थ और कूप की दूरी लिखी है। जिसमें सभी तीर्थ और कूप की मान्यता भी लिखी है।
बाबरनामा और आइन ए अकबर में संभल जामा मस्जिद का जिक्र मिलता है। इससे यह तो तय है कि इस मस्जिद का निर्माण मुगलकाल में ही किया गया है। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि किस स्थिति के बाद किया गया। वादीगण ने तर्क दिया है कि मंदिर खंडित किए जाने के बाद मस्जिद का निर्माण किया गया। वादी महंत ऋषिराज गिरि ने बताया कि कई तथ्य सामने आए हैं। सर्वे के दौरान ऐसे मिले हैं। जो न्यायालय में पेश किए जाएंगे। उसके आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ेगी।
संभल के जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताए जाने का वाद दाखिल होते ही पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया है। बुधवार को मस्जिद की सुरक्षा में कई थानों की पुलिस के साथ-साथ पीएसी और आरआरएफ को तैनात कर दिया गया। एहतियात के तौर पर मस्जिद की ओर जाने वाले दो रास्ते बंद कर दिए हैं।
पुलिस प्रशासन के अधिकारी भी निगरानी कर रहे हैं। जामा मस्जिद को हरिहर मंदिर बताते हुए मंगलवार को चंदौसी सिविल जज सीनियर डिवीजन की कोर्ट में वाद दाखिल किया गया था। अदालत ने कोर्ट कमिश्नर नियुक्ति करने के साथ ही अगली सुनवाई की तिथि 29 नवंबर तय कर दी।
हिंदू और मुस्लिम पक्ष के लोग सोशल मीडिया पर जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर को लेकर खूब चर्चा कर रहे हैं। मंगलवार की रात से यह मुद्दा सोशल मीडिया पर चल रहा है। बुधवार को हिंदू और मुस्लिम पक्ष के लोग अपने अपने तरीके से चर्चा कर रहे हैं। तरह तरह की टिप्पणी भी की जा रही हैं। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई का कहना है कि सोशल मीडिया पर भी पुलिस की निगरानी है। यदि किसी ने गलत तरह की टिप्पणी की या माहौल खराब करने का प्रयास किया तो पुलिस सख्ती से निबटेगी। इसलिए सोशल मीडिया पर निगरानी टीम कर रही है।
संभल जामा मस्जिद का सर्वे मंगलवार को पहले दिन हुआ था। बुधवार को काफी संख्या में मीडिया के लोग मस्जिद के नजदीक पहुंचे। इस पर कमेटी के सदस्यों ने मस्जिद के बाहर भीड़ जमा होने पर आपत्ति की। एएसपी श्रीश्चंद्र से आपत्ति करते हुए कहा कि मस्जिद के नजदीक भीड़ लगना बेहतर नहीं है। इसलिए मीडिया को मस्जिद के नजदीक ज्यादा भीड़ न लगाने दी जाए। इससे आम लोगों को गलत फहमी हो रही है।
सुबह 11 बजे- वाद दायर किया
दोपहर 1 बजे- सुनवाई हुई
शाम 4 बजे- कोर्ट कमिश्नर का आदेश हुआ
शाम 5 बजे- जिला जज ने फाइल देखी
शाम 5.30 बजे- वादी और कोर्ट कमिश्नर डीएम से मिले
शाम 6 बजे- कोर्ट कमिश्नर सर्वे के लिए संभल जामा मस्जिद पहुंचे
रात 7.30 बजे- सर्वे कर बाहर आए
एक कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरआरएफ की एहतियाती तौर पर संभल में मुस्तैद की है। कई थानों की फोर्स लगाई है। भ्रमण कर लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने का आग्रह किया है। -कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी, संभल