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अगर भीड़ होगी बेकाबू तो आयोजक ही होंगे जिम्मेदार
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रामपुर। नागरिक संशोधन कानून के विरोध में 21 दिसंबर को रामपुर बंद के साथ-साथ रामपुर सहित सभी तहसीलों में जलसा आयोजित किए जाने को लेकर जिला प्रशासन ने छह उलेमाओं को नोटिस भेजा है। नोटिस में कहा गया है कि इस तरह का आयोजन धारा 144 का उल्लंघन तो होगा ही साथ ही भीड़ के बेकाबू होने की स्थिति में 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए निर्णय के मुताबिक किसी अप्रिय घटना की स्थिति में आयोजक ही जिम्मेदार होंगे। नोटिस के मार्फत से उलेमाओं को बता दिया गया है कि जलसे के आयोजन की पूरी जिम्मेदारी उनकी ही होगी।
जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि उलेमाओं की ओर से 21 को रामपुर बंद और जलसे के आयोजन के बारे में सूचना दी गई है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को उलेमाओं के साथ हुई बातचीत में यह फैसला लिया गया था कि इस तरह के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन उनकी बात को सुनने को तैयार है। उनकी बात को उस जगह तक पहुंचा दी जाएगी जहां वो पहुंचाना चाहते हैं। इसके बाद भी उलेमाओं ने 21 दिसंबर को रामपुर बंद और सभी तहसीलों के ईदगाह में जलसा आयोजित करने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना धारा 144 का उल्लंघन है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के अपने आदेश में कहा है कि अगर किसी आयोजन में लोगों से बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की जाती है और भीड़ बेकाबू हो जाती है तो इस स्थिति में आयोजक ही जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के मुताबिक जलसे के छह आयोजकों को नोटिस भेजा कर अवगत करा दिया गया है कि अगर भीड़ बेकाबू होगी आप ही जिम्मेदार होंगे। डीएम के मुताबिक अगर किसी भी तहसील में 21 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो यह छह लोग ही जिम्मेदार माने जाएंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि इस मामले में एडीएम (प्रशासन) की ओर से शहर मुफ्ती महबूब अली कादरी वजीही, काजी ए शरआ सैयद फैजान रजा हसनी नूरी, आस्ताना आलिया जमालिया के सज्जादानशीन फरहत अहमद खां जमाली, जमीअत उलेमाए हिन्द के सदर मौलाना असलम जावेद कासमी, शिया इमाम मौलाना मोहम्मद जमा बाकरी और जमीअत कुरैश के सदर जाहिद मकसूद कुरैशी को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
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जिलाधिकारी आन्जनेय कुमार सिंह ने बताया कि उलेमाओं की ओर से 21 को रामपुर बंद और जलसे के आयोजन के बारे में सूचना दी गई है। उन्होंने बताया कि मंगलवार को उलेमाओं के साथ हुई बातचीत में यह फैसला लिया गया था कि इस तरह के किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। जिला प्रशासन उनकी बात को सुनने को तैयार है। उनकी बात को उस जगह तक पहुंचा दी जाएगी जहां वो पहुंचाना चाहते हैं। इसके बाद भी उलेमाओं ने 21 दिसंबर को रामपुर बंद और सभी तहसीलों के ईदगाह में जलसा आयोजित करने का एलान कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करना धारा 144 का उल्लंघन है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने 2011 के अपने आदेश में कहा है कि अगर किसी आयोजन में लोगों से बढ़ चढ़कर भाग लेने की अपील की जाती है और भीड़ बेकाबू हो जाती है तो इस स्थिति में आयोजक ही जिम्मेदार होंगे। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के मुताबिक जलसे के छह आयोजकों को नोटिस भेजा कर अवगत करा दिया गया है कि अगर भीड़ बेकाबू होगी आप ही जिम्मेदार होंगे। डीएम के मुताबिक अगर किसी भी तहसील में 21 दिसंबर को आयोजित कार्यक्रम में किसी तरह की गड़बड़ी होती है तो यह छह लोग ही जिम्मेदार माने जाएंगे। जिलाधिकारी ने बताया कि इस मामले में एडीएम (प्रशासन) की ओर से शहर मुफ्ती महबूब अली कादरी वजीही, काजी ए शरआ सैयद फैजान रजा हसनी नूरी, आस्ताना आलिया जमालिया के सज्जादानशीन फरहत अहमद खां जमाली, जमीअत उलेमाए हिन्द के सदर मौलाना असलम जावेद कासमी, शिया इमाम मौलाना मोहम्मद जमा बाकरी और जमीअत कुरैश के सदर जाहिद मकसूद कुरैशी को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
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