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सैटेलाइट से मंडल में 18 स्थानों पर पराली का दिखाइ दिया धुआं
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मुरादाबाद। सैटेलाइट से ली गई तस्वीर से मुरादाबाद मंडल में 18 स्थानों पर पराली के जलाने का खुलासा हुआ है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने विभाग को रिपोर्ट भेजकर मामले में जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पराली जलाने के सर्वाधिक 16 स्थान जिला रामपुर में मिले हैं। बिजनौर व अमरोहा जिले की रिपोर्ट शून्य है।
धान की फसल की कटाई के बाद खेतों में बची पराली, अपशिष्ट पदार्थ, गन्ने की पाती को जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। वायु प्रदूषण रोकने के एनजीटी ने खेतों में अवशिष्ट पदार्थ जलाने पर 2500 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस आदेश का कृषि विभाग को कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान भी सैटेलाइट के माध्यम से देश भर में नजर गड़ाए हुए हैं। सैटेलाइट की निगरानी में मुरादाबाद मंडल के पांच जिलों में अनुसंधान संस्थान को 18 स्थानों पर पराली जलाने से उत्पन्न धुआं दिखाई दिया है। कृषि अनुसंधान संस्थान ने 12 अक्टूबर को कृषि विभाग को पत्र भेजकर इसकी सूचना दी है। निर्देश दिए है कि सभी स्थानों की मौके पर जाकर पड़ताल की जाए तथा संबंधित किसानों को चिह्नित किया जाए। साथ ही पराली जलाने के मामले में आरोपित जुर्माना किसानों से वसूला जाए। कृषि विभाग की टीम सभी स्थानों को जांच पड़ताल में जुट गई है।
खेतों में अवशेष जलाने पर जुर्माना-
क्षेत्रफल जुर्माना
दो एकड़ तक 2500
दो से पांच एकड़ तक 5000
पांच एकड़ से अधिक 15000
सर्वाधिक प्रदूषण रामपुर में, सबसे कम बिजनौर व अमरोहा
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की सूचना में मंडल के जिला रामपुर में सर्वाधिक 16 स्थानों पर पराली जलाने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा जिला मुरादाबाद व संभल में एक एक स्थान पर पराली जलाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि जिला बिजनौर व अमरोहा में पराली का एक भी मामला सैटेलाइट की पकड़ में नहीं आया है।
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अवशिष्ट पदार्थों को नष्ट करने के यंत्र उपलब्ध
प्रदूषण को रोकने के लिए कृषि यंत्रों के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थो को नष्ट करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग में माउंटेन टाइप मल्चर, ट्रल्ड टाइप मलचर, ट्रल्ड टाइप कटर कम स्प्रेडर, श्रब मास्टर, हाईड्रोलिक रिवर्सेबुल एमबी प्लाऊ आदि कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध हैं। इन यंत्रों के माध्यम से किसान अवशिष्ट पदार्थ, पुआल, गेहूं की फसल के अवशेष, गन्ने की पाती आदि अवशेषों को काटकर जमीन में ही नष्ट कर सकते हैं। इससे वातावरण प्रदूषित भी नहीं होगा और जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की सैटेलाइट के माध्यम से भेजी गई रिपोर्ट में मंडल में कई स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए है। मुरादाबाद जिले में मात्र एक स्थान पर पराली जलाने की रिपोर्ट है। उसकी जांच की जा रही है।
ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी मुरादाबाद।
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धान की फसल की कटाई के बाद खेतों में बची पराली, अपशिष्ट पदार्थ, गन्ने की पाती को जलाने से वातावरण प्रदूषित होता है। वायु प्रदूषण रोकने के एनजीटी ने खेतों में अवशिष्ट पदार्थ जलाने पर 2500 रुपये से लेकर 15000 रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। इस आदेश का कृषि विभाग को कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान भी सैटेलाइट के माध्यम से देश भर में नजर गड़ाए हुए हैं। सैटेलाइट की निगरानी में मुरादाबाद मंडल के पांच जिलों में अनुसंधान संस्थान को 18 स्थानों पर पराली जलाने से उत्पन्न धुआं दिखाई दिया है। कृषि अनुसंधान संस्थान ने 12 अक्टूबर को कृषि विभाग को पत्र भेजकर इसकी सूचना दी है। निर्देश दिए है कि सभी स्थानों की मौके पर जाकर पड़ताल की जाए तथा संबंधित किसानों को चिह्नित किया जाए। साथ ही पराली जलाने के मामले में आरोपित जुर्माना किसानों से वसूला जाए। कृषि विभाग की टीम सभी स्थानों को जांच पड़ताल में जुट गई है।
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खेतों में अवशेष जलाने पर जुर्माना-
क्षेत्रफल जुर्माना
दो एकड़ तक 2500
दो से पांच एकड़ तक 5000
पांच एकड़ से अधिक 15000
सर्वाधिक प्रदूषण रामपुर में, सबसे कम बिजनौर व अमरोहा
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की सूचना में मंडल के जिला रामपुर में सर्वाधिक 16 स्थानों पर पराली जलाने का खुलासा हुआ है। इसके अलावा जिला मुरादाबाद व संभल में एक एक स्थान पर पराली जलाने का मामला सामने आया है। खास बात यह है कि जिला बिजनौर व अमरोहा में पराली का एक भी मामला सैटेलाइट की पकड़ में नहीं आया है।
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अवशिष्ट पदार्थों को नष्ट करने के यंत्र उपलब्ध
प्रदूषण को रोकने के लिए कृषि यंत्रों के माध्यम से अपशिष्ट पदार्थो को नष्ट करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि कृषि विभाग में माउंटेन टाइप मल्चर, ट्रल्ड टाइप मलचर, ट्रल्ड टाइप कटर कम स्प्रेडर, श्रब मास्टर, हाईड्रोलिक रिवर्सेबुल एमबी प्लाऊ आदि कृषि यंत्र अनुदान पर उपलब्ध हैं। इन यंत्रों के माध्यम से किसान अवशिष्ट पदार्थ, पुआल, गेहूं की फसल के अवशेष, गन्ने की पाती आदि अवशेषों को काटकर जमीन में ही नष्ट कर सकते हैं। इससे वातावरण प्रदूषित भी नहीं होगा और जमीन की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी।
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की सैटेलाइट के माध्यम से भेजी गई रिपोर्ट में मंडल में कई स्थानों पर पराली जलाने के मामले सामने आए है। मुरादाबाद जिले में मात्र एक स्थान पर पराली जलाने की रिपोर्ट है। उसकी जांच की जा रही है।
ऋतुषा तिवारी, जिला कृषि अधिकारी मुरादाबाद।