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अब काशीराम नगर में छोड़ी पोलियो वैक्सीन
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मुरादाबाद। पोलियो अभियान में स्वास्थ्य विभाग की फिर लापरवाही सामने आई है। कांशीराम नगर क्षेत्र में कर्मचारियों ने बच्चों को खोजकर दवा पिलाने के बजाए दोपहर में ही पोलियो वैक्सीन के डिब्बों को खुले में सड़क पर छोड़ दिया। घंटों तक वैक्सीन के डिब्बे सड़क पर पड़े रहे। बच्चे डिब्बों को खोलकर खेलते रहे।
रविवार से पोलियो अभियान की शुरुआत हुई। पहले दिन 1952 बूथों पर दवा पिलाई गई। नवीन नगर बूथ पर कर्मियों ने वैक्सीन से भरे डिब्बों को ऐसे ही खुले में छोड़ दिया था। डिब्बों के पास आवारा कुत्ते लेटे रहे। अमर उजाला ने कर्मचारियों की लापरवाही को 20 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इससे विभाग में हड़कंप मचा। सीएमओ डा. एमसी गर्ग ने जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. दीपक वर्मा से मामले की जांच कराई और लापरवाही के आरोपी बूथ और वैन कर्मी को अभियान से हटा दिया।
सोमवार से 472 पर्यवेक्षकों और 48 मोबाइल टीमों की निगरानी में कर्मियों ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। शुक्रवार को अभियान खत्म होना था। छूटे हुए बच्चों को 27 जनवरी को दवा पिलाई जानी थी। लेकिन शुक्रवार तक बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिसके चलते सोमवार तक टीमें घर घर जाकर बच्चों को दवा पिलाएंगी। शुक्रवार दोपहर कांशीराम नगर में 12 बजे ही कर्मचारी ने बच्चों को दवा पिलाने के बजाए वैक्सीन के पांच डिब्बों को पुलिस चौकी के पास सड़क किनारे बिना किसी की निगरानी में खुले में छोड़ दिया। जबकि दवा शाम चार बजे तक पिलाई जानी थी। कर्मचारियों के गायब रहने से डिब्बे घंटों तक सड़क पर पड़े रहे। वहां से गुजरने वाले बच्चे डिब्बों को खोलकर देखते रहे। वहीं नजदीक में मूंगफली और पकोड़ी के ठेले लगाने वालों ने बताया कि कर्मचारी दोपहर 12 बजे ही डिब्बे छोड़कर चले गए।
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- कांशीराम नगर क्षेत्र में पांच सदस्यीय टीम ने शाम चार बजे तक बच्चों को दवा पिलाई है। पांच डिब्बों को खुले में छोड़ने की सूचना पर क्षेत्र के प्रभारी से पूछताछ की गई। जिसमें प्रभारी की ओर से बताया कि डिब्बों का वजन अधिक होने पर कर्मचारी उनमें रखी वैक्सीन साथ ले गए थे। - डा. दीपक वर्मा, प्रतिरक्षण अधिकारी
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रविवार से पोलियो अभियान की शुरुआत हुई। पहले दिन 1952 बूथों पर दवा पिलाई गई। नवीन नगर बूथ पर कर्मियों ने वैक्सीन से भरे डिब्बों को ऐसे ही खुले में छोड़ दिया था। डिब्बों के पास आवारा कुत्ते लेटे रहे। अमर उजाला ने कर्मचारियों की लापरवाही को 20 जनवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया। इससे विभाग में हड़कंप मचा। सीएमओ डा. एमसी गर्ग ने जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. दीपक वर्मा से मामले की जांच कराई और लापरवाही के आरोपी बूथ और वैन कर्मी को अभियान से हटा दिया।
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सोमवार से 472 पर्यवेक्षकों और 48 मोबाइल टीमों की निगरानी में कर्मियों ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जा रही है। शुक्रवार को अभियान खत्म होना था। छूटे हुए बच्चों को 27 जनवरी को दवा पिलाई जानी थी। लेकिन शुक्रवार तक बच्चों को दवा पिलाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका है। जिसके चलते सोमवार तक टीमें घर घर जाकर बच्चों को दवा पिलाएंगी। शुक्रवार दोपहर कांशीराम नगर में 12 बजे ही कर्मचारी ने बच्चों को दवा पिलाने के बजाए वैक्सीन के पांच डिब्बों को पुलिस चौकी के पास सड़क किनारे बिना किसी की निगरानी में खुले में छोड़ दिया। जबकि दवा शाम चार बजे तक पिलाई जानी थी। कर्मचारियों के गायब रहने से डिब्बे घंटों तक सड़क पर पड़े रहे। वहां से गुजरने वाले बच्चे डिब्बों को खोलकर देखते रहे। वहीं नजदीक में मूंगफली और पकोड़ी के ठेले लगाने वालों ने बताया कि कर्मचारी दोपहर 12 बजे ही डिब्बे छोड़कर चले गए।
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- कांशीराम नगर क्षेत्र में पांच सदस्यीय टीम ने शाम चार बजे तक बच्चों को दवा पिलाई है। पांच डिब्बों को खुले में छोड़ने की सूचना पर क्षेत्र के प्रभारी से पूछताछ की गई। जिसमें प्रभारी की ओर से बताया कि डिब्बों का वजन अधिक होने पर कर्मचारी उनमें रखी वैक्सीन साथ ले गए थे। - डा. दीपक वर्मा, प्रतिरक्षण अधिकारी