{"_id":"626992be7887ee18ee5fffed","slug":"saiyadiwas-of-baba-neem-kerrie-celebrated-city-news-mbd426198664","type":"story","status":"publish","title_hn":"56 भोग लगाकर सभी देवी-देवताओं समेत बाबा नीब करौरी को कराया शय्यादिवास","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
56 भोग लगाकर सभी देवी-देवताओं समेत बाबा नीब करौरी को कराया शय्यादिवास
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुरादाबाद। श्री राम बालाजी धाम बाबा नीब करौरी आश्रम गांव उमरी सब्जीपुर में धूमधाम से सप्तम बाबा नीब करौरी स्मृति उत्सव मनाया जा रहा है। समारोह के चौथे दिन बुधवार को बाबा नीब करौरी महाराज का शय्यादिवास किया गया। बाबा नीब करौरी और समस्त देवी-देवता रात भर विश्राम करेंगे। शय्यादिवास और हवन-पूजन के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।
बुधवार सुबह यज्ञाचार्यों ने सभी दस दिशाओं, चारों वेदों से, नवग्रह देवताओं, इष्ट देवताओं का आह्वान किया। अन्नादिवास से बाबा नीब करौरी और सभी देवी देवताओं को निकालकर दूध, गंगाजल आदि से स्नान कराया गया। पंचाक पूजन और जलाभिषेक कर महामृत्युंजय मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ किया गया। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने 61 हजार आहुतियां दीं। इसके बाद भगवान गणेश, श्रीराम दरबार, शिव परिवार, मां दुर्गा, मां काली, बालाजी महाराज, बाबा नीब करौरी महाराज सहित सभी की मूर्तियां विश्राम के लिए शय्यादिवास में रखी गईं। रात भर सभी भगवान विश्राम करेंगे।
सभी धार्मिक अनुष्ठान काशी से आए आचार्य डॉ. घनश्याम त्रिपाठी के पर्यवेक्षण में कराए जा रहे हैं। उनके साथ पंडित सुरेंद्र शुक्ल, पंडित राजकिशोर त्रिपाठी, पंडित रामललित पांडेय, पंडित कन्हैया त्रिपाठी, पंडित विवेक दुबे, पंडित कमलेश पांडेय, पंडित आलोक शुक्ल ने पूजन किया।
विज्ञापन
सायंकालीन सत्र में धीरशांत दास अर्धमौनी ने हरिनाम संकीर्तन किया और भगवान की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि घोर कलियुग में जो मनुष्य हरिनाम परायण हैं वे ही सफल हैं। कलियुग उन्हें बाधा नहीं पहुंचा सकता । जिनके जीवन में हरिनाम आ गया, समझो हरि आ गए। चैतन्य महाप्रभु कहते हैं कि भगवान ने अपने नाम में अपनी पूरी शक्ति रख दी है। नाम जप करने में समय का कोई नियम नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि हरिनाम युक्त पुरुषों को देखकर जो मनुष्य प्रसन्न होता है, वह परम धाम को प्राप्त होकर मुझ विष्णु के साथ आनंद करता है। वाणी की अधिष्ठात्री देवी भगवती सरस्वती और बुद्धि के देवता गणेश भी भगवान नाम की पूर्ण महिमा नहीं कह सकते।
विज्ञापन
बुधवार सुबह यज्ञाचार्यों ने सभी दस दिशाओं, चारों वेदों से, नवग्रह देवताओं, इष्ट देवताओं का आह्वान किया। अन्नादिवास से बाबा नीब करौरी और सभी देवी देवताओं को निकालकर दूध, गंगाजल आदि से स्नान कराया गया। पंचाक पूजन और जलाभिषेक कर महामृत्युंजय मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ किया गया। यज्ञ में श्रद्धालुओं ने 61 हजार आहुतियां दीं। इसके बाद भगवान गणेश, श्रीराम दरबार, शिव परिवार, मां दुर्गा, मां काली, बालाजी महाराज, बाबा नीब करौरी महाराज सहित सभी की मूर्तियां विश्राम के लिए शय्यादिवास में रखी गईं। रात भर सभी भगवान विश्राम करेंगे।
विज्ञापन
सभी धार्मिक अनुष्ठान काशी से आए आचार्य डॉ. घनश्याम त्रिपाठी के पर्यवेक्षण में कराए जा रहे हैं। उनके साथ पंडित सुरेंद्र शुक्ल, पंडित राजकिशोर त्रिपाठी, पंडित रामललित पांडेय, पंडित कन्हैया त्रिपाठी, पंडित विवेक दुबे, पंडित कमलेश पांडेय, पंडित आलोक शुक्ल ने पूजन किया।
विज्ञापन
सायंकालीन सत्र में धीरशांत दास अर्धमौनी ने हरिनाम संकीर्तन किया और भगवान की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि घोर कलियुग में जो मनुष्य हरिनाम परायण हैं वे ही सफल हैं। कलियुग उन्हें बाधा नहीं पहुंचा सकता । जिनके जीवन में हरिनाम आ गया, समझो हरि आ गए। चैतन्य महाप्रभु कहते हैं कि भगवान ने अपने नाम में अपनी पूरी शक्ति रख दी है। नाम जप करने में समय का कोई नियम नहीं है। भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है कि हरिनाम युक्त पुरुषों को देखकर जो मनुष्य प्रसन्न होता है, वह परम धाम को प्राप्त होकर मुझ विष्णु के साथ आनंद करता है। वाणी की अधिष्ठात्री देवी भगवती सरस्वती और बुद्धि के देवता गणेश भी भगवान नाम की पूर्ण महिमा नहीं कह सकते।