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कमल की खेती से खिल रहा सूरज का जीवन
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मुरादाबाद के मोढ़ा तय्या में कमल की पैदावार की देखरेख करता किसान सूरज।
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मुरादाबाद। मुरादाबाद के थाना पाकबड़ा क्षेत्र में आने वाले गांव मौढ़ा तय्या में बड़े स्तर पर कमल की खेती की जाती है। गांव के किसान सूरजपाल मुख्य रूप से कमल की खेती करते हैं जो उनका मुख्य व्यवसाय भी है। दादा शो सिंह और पिता थान सिंह को देखकर इसके प्रति लगाव हुआ था। अब सूरजपाल दूसरों के लिये प्रेरणा का स्रोत भी बन रहे हैं। उनको देखकर गांव के अधिकतर लोगों ने कमल की खेती को व्यवसाय के रूप में अपना लिया है।
सूरजपाल के कमल की कली की मांग दूर दराज से आती है। यहां से कली ले जाकर दिल्ली और बंगलुरू में भी बेची जाती है। पानी में डली कली वहां पहुंचने तक खिल जाती है। एक रुपये कली के हिसाब से रोजाना 25 हजार कलियां बेचते हैं। दीपावली और नवरात्र में कीमत 20 रुपये प्रति एक फूल या कली होती है। वह 400 बीघा में कमल की खेती कर रहे हैं। 6 से 7 हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है और साल में दो बार फसल मिल जाती है।
लॉकडाउन में जहां सभी सब्जियों के दाम प्रभावित हुए, तब भी कमल ककड़ी यानी भसींडे के दाम पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वहीं, कमल गट्टे भी 90 रुपये प्रति किलो बिक जाते हैं। यह पूजा और भोजन में काम आते हैं। कमल के फूल की सबसे ज्यादा मांग नवरात्रों और दीपावली पर रहती है जिसमें लोग पूजा के लिये इसे खरीदते हैं। किसान सूरजपाल बताते हैं कि दीपावली पर लोग खुद गांव में आकर बीस रूपये के हिसाब से फूल खरीदकर ले जाते हैं और बाजार में और अधिक दामों पर बेच देते हैं। दीपावली के त्योहार पर लोग लक्ष्मी पूजन में कमल के फूल का प्रयोग करते हैं और इसी समय फूल की सबसे ज्यादा मांग होती है।
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सूरजपाल के कमल की कली की मांग दूर दराज से आती है। यहां से कली ले जाकर दिल्ली और बंगलुरू में भी बेची जाती है। पानी में डली कली वहां पहुंचने तक खिल जाती है। एक रुपये कली के हिसाब से रोजाना 25 हजार कलियां बेचते हैं। दीपावली और नवरात्र में कीमत 20 रुपये प्रति एक फूल या कली होती है। वह 400 बीघा में कमल की खेती कर रहे हैं। 6 से 7 हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है और साल में दो बार फसल मिल जाती है।
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लॉकडाउन में जहां सभी सब्जियों के दाम प्रभावित हुए, तब भी कमल ककड़ी यानी भसींडे के दाम पर कोई फर्क नहीं पड़ा। वहीं, कमल गट्टे भी 90 रुपये प्रति किलो बिक जाते हैं। यह पूजा और भोजन में काम आते हैं। कमल के फूल की सबसे ज्यादा मांग नवरात्रों और दीपावली पर रहती है जिसमें लोग पूजा के लिये इसे खरीदते हैं। किसान सूरजपाल बताते हैं कि दीपावली पर लोग खुद गांव में आकर बीस रूपये के हिसाब से फूल खरीदकर ले जाते हैं और बाजार में और अधिक दामों पर बेच देते हैं। दीपावली के त्योहार पर लोग लक्ष्मी पूजन में कमल के फूल का प्रयोग करते हैं और इसी समय फूल की सबसे ज्यादा मांग होती है।
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