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Moradabad News: जिला पंचायत से मंजूर नक्शों को अब एमडीए देगा राहत, 12 माह में होगा शमन
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मुरादाबाद। एमडीए क्षेत्र में जिला पंचायतों से पहले मंजूर कराए गए नक्शों को अब शमन के जरिए नियमित कराने का रास्ता खुल गया है। शासन ने एक अप्रैल 2026 से पहले जिला पंचायतों द्वारा स्वीकृत किए गए मानचित्रों के शमन की नीति तय कर दी है। इसके तहत ऐसे मामलों में एमडीए आगामी 12 माह के भीतर नियमानुसार कार्रवाई कर सकेगा। एमडीए के क्षेत्र में कई ऐसे भवन हैं, जिनके मानचित्र जिला पंचायतों से स्वीकृत हुए थे और मौके पर निर्माण पूरा हो चुका है या निर्माण चल रहा है। ऐसे भवन स्वामियों को एमडीए की ओर से उत्तर प्रदेश नगर योजना एवं विकास अधिनियम-1973 के तहत नोटिस और ध्वस्तीकरण के आदेश तक जारी किए गए हैं। अब शासन की नई नीति से इन भवन स्वामियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
नीति के मुताबिक, जिला पंचायत से स्वीकृत मानचित्र में महायोजना में दर्ज भू-उपयोग के विपरीत निर्माण होने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं ग्रीन पार्क और खुले क्षेत्र के लिए आरक्षित जमीन के बदले भवन स्वामी उतनी ही जमीन उसी भू-उपयोग के लिए आरक्षित करता है तो उसके शमन पर भी विचार किया जा सकेगा। हालांकि जलाशय, महायोजना मार्ग और सरकारी जमीन का शमन नहीं किया जाएगा। यानी इन जमीनों पर हुए निर्माण को इस नीति के तहत नियमित कराने का रास्ता नहीं होगा।
मुरादाबाद के साथ संभल और अमरोहा के गांव भी दायरे में
एमडीए सचिव पंकज वर्मा ने बताया कि एमडीए क्षेत्र में मुरादाबाद जिले के नगरीय क्षेत्र के अलावा 200 राजस्व गांव, संभल जिले के चार राजस्व गांव और अमरोहा जिले के 15 राजस्व गांव शासन द्वारा अधिसूचित हैं। इन गांवों में यदि जिला पंचायत के माध्यम से मानचित्र स्वीकृत कराया गया है तो शासन की नई नीति के तहत एमडीए से उसका शमन कराया जा सकता है। इस फैसले से जिला पंचायत से नक्शा पास कराकर निर्माण कराने वाले उन भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिल सकती है, जिनके निर्माण एमडीए के क्षेत्र में आने के बाद विवाद में फंस गए थे।
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नीति के मुताबिक, जिला पंचायत से स्वीकृत मानचित्र में महायोजना में दर्ज भू-उपयोग के विपरीत निर्माण होने पर भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में 75 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। वहीं ग्रीन पार्क और खुले क्षेत्र के लिए आरक्षित जमीन के बदले भवन स्वामी उतनी ही जमीन उसी भू-उपयोग के लिए आरक्षित करता है तो उसके शमन पर भी विचार किया जा सकेगा। हालांकि जलाशय, महायोजना मार्ग और सरकारी जमीन का शमन नहीं किया जाएगा। यानी इन जमीनों पर हुए निर्माण को इस नीति के तहत नियमित कराने का रास्ता नहीं होगा।
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मुरादाबाद के साथ संभल और अमरोहा के गांव भी दायरे में
एमडीए सचिव पंकज वर्मा ने बताया कि एमडीए क्षेत्र में मुरादाबाद जिले के नगरीय क्षेत्र के अलावा 200 राजस्व गांव, संभल जिले के चार राजस्व गांव और अमरोहा जिले के 15 राजस्व गांव शासन द्वारा अधिसूचित हैं। इन गांवों में यदि जिला पंचायत के माध्यम से मानचित्र स्वीकृत कराया गया है तो शासन की नई नीति के तहत एमडीए से उसका शमन कराया जा सकता है। इस फैसले से जिला पंचायत से नक्शा पास कराकर निर्माण कराने वाले उन भवन स्वामियों को बड़ी राहत मिल सकती है, जिनके निर्माण एमडीए के क्षेत्र में आने के बाद विवाद में फंस गए थे।
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