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मुरादाबाद: दो लाख के लिए आठ साल के चचेरे भाई की हत्या करने वाले को उम्रकैद, पचास हजार का जुर्माना भी लगाया

Fri, 18 Aug 2023 02:51 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 18 Aug 2023 02:51 PM IST
सार

मुरादाबाद में 27 जनवरी को मनमोहन की गला दबा कर हत्या कर दी थी। उसकी लाश को गन्ने के खेत में दबा दिया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी गौरव को गिरफ्तार किया था। इसकी अदालत में सुनवाई चल रही है। 

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Moradabad: Life imprisonment for killing eight year old cousin two lakhs, imposed fine of fifty thousand
मुरादाबाद की अदालत ने सुनाया फैसला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुरादाबाद के बिलारी थाना क्षेत्र में दो लाख रुपये के लिए आठ साल के चचेरे भाई मनमोहन की गला दबाकर हत्या करने वाले गौरव को अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। तेवर खास गांव निवासी किसान महेंद्र सिंह ने 31 जनवरी 2014 को मुकदमा दर्ज कराया था।

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उसने बताया कि दूसरी कक्षा में पढ़ने वाला उसका आठ साल का बेटा मनमोहन 27 जनवरी की सुबह करीब 11 बजे लापता हो गया था। इसी दौरान 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले उसके भतीजे गौरव (18) पुत्र विजय पाल सिंह ने उसे बताया कि उसके पास एक अंजान नंबर से कॉल आई है। कॉल करने वाले ने कहा कि बच्चे को उसने अगवा कर लिया है। सुबह गांव के पास एक पर्ची मिलेगी जिस पर बच्चे के बारे में जानकारी होगी।

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इसके बाद सुबह गांव के पास एक पर्ची मिली थी। इस पर लिखा था कि बच्चे को जिंदा चाहते हो तो अपने परिवार के पढ़े लिखे लड़के को मुरादाबाद लखनऊ हाईवे पर दो लाख रुपये लेकर भेज देना। पुलिस से शिकायत करने पर बच्चे को मारने की धमकी भी दी गई थी। उस वक्त गौरव 12वीं कक्षा में पढ़ रहा था। महेंद्र और गांव के अन्य लोगों को गौरव पर शक हुआ।

उससे कड़ाई से पूछताछ की गई। तब उसने बताया कि 27 जनवरी को उसने मनमोहन की गला दबा कर हत्या कर दी थी। उसने लाश गांव के पास मोहम्मद उमर के गन्ने के खेत में दबा दी थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसकी निशानदेही पर गन्ने के खेत से लाश बरामद की थी।


इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या छह रणजीत कुमार की अदालत में हुई। वादी की ओर से अधिवक्ता रजत शर्मा एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीलम वर्मा ने पक्ष रखा। 11 गवाहों ने अदालत में बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष का तर्क था कि गौरव को रंजिश के चलते झूठा फंसाया गया है। अदालत ने दोनों पक्षों सुनने के बाद गौरव को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।

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लालच और परिवार के दबाव में नहीं आया पिता

महेंद्र पर परिवार और रिश्तेदारों ने समझौते के लिए बहुत दबाव बनाया। पैसे का लालच भी दिया गया लेकिन महेंद्र नहीं माना। उसने कोर्ट में बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए लड़ाई लड़ी। नौ साल आठ बाद फैसला आया तो पिता की आंखों से आंसू छलक आए। महेंद्र बोला कि मुझे और मेरे बेटे को आज न्याय मिला है।

छोटे बेटे का नाम रख लिया मनमोहन

महेंद्र सिंह ने बताया कि उसके परिवार में पत्नी कैलाशो, बेटी, रचना, संतोष, मनू, ज्योति और छोटे बेटे का नाम यश है। मनमोहन की हत्या के वक्त उसकी उम्र आठ साल थी जबकि यश की उम्र दो साल थी। अब यश का नाम उन्होंने मनमोहन रख लिया है।

जमानत मिलने पर चंडीगढ़ भाग गया था गौरव

महेंद्र सिंह ने बताया कि उसका बेटा पड़ोस के गांव में स्थित स्कूल में दूसरी कक्षा में पढ़ता था। 26 जनवरी 2014 को मनमोहन स्कूल गया था। 26 जनवरी को गौरव बहाने से मनमोहन को स्कूल से ये कहकर बुला लाया था कि उसकी मां ने बुलाया है। लेकिन, तब वह हत्या नहीं कर पाया था। अगले दिन वह फिर मनमोहन को घर से बुलाकर ले गया और मौका पाकर हत्या कर दी थी।

पुलिस ने हत्यारोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था लेकिन हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल गई थी। फैसला आने की जानकारी मिलने पर वह चंडीगढ़ भाग गया था। इस कारण कोर्ट फैसला नहीं सुना पा रही थी। दो दिन पहले ही परिवार के लोग गौरव को चंडीगढ़ से पकड़कर लाए थे। बृहस्पतिवार को उसे कोर्ट में पेश किया गया।
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