{"_id":"65128f371e08bcb3ef08bb3b","slug":"moradabad-trophies-add-glory-to-moto-gp-artisans-show-their-skills-t-20-too-2023-09-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीतलनगरी की चमक: मुरादाबाद की ट्रॉफियां ने लगाए मोटो जीपी में चार चांद, टी-20 में भी कारीगरों ने दिखाया हुनर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पीतलनगरी की चमक: मुरादाबाद की ट्रॉफियां ने लगाए मोटो जीपी में चार चांद, टी-20 में भी कारीगरों ने दिखाया हुनर
Tue, 26 Sep 2023 01:28 PM IST
विमल शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: विमल शर्मा
Updated Tue, 26 Sep 2023 01:28 PM IST
सार
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पदाधिकारी एवं निर्यातक गोपाल मेहता की कन्हैयालाल नाम से दिल्ली रोड पर फैक्टरी है। इसी फैक्टरी में मोटो जीपी के लिए 17 टॉफियां को तैयार कर नोएडा भेजा गया था। वह 1935 से ट्रॉफी बनाने का कार्य कर रहे हैं।
विज्ञापन
मुरादाबाद में तैयार मोटी जीपी ट्रॉफी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
ग्रेटर नोएडा में आयोजित मोटो जीपी की ट्रॉफियां मुरादाबाद की फैक्टरी में तैयार की गईं थी। इसी प्रकार कुछ दिनों पहले यूपी टी-20 लीग मैच की ट्रॉफी भी मुरादाबाद से तैयार कर लखनऊ भेजी गईं थी। इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पदाधिकारी एवं निर्यातक गोपाल मेहता की कन्हैयालाल नाम से दिल्ली रोड पर फैक्टरी है।
विज्ञापन
इसी फैक्टरी में मोटो जीपी के लिए 17 ट्राफियां तैयार कर नोएडा भेजी गईं थी। कंपनी के मालिक गोपाल मेहता ने बताया कि वे 1935 से ट्रॉफी बनाने का कार्य कर रहे हैं। देश के विभिन्न स्थानों पर उनकी ट्राफियों ने समारोहों में चार चांद लगाए हैं।
विज्ञापन
उनको ट्रॉफी बनाने की सीख अपने पिता स्वर्गीय राधा कृष्ण मेहता से मिली थी। वह ग्राहकों की पसंद के मुताबिक ट्राफियां बनाकर देते हैं। जीपी मोटो और यूपी टी-20 लीग मैच के लिए ट्रॉफी बनाने का आर्डर सीधे मिला था। तय समय के अनुसार उन्होंने ट्रॉफियां बनाकर दे दी थीं।
विज्ञापन
इसके अलावा डीलरों के माध्यम उनकी फैक्टरी में तैयार ट्रॉफियां मुंबई, बंगलुरू, चेन्नई और कोलकाता भेजी गई हैं। सबसे अधिक ट्रॉफियां मुंबई और बंगलुरू के डीलर लेते हैं। ट्राफियों को तैयार करने के लिए डिजाइन और प्रोडक्शन में काफी मेहनत करनी पड़ती है।
काफी लोगों के मामले में गोपनीयता भी बरती जाती है। ट्राफियों के दामों को गोपनीय रखा जाता है। कीमत बताने से ट्रॉफी के महत्व पर असर पड़ता है।